फर्जी वोटिंग रोकने के लिए पोलिंग बूथों पर फिंगरप्रिंट और आंखों के स्कैन की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई को तैयार हो गया है। कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

नई दिल्ली: चुनावों में होने वाली फर्जी वोटिंग को रोकने के लिए अब एक नई तकनीक की मांग उठी है। सुप्रीम कोर्ट सोमवार को एक ऐसी याचिका पर सुनवाई के लिए तैयार हो गया, जिसमें पोलिंग बूथों पर फिंगरप्रिंट और आंखों के स्कैन (बायोमेट्रिक) से पहचान की व्यवस्था लागू करने की मांग की गई है। कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार, चुनाव आयोग और कुछ अन्य राज्यों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने यह साफ कर दिया कि इस मांग को अभी कुछ राज्यों में हो रहे विधानसभा चुनावों के लिए नहीं माना जा सकता। हालांकि, बेंच ने कहा, 'आने वाले लोकसभा या विधानसभा चुनावों में इसे लागू करने की जरूरत है।'

यह याचिका वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय ने दायर की है। याचिका में कहा गया है कि घूस, गलत प्रभाव और फर्जी वोटिंग जैसी चीजें चुनावी प्रक्रिया की पवित्रता और ईमानदारी पर असर डालती हैं। इससे आम नागरिकों को बहुत बड़ा नुकसान होता है। इसलिए, चुनाव आयोग को निर्देश दिया जाना चाहिए कि वह पोलिंग बूथों पर फिंगरप्रिंट और आंखों के बायोमेट्रिक सिस्टम को लागू करे।