सरकार के Telecom Sandbox Rules 2026 के तहत स्टार्टअप्स और शोधकर्ता नई टेलीकॉम तकनीकों, सेवाओं और बिजनेस मॉडल का नियंत्रित माहौल में ट्रायल कर सकेंगे। जानें ₹10,000 आवेदन फीस, 24 महीने की अवधि, नियामक छूट और यूजर की सहमति से जुड़े नियम।
Telecom Regulatory Sandbox Rules 2026: दूरसंचार के क्षेत्र में नए विचारों और तकनीकों को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार ने 'टेलीकम्युनिकेशंस (रेगुलेटरी सैंडबॉक्स) नियम, 2026' का गजट नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इस नए फ्रेमवर्क की मदद से देश के स्टार्टअप्स, रिसर्चर्स और कंपनियां बिना किसी कानूनी अड़चन के एक नियंत्रित माहौल (controlled environment) में अपनी नई टेलीकॉम टेक्नोलॉजी, सेवाओं और बिजनेस मॉडल का लाइव ट्रायल कर सकेंगे।
सैंडबॉक्स ट्रायल की फीस और समयावधि की शर्तें
सरकार ने इन परीक्षणों के लिए एक निश्चित समय-सीमा और फीस तय की है:
- 24 महीने की शुरुआती अवधि: कोई भी रेगुलेटरी सैंडबॉक्स शुरुआत में अधिकतम 2 साल के लिए मान्य होगा, जिसे जरूरत पड़ने पर 12 महीने के लिए और बढ़ाया जा सकता है।
- 10,000 रुपये फीस: ट्रायल की अनुमति या एक्सटेंशन मांगने के लिए आवेदकों को 10,000 रुपये की नॉन-रिफंडेबल प्रोसेसिंग फीस देनी होगी।
- जरूरी दस्तावेज: आवेदकों को अपनी पुरानी लैब टेस्ट रिपोर्ट और नियमों से मांगी जा रही छूट का पूरा ब्योरा सरकारी पोर्टल पर ऑनलाइन जमा करना होगा।
यूजर्स की सुरक्षा और फ्री ट्रायल का नियम
नए फ्रेमवर्क में आम लोगों की सुरक्षा का भी पूरा ख्याल रखा गया है:
- सहमति अनिवार्य: परीक्षण में शामिल होने वाले यूजर्स से पहले लिखित या डिजिटल सहमति (consent) लेना अनिवार्य होगा।
- ट्रायल बिल्कुल मुफ्त: कंपनियां परीक्षण में शामिल यूजर्स से कोई भी फीस या चार्ज वसूल नहीं कर सकती हैं।
- कमर्शियल बिक्री पर रोक: सैंडबॉक्स के तहत टेस्ट की जा रही तकनीक या सर्विस की बाजार में व्यावसायिक बिक्री पर पूरी तरह बैन रहेगा।
रिकॉर्ड संभालकर रखना होगा जरूरी
कंपनियों को अपनी टेस्टिंग प्रक्रिया, यूजर कंसेंट और एक्शन प्लान से जुड़े सभी दस्तावेज संभालकर रखने होंगे। सैंडबॉक्स खत्म होने के बाद भी कम से कम 1 साल तक इन रिकॉर्ड्स को सुरक्षित रखना अनिवार्य होगा।









