तेलंगाना के मेडक में 13 बच्चों के एक पिता को उनके बेटों ने बेसहारा छोड़ दिया है। अपनी सारी संपत्ति बच्चों पर खर्च करने के बाद, वह अब भीख मांगकर गुजारा कर रहे हैं। उन्होंने अधिकारियों से न्याय की गुहार लगाई है।
मेडक (तेलंगाना): कहते हैं कि बच्चे बुढ़ापे का सहारा होते हैं, लेकिन तेलंगाना से एक ऐसी कहानी सामने आई है जो इस बात को झूठा साबित करती है। यहां 13 बच्चों को पाल-पोसकर बड़ा करने वाले एक बाप को आज एक वक्त की रोटी भी नसीब नहीं हो रही है। यह दर्दभरी कहानी मेडक जिले की है, जिसने पूरे समाज को शर्मसार कर दिया है।
यह कहानी मेडक जिले के नवापेटे गांव में रहने वाले एम.बी. महबूब की है। उनके 8 बेटे और 5 बेटियां हैं। महबूब ने अपनी तीन एकड़ जमीन, घर और यहां तक कि भैंसें भी बेचकर अपने सभी बच्चों की शादियां करवाईं और उन्हें अपने पैरों पर खड़ा किया। लेकिन छह साल पहले पत्नी की मौत के बाद महबूब की ज़िंदगी नरक बन गई।
महबूब के आठ में से सात बेटे हैदराबाद में अच्छी ज़िंदगी जी रहे हैं। एक बेटा गांव में ही रहता है। इसके बावजूद, पिछले एक साल से इस बूढ़े बाप को किसी ने दो वक्त की रोटी तक नहीं पूछी। भूख से तड़पकर महबूब गांव में घर-घर भीख मांगकर अपना पेट भर रहे हैं और एक टूटे-फूटे पुराने घर के कोने में अपनी ज़िंदगी काट रहे हैं।
बेटों के इंतज़ार में 3 दिन थाने में ही पड़े रहे!
कुछ दिन पहले महबूब अपनी परेशानी लेकर पुलिस के पास पहुंचे थे। पुलिस ने उनके बेटों को बुलाया, लेकिन कोई भी नहीं आया। इस बूढ़े पिता ने इस उम्मीद में तीन दिनों तक पुलिस स्टेशन में ही डेरा डाले रखा कि शायद उनके बेटे आएंगे और उन्हें अपने साथ ले जाएंगे। आखिर में, पुलिस ने ही उन्हें वापस गांव भिजवा दिया।
अधिकारी के पैर पकड़कर फूट-फूटकर रोए
सोमवार को हुए एक जन सुनवाई कार्यक्रम में महबूब ने MPDO (मंडल परिषद विकास अधिकारी) वेंकटलक्ष्मी के पैर पकड़ लिए और फूट-फूटकर रोने लगे। उन्होंने रोते हुए कहा, "मैडम, प्लीज मेरे बच्चों से कहिए कि मुझे दिन में बस एक वक्त का खाना दे दें। अगर मेरी बीवी ज़िंदा होती तो मेरी ये हालत नहीं होती।" उनकी यह हालत देखकर वहां मौजूद हर किसी की आंखें नम हो गईं। अधिकारियों ने महबूब को न्याय दिलाने का भरोसा दिया है। लेकिन सवाल यह है कि जो बच्चे अपने पिता को एक निवाला नहीं दे सकते, क्या वो इंसान कहलाने के लायक हैं?
