तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने प्रधानमंत्री मोदी से कर्नाटक के मेकेदातु बांध प्रोजेक्ट को मंजूरी न देने की अपील की है। उन्होंने कहा कि बिना संबंधित राज्यों की सहमति के इस प्रोजेक्ट पर कोई फैसला न लिया जाए।
चेन्नई : तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कर्नाटक के प्रस्तावित मेकेदातु बांध परियोजना को लेकर दखल देने की मांग की है। उन्होंने पीएम से अपील की है कि जब तक दूसरे बेसिन राज्यों की सहमति न मिल जाए, तब तक इस प्रोजेक्ट को कोई भी वैधानिक या प्रशासनिक मंजूरी न दी जाए। यह बात उन्होंने प्रस्तावित प्रोजेक्ट साइट पर केंद्र सरकार के अधिकारियों की कथित जांच-पड़ताल को लेकर जताई गई चिंताओं के बीच कही।
पीएम मोदी के लिए सीएम विजय ने लिखी चिट्ठी
- प्रधानमंत्री को 6 नवंबर यानि धनतेरस वाले दिन एक चिट्ठी में लखी, सीएम विजय ने कावेरी नदी पर प्रस्तावित 67.16 टीएमसी वाले इस जलाशय के संभावित असर पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि यह सुप्रीम कोर्ट के तय नियमों के मुताबिक तमिलनाडु को हर महीने मिलने वाले पानी के बहाव पर असर डाल सकता है।
- विजय ने लिखा, "मैं यह चिट्ठी आपका ध्यान एक बहुत ही अहम मुद्दे की तरफ खींचने के लिए लिख रहा हूं। यह मुद्दा तमिलनाडु के कावेरी बेसिन में पानी की लगातार उपलब्धता और कर्नाटक के प्रस्तावित मेकेदातु बांध प्रोजेक्ट को लेकर हमारे किसान भाईयों में बढ़ रही आशंकाओं से जुड़ा है।"
- उन्होंने आगे कहा, "कावेरी नदी पर 67.16 टीएमसी की भारी क्षमता वाला मेकेदातु जलाशय बनाने का कर्नाटक सरकार का प्रस्ताव न केवल तमिलनाडु के हिस्से के पानी के बहाव को रोकेगा, बल्कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार कावेरी बेसिन के लोगों को हर महीने मिलने वाले पानी पर भी बुरा असर डालेगा।"
सीएम विजय ने बयां किया किसानों का दर्द
कर्नाटक के मुख्यमंत्री और जल शक्ति मंत्रालय और पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अधिकारियों के बीच विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) को मंजूरी देने के संबंध में हुई बैठकों की खबरों पर चिंता जताते हुए विजय ने कहा कि ऐसे घटनाक्रमों ने तमिलनाडु के किसानों को "लगातार चिंता" में डाल रखा है। उन्होंने प्रस्तावित बांध वाली जगह पर केंद्र सरकार के अधिकारियों की एक टीम के दौरे की खबरों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु के किसान इस घटनाक्रम को एक ऐसे प्रोजेक्ट के आगे बढ़ने का संकेत मानते हैं जो उनकी आजीविका को खतरे में डाल सकता है। उन्होंने कहा, "तमिलनाडु के चिंतित किसान साइट के दौरे को इस बात का संकेत मानते हैं कि एक ऐसे प्रोजेक्ट पर गुपचुप तरीके से काम चल रहा है जो उनकी आजीविका को पूरी तरह से खतरे में डाल देगा।"














