Shravan Venkataraman ने हाई-राइज़ गेटेड कम्युनिटीज़ की RWA कमेटियों पर क्या आरोप लगाए? Hyderabad में चोरी की घटना के बाद CCTV फुटेज मांगने पर श्रवण के साथ क्या हुआ? सोशल मीडिया पर वायरल हुई इस बहस में युवाओं और बुज़ुर्गों ने गेटेड कम्युनिटीज़ के नियमों और माहौल को लेकर क्या-क्या तर्क दिए?

जकल बड़ी-बड़ी गेटेड कम्युनिटीज़ में रहना स्टेटस और लग्ज़री की निशानी बन गया है। लेकिन, सॉफ्टवेयर इंजीनियर श्रवण वेंकटरामन ने जो कड़वा अनुभव शेयर किया है, वह इन चमचमाती दीवारों के पीछे की एक स्याह सच्चाई सामने लाता है। उन्होंने X (ट्विटर) पर एक लंबे पोस्ट में बताया है कि कैसे हाई-राइज़ सोसायटियों में रहने वाले युवा जोड़ों और बैचलर्स को "बुजुर्गों की तानाशाही" और "पावर ट्रिप" का सामना करना पड़ रहा है। उनका यह पोस्ट अब देश भर में वायरल हो गया है और इस पर ज़बरदस्त बहस छिड़ गई है।

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अपने ही घर में अजनबियों जैसी ज़िंदगी

श्रवण का तर्क है कि बड़ी अपार्टमेंट्स की 'रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन' (RWA) कमेटियों में ज़्यादातर रिटायर्ड बुज़ुर्ग भरे होते हैं। उनका मुख्य आरोप है कि ये लोग अपने खाली समय का इस्तेमाल दूसरों की निजी ज़िंदगी को कंट्रोल करने में करते हैं। युवाओं की लाइफस्टाइल, घर आने वाले मेहमान, खाने-पीने की आदतें, यहाँ तक कि शिकायत करने के हक पर भी ये लोग बेवजह की पाबंदियाँ लगाते हैं। अगर कोई इन कमेटियों के बेतुके फैसलों पर सवाल उठा दे, तो उसे सबके सामने बेइज़्ज़त किया जाता है। खासकर किराएदारों को तो ये लोग पैसे देने वाली मशीन समझते हैं, बराबर सम्मान वाले निवासी नहीं। इस वजह से कई युवाओं को अपने ही घर में अजनबियों की तरह रहना पड़ रहा है।

वॉट्सऐप ग्रुप में सवाल पूछा तो भड़क गए

इस बहस की शुरुआत श्रवण के साथ हैदराबाद में हुई एक घटना से हुई। जब उनके घर में चोरी हुई, तो उन्होंने सुरक्षा के लिए CCTV फुटेज मांगी। लेकिन उन्हें यह गैर-ज़िम्मेदाराना जवाब मिला कि CCTV कैमरे काम ही नहीं कर रहे हैं। जब उन्होंने इस बारे में निवासियों के वॉट्सऐप ग्रुप में जानकारी दी और सुरक्षा के लिए पर्सनल कैमरा लगाने की सलाह दी, तो RWA के पदाधिकारी आग-बबूला हो गए। अगले दिन उन्हें क्लब हाउस में बुलाया गया और प्रेसिडेंट ने सुरक्षा की कमी पर एक्शन लेने के बजाय, सबके सामने चिल्लाकर कहा, "तुम सोसायटी की मान-मर्यादा और इज़्ज़त खराब कर रहे हो।" यह घटना आज के अपार्टमेंट कल्चर में मैनेजमेंट की गंभीर खामियों को दिखाती है।

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

यह पोस्ट वायरल होते ही हज़ारों युवाओं ने अपने साथ हुई मोरल पुलिसिंग और प्राइवेसी के हनन के अनुभव शेयर किए। कुछ लोगों ने शिकायत की कि सिक्योरिटी गार्ड्स मेहमानों से ज़रूरत से ज़्यादा पूछताछ और प्रोफाइलिंग करते हैं। वहीं, दूसरी तरफ कुछ बुज़ुर्गों ने कमेटी का बचाव करते हुए तर्क दिया कि "हज़ारों लोगों वाली जगह पर अनुशासन, शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए ऐसे कड़े नियम ज़रूरी हैं।"

आखिर में श्रवण की सलाह यही है कि, "युवाओं के लिए बहुत ज़्यादा निगरानी और किच-किच वाली बड़ी सोसायटियों के बजाय 25-30 घरों वाली छोटी बिल्डिंग्स में रहना सुकून के लिहाज़ से बेहतर है।" यह मामला अब पुरानी परंपरावादी सोच और नई पीढ़ी की पर्सनल आज़ादी के बीच एक बड़े टकराव में बदल गया है। अगर यह ट्रेंड जारी रहा, तो गेटेड कम्युनिटीज़ सिर्फ कंक्रीट की जेल बनकर रह जाएंगी।

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