अभिनेता विजय ने फिल्में छोड़ राजनीति में प्रवेश कर तमिलनाडु में सफलता पाई है। जनसेवा की प्रतिबद्धता और आकर्षक घोषणापत्र ने उन्हें DMK-AIADMK के सामने एक मजबूत तीसरे विकल्प के रूप में स्थापित किया है।

तमिलनाडु की राजनीति में सिनेमा और विचारधारा का हमेशा से गहरा रिश्ता रहा है। एम.जी. रामचंद्रन, करुणानिधि और जयललिता जैसे दिग्गजों की इस धरती पर अब एक और फिल्मी सुल्तान का उदय हुआ है। दशकों से रजनीकांत के 'राजनीति में आने' के संकेत झूठे साबित हुए, कमल हासन की 'मक्कल नीधि मैय्यम' पार्टी भी उम्मीद के मुताबिक कुछ खास नहीं कर पाई। लेकिन, जो करिश्मा ये दोनों नहीं कर पाए, वो 'थलपति' विजय ने कर दिखाया है।

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विजय की जीत के पीछे वो 'एक' बड़ा फैसला!

विजय की जीत का असली राज उनके एक बड़े फैसले में छिपा है। राजनीति में आने वाले हजारों एक्टर फिल्मों के साथ-साथ सत्ता भी चाहते हैं। लेकिन विजय ने ऐसा नहीं किया। उन्होंने ऐलान किया, "अब फिल्में नहीं, सिर्फ जनसेवा मेरा लक्ष्य है।" फिल्म इंडस्ट्री को पूरी तरह अलविदा कहने के उनके इस फैसले ने वोटर्स का दिल जीत लिया। लोगों में यह भरोसा जगा कि "ये आदमी सत्ता के लिए नहीं, बदलाव के लिए आया है।" दो नावों पर पैर रखने के बजाय, एक फुल-टाइम राजनेता के तौर पर जनता के सामने आना ही उनकी पहली जीत थी।

घर का बेटा बनकर आए 'जननायक'!

सिर्फ 52 साल के विजय को तमिलनाडु के युवाओं का ज़बरदस्त सपोर्ट मिला। अपने पूरे प्रचार के दौरान उन्होंने लोगों से भावनात्मक जुड़ाव बनाया और कहा, "मैं आपके घर का सदस्य हूं, आपके परिवार के हर शख्स के लिए आया हूं।" उन्होंने जाति और धर्म की दीवारों को तोड़कर तमिल पहचान को सबसे ऊपर रखा। DMK और AIADMK की राजनीति से तंग आ चुकी जनता को विजय एक ताज़े और भरोसेमंद 'तीसरे विकल्प' के तौर पर दिखे।

घोषणापत्र का वो जादू, जिसने सबको चौंका दिया!

विजय सिर्फ बातों के शेर नहीं निकले, बल्कि उन्होंने लोगों की आर्थिक मुश्किलों को दूर करने वाला एक शानदार घोषणापत्र तैयार किया। उनके घोषणापत्र के इन वादों ने विरोधियों की नींद उड़ा दी…

  • हर परिवार को 25 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा।
  • छात्रों के लिए 20 लाख रुपये का बिना ब्याज का एजुकेशन लोन।
  • महिलाओं को हर महीने ₹2,500 पेंशन और साल में 6 मुफ्त गैस सिलेंडर।
  • युवाओं के लिए 5 लाख सरकारी नौकरियां और स्थानीय लोगों के लिए 75% आरक्षण।
  • भविष्य को देखते हुए AI मंत्रालय और AI यूनिवर्सिटी बनाने का वादा।

लोगों ने इन वादों को सिर्फ सपना नहीं, बल्कि एक नए तमिलनाडु का रास्ता माना। DMK और AIADMK के पुराने खेल से ऊब चुके वोटर्स ने थलपति के नए गेम पर भरोसा जताया।

MGR और जयललिता के बाद फिल्मी दुनिया से राजनीति में आकर इतनी बड़ी सफलता पाने वाले विजय अकेले हैं। लेकिन, अब सीएम की कुर्सी पर बैठने जा रहे विजय के सामने हिमालय जैसी चुनौतियां हैं। क्या वो अपने बड़े-बड़े वादों को पूरा कर पाएंगे? तमिलनाडु के इस 'अग्निपथ' पर विजय का रथ आसानी से चल पाएगा? यह देखना दिलचस्प होगा।

कुल मिलाकर, थलपति का दरबार अब शुरू हो गया है, असली पिक्चर तो अभी बाकी है!