तारिक रहमान 17 साल के निर्वासन के बाद बांग्लादेश की सत्ता के करीब हैं। भारत ने पहले ही बधाई देकर रिश्ते सुधारने के संकेत दिए हैं। हिंदुओं की सुरक्षा, तीस्ता जल बंटवारा और शेख हसीना का मुद्दा भविष्य के संबंधों की दिशा तय करेंगे।
Tarique Rahman Bangladesh BNP: बांग्लादेश चुनाव में तारिक रहमान के नेतृत्व वाली बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने 299 में से 212 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया है। यानी अब तारिक रहमान का प्रधानमंत्री बनना तय है। पीएम नरेंद्र मोदी ने भी BNP र तारिक रहमान को बधाई दी है। बीएनपी की सत्ता में वापसी भारत और बांग्लादेश में रह रहे हिंदुओं के लिए क्या मायने रखती है। क्या अब दोनों देशों के रिश्ते सुधरेंगे, जानते हैं ऐसे ही सवालों के जवाब।
भारत ने चुनाव नतीजों से पहले बधाई क्यों दी?
भारत ने आधिकारिक नतीजे आने से पहले ही तारिक रहमान को बधाई दे दी थी। इससे संकेत मिलता है कि भारत, शेख हसीना की 2024 में सत्ता से विदाई के बाद बिगड़े रिश्तों को सुधारना चाहता है। भारत के लिए BNP को जमात-ए-इस्लामी की तुलना में अधिक उदार और लोकतांत्रिक विकल्प माना जाता रहा है।
तारिक रहमान का ‘बांग्लादेश फर्स्ट’ एजेंडा क्या है?
तारिक रहमान ‘बांग्लादेश फर्स्ट’ एजेंडा लेकर आए हैं, जिसे अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ‘अमेरिका फर्स्ट’ मॉडल से प्रेरित बताया जा रहा है। उन्होंने कहा है कि बांग्लादेश भारत, चीन और पाकिस्तान से समान दूरी रखेगा। यह भारत के लिए राहत की बात है, क्योंकि अंतरिम सरकार के दौरान बांग्लादेश ने पाकिस्तान और चीन से नजदीकियां बढ़ाई थीं।
भारत की कूटनीतिक पहल क्या रही?
जब तारिक रहमान की मां खालिदा जिया बीमार थीं, तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सार्वजनिक रूप से चिंता जताई थी। उनकी मृत्यु के बाद विदेश मंत्री एस. जयशंकर 2024 की अशांति के बाद ढाका जाने वाले पहले भारतीय नेता बने। उन्होंने तारिक रहमान को प्रधानमंत्री मोदी का निजी पत्र सौंपा। शुक्रवार को प्रधानमंत्री मोदी ने सबसे पहले तारिक को बधाई देते हुए कहा कि वे भारत-बांग्लादेश के बहुआयामी संबंधों को मजबूत करने के लिए साथ काम करने को तैयार हैं।
भारत-बांग्लादेश संबंधों के मौजूदा हालात क्या हैं?
भारत और बांग्लादेश के बीच लगभग 4000 किलोमीटर लंबी सीमा है। दोनों देशों के बीच व्यापार, बिजली आपूर्ति और कनेक्टिविटी गहराई से जुड़ी हुई है। भौगोलिक रूप से भारत, बांग्लादेश के लिए बेहद अहम है। लेकिन दूसरी ओर, बांग्लादेश के युवा वर्ग (Gen Z) में भारत को लेकर संदेह बढ़ा है। शेख हसीना के भारत में शरण लेने और उन्हें वापस भेजने की मांग पर भारत की धीमी प्रतिक्रिया ने कुछ वर्गों में असंतोष पैदा किया है।
बांग्लादेश में हिंदुओं की सुरक्षा को लेकर क्या हालात?
हाल के महीनों में बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमलों की खबरें सामने आईं। करीब 45 दिनों में लगभग 15 हिंदुओं की हत्या की घटनाएं बताई गईं, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ी। तारिक रहमान ने अपने पहले संबोधन में भारत विरोधी भावना को बढ़ावा नहीं दिया। उन्होंने कहा कि धर्म व्यक्तिगत है, लेकिन राज्य सबका है। इससे उम्मीद जगी है कि हिंदू समुदाय की सुरक्षा को लेकर सख्त कदम उठाए जा सकते हैं।
कौन-से मुद्दे तय करेंगे भारत-बांग्लादेश संबंधों की दिशा?
हालांकि, तारिक रहमान दोस्ती की बात कर रहे हैं, लेकिन कुछ मुद्दों पर उनका रुख सख्त माना जा रहा है। इनमें सीमा पर होने वाली हत्याएं, तीस्ता और पद्मा नदियों के पानी का बंटवारा और शेख हसीना का प्रत्यर्पण शामिल हैं। ये मुद्दे आने वाले समय में भारत-बांग्लादेश संबंधों की दिशा तय कर सकते हैं।
2001–2006 के दौर में रिश्ते कैसे थे?
2001 से 2006 के दौरान जब BNP सत्ता में थी, तब भारत-बांग्लादेश संबंध काफी खराब माने जाते थे। उस समय जमात-ए-इस्लामी BNP की सहयोगी थी। भारत ने आरोप लगाया था कि बांग्लादेश ने पाकिस्तान समर्थित आतंकियों और उत्तर-पूर्व भारत के उग्रवादियों को शरण दी थी।
क्या ‘तारिक रहमान 2.0’ नया अध्याय शुरू करेंगे?
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या तारिक रहमान का नया नेतृत्व भारत के साथ रिश्तों में नया अध्याय शुरू करेगा? क्या बांग्लादेश में हिंदुओं की सुरक्षा बेहतर होगी? क्या शेख हसीना का मुद्दा तनाव बढ़ाएगा? आने वाले साल तय करेंगे कि भारत-बांग्लादेश की दोस्ती फिर से मजबूत होगी या संबंध किसी नई दिशा में आगे बढ़ेंगे।
17 साल बाद बांग्लादेश लौटे तारिक रहमान को मिली सत्ता
तारिक रहमान बांग्लादेश की प्रमुख राजनीतिक पार्टी BNP (बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी) के शीर्ष नेता हैं। वे देश के सबसे ताकतवर राजनीतिक परिवारों में से एक के वारिस माने जाते हैं। उन पर 2004 के चिटगांव हथियार कांड में शामिल होने के आरोप लगे थे। 2007 में उन्हें गिरफ्तार किया गया और 2008 में इलाज के लिए वे ब्रिटेन चले गए। 17 साल निर्वासन में रहने के बाद दिसंबर में वे लंदन से लौटे। 2024 में शेख हसीना की सत्ता से विदाई के बाद उन्हें सभी मामलों में बरी कर दिया गया।


