Majitha Dham Barabanki: बाराबंकी के मजीठा धाम में नागपंचमी पर हजारों श्रद्धालु नागदेवता को दूध और चावल की मठिया चढ़ाते हैं। जानिए इस प्राचीन मंदिर का इतिहास, मान्यताएं और धार्मिक महत्व।

Nag Devta Temple Barabanki: सावन और नागपंचमी का पर्व आते ही उत्तर प्रदेश के बाराबंकी स्थित मजीठा धाम श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बन जाता है। नगर मुख्यालय से करीब छह किलोमीटर दूर स्थित इस प्राचीन नागदेवता मंदिर में हजारों श्रद्धालु दूध और चावल से भरी मिट्टी की मठिया चढ़ाने पहुंचते हैं। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, यहां श्रद्धापूर्वक पूजा करने से सर्प भय से मुक्ति और मनोकामनाएं पूर्ण होने का विश्वास किया जाता है।

सदियों पुरानी परंपरा, नागपंचमी पर लगता है विशाल मेला

मजीठा धाम में पूरे वर्ष श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है, लेकिन सावन और विशेष रूप से नागपंचमी के दिन यहां विशाल मेले का आयोजन होता है। आसपास के कई जिलों से बड़ी संख्या में लोग दर्शन करने पहुंचते हैं। मंदिर से जुड़ी स्थानीय मान्यता है कि जिन लोगों के घरों में बार-बार सांप दिखाई देते हैं या जिन्हें सर्पों का भय रहता है, वे यहां दूध और चावल की मठिया अर्पित कर आशीर्वाद मांगते हैं।

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मंदिर के इतिहास से जुड़ी हैं कई मान्यताएं

मंदिर के इतिहास को लेकर स्थानीय लोगों के अलग-अलग मत हैं। कुछ लोगों का मानना है कि इस स्थान से महात्मा बुद्ध का गुजरना हुआ था, जबकि कुछ इसे उनके शिष्य की तपस्थली बताते हैं। मान्यता है कि तपस्या के दौरान नागदेवता ने सर्प रूप में दर्शन दिए, जिसके बाद उन्हें दूध और चावल अर्पित किए गए। तभी से यहां मठिया चढ़ाने की परंपरा चली आ रही है।

आस्था का केंद्र, दूर-दूर से पहुंचते हैं श्रद्धालु

मंदिर से जुड़ी कई धार्मिक मान्यताएं स्थानीय स्तर पर प्रचलित हैं। श्रद्धालु स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना लेकर यहां पहुंचते हैं। नागपंचमी पर सपेरे भी अपने सांपों के साथ यहां आते हैं और श्रद्धालु उनका भी पूजन करते हैं। हालांकि, मंदिर से जुड़ी चमत्कार संबंधी मान्यताएं स्थानीय धार्मिक विश्वासों पर आधारित हैं और इनकी स्वतंत्र वैज्ञानिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

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