प्रधानमंत्री मोदी ने गुजरात के सानंद में जिस CG सेमी OSAT फैसिलिटी का उद्घाटन किया, वहां काम करने वाली महिला कर्मचारियों ने गुजरात में काम करने के अपने सफर के बारे में बताया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के सानंद में CG सेमी OSAT फैसिलिटी का उद्घाटन किया। यहां काम करने वाली महिला कर्मचारियों का कहना है कि वे "इतिहास रचेंगी"। 4 जुलाई को PM मोदी ने सानंद में CG सेमी की इस फैक्टरी में सेमीकंडक्टर चिप्स के कमर्शियल प्रोडक्शन की शुरुआत की। PM मोदी ने अपने भाषण में जिन युवा लड़कियों का जिक्र किया था, उनमें से कुछ ने अपनी कहानी बताई।

महिला कर्मचारियों ने बताई अपनी कहानी
गुजरात CMO के मुताबिक, मशीन ऑपरेटर पूनम कुमारी झारखंड के गिरिडीह जिले की रहने वाली हैं। उनके पिता अब इस दुनिया में नहीं हैं और वह अपनी मां के साथ रहती हैं। अपने सफर के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा, "मैं पहले कभी झारखंड से बाहर नहीं गई थी। जब हमें ट्रेनिंग के लिए मलेशिया भेजा गया, तो सब कुछ हमारे लिए नया था। जब भी हमें कुछ समझने में मुश्किल होती थी, तो ट्रेनर हमें हिंदी में समझाते थे और प्रैक्टिकल करके भी दिखाते थे। इससे सीखना बहुत आसान हो गया।"
झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले की मशीन ऑपरेटर प्रियंका धनवर ने बताया कि उनकी सफलता से उनके माता-पिता बहुत गर्व महसूस कर रहे हैं। वह अपने परिवार में विदेश जाने वाली पहली सदस्य हैं। प्रेस रिलीज के अनुसार, मध्य प्रदेश की शिवानी ने कहा, "जब हमारे माता-पिता ने हमारी कामयाबी देखी, तो उनकी आंखों में खुशी के आंसू आ गए। हम CG सेमी के साथ मिलकर इतिहास रचने जा रहे हैं।"
PM मोदी ने की 'असाधारण' काम की तारीफ
शनिवार को, देश के सेमीकंडक्टर मिशन में महिलाओं के अहम योगदान पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, "यहां काम करने वाली बहनें और बेटियां झारखंड, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के आदिवासी इलाकों से आई हैं। जब इन युवा लड़कियों ने मुझे फैक्टरी घुमाई, तो उन्होंने बड़े आत्मविश्वास, उत्साह और तकनीकी जानकारी के साथ बनाने की प्रक्रिया का हर स्टेज समझाया। ये बेटियां, जो सामान्य परिवारों से आती हैं, सामान्य स्कूलों में पढ़ी हैं और ITI से शिक्षा ली है, आज असाधारण काम कर रही हैं।"
प्रधानमंत्री ने आगे जोर देकर कहा, "एक समय था जब माता-पिता यह कहने में झिझकते थे कि उनके बच्चे ITI में पढ़े हैं। लेकिन वह दौर अब बीत चुका है। इन युवा लड़कियों ने भले ही ITI से पढ़ाई की हो, लेकिन उनकी आकांक्षाएं असाधारण हैं। उनमें से कई ऐसे परिवारों से हैं जहां किसी ने कभी पासपोर्ट के लिए अप्लाई तक नहीं किया था या देखा भी नहीं था। विदेश यात्रा तो छोड़िए, कई तो कभी दिल्ली या मुंबई भी नहीं गई थीं। लेकिन आज यही बेटियां एडवांस ट्रेनिंग के लिए मलेशिया गई हैं, अत्याधुनिक सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी में महारत हासिल की है, और अब 'मेड इन इंडिया' सेमीकंडक्टर चिप्स बनाने में अहम भूमिका निभा रही हैं।"


