Supreme Court Pharma Case: सुप्रीम कोर्ट ने डॉक्टरों को महंगे गिफ्ट, विदेशी यात्राएं और अन्य सुविधाएं देने वाली फार्मा कंपनियों की मार्केटिंग प्रथाओं पर रोक लगाने के लिए केंद्र को तीन सदस्यीय विशेषज्ञ समिति बनाने का आदेश दिया है। समिति मौजूदा नियमों की समीक्षा कर आगे की कानूनी व्यवस्था पर सिफारिश देगी।

Pharmaceutical Marketing: फार्मा कंपनियों की ओर से डॉक्टरों को कथित तौर पर महंगे गिफ्ट, विदेश यात्राएं और दूसरी सुविधाएं देने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने केंद्र सरकार को तीन सदस्यीय विशेषज्ञ समिति गठित करने का निर्देश दिया है। यह समिति दवा कंपनियों की मार्केटिंग गतिविधियों की समीक्षा करेगी और डॉक्टरों को प्रभावित करने वाली ऐसी प्रथाओं पर रोक लगाने के लिए जरूरी सिफारिशें देगी।

फार्मा कंपनियों की मार्केटिंग पर नजर रखेगी कमेटी

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने केंद्र को समिति बनाने का आदेश दिया है। समिति लोगों और संबंधित संस्थाओं से मिले सुझावों और आपत्तियों पर विचार करेगी। इसके बाद वह यह बताएगी कि फार्मास्युटिकल कंपनियों की मार्केटिंग गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए मौजूदा नियम पर्याप्त हैं या अलग से कानूनी व्यवस्था की जरूरत है।

डॉक्टरों को गिफ्ट और विदेशी यात्राओं का आरोप

यह मामला फेडरेशन ऑफ मेडिकल एंड सेल्स रिप्रेजेंटेटिव्स एसोसिएशंस ऑफ इंडिया (FMRAI) की याचिका से जुड़ा है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि कुछ फार्मा कंपनियां डॉक्टरों को महंगे उपहार, विदेशी यात्राएं और दूसरी सुविधाएं देकर अपनी दवाओं की बिक्री बढ़ाने की कोशिश करती हैं। आरोप है कि इसके चलते मरीजों को महंगी ब्रांडेड दवाएं या जरूरत से ज्यादा दवाएं लिखे जाने की आशंका रहती है।

UCPMP 2024 फिलहाल रहेगा लागू

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि Uniform Code for Pharmaceutical Marketing Practices (UCPMP), 2024 फिलहाल लागू है और यह दवा कंपनियों की मार्केटिंग से जुड़े कई पहलुओं को नियंत्रित करता है। सरकार ने हालांकि यह भी माना कि फार्मा कंपनियों के आचरण को सीधे नियंत्रित करने के लिए मौजूदा कानूनों में स्पष्ट वैधानिक व्यवस्था की कमी है। समिति इसी कानूनी खामी की भी समीक्षा करेगी।

डॉक्टरों के लिए पहले से मौजूद हैं नियम

केंद्र के मुताबिक डॉक्टरों को फार्मा कंपनियों से गिफ्ट, यात्रा, हॉस्पिटैलिटी या आर्थिक लाभ लेने पर पहले से नियम लागू हैं। नेशनल मेडिकल कमीशन के नियमों के तहत ऐसे मामलों में डॉक्टरों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है। इसमें चेतावनी से लेकर मेडिकल रजिस्टर से नाम हटाने तक की कार्रवाई संभव है।

UCPMP के तहत अब तक मिलीं तीन शिकायतें

केंद्र ने बताया कि UCPMP के तहत अब तक तीन शिकायतें प्राप्त हुई हैं। इनमें एक मामले में एक फार्मा कंपनी पर करीब 30 डॉक्टरों को महंगी यात्राएं उपलब्ध कराने का आरोप लगा था। कंपनी को नियमों के उल्लंघन के लिए फटकार लगाई गई और संबंधित डॉक्टरों की सूची नेशनल मेडिकल कमीशन को कार्रवाई के लिए भेजी गई।

अब प्रस्तावित तीन सदस्यीय समिति यह देखेगी कि मौजूदा व्यवस्था को और मजबूत किया जाए या फार्मा कंपनियों की मार्केटिंग गतिविधियों के लिए अलग से बाध्यकारी कानूनी ढांचा तैयार किया जाए। समिति की सिफारिशों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।