UNGA 81 में डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका की ताकत, ईरान युद्ध, गाजा, रूस-यूक्रेन संघर्ष और टैरिफ नीति पर बात की। उन्होंने 8 युद्ध सुलझाने का दावा किया। अब 26 सितंबर को जयशंकर संबोधित करेंगे।
न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का संबोधन घरेलू उपलब्धियों और विदेश नीति के दावों का मिला-जुला रूप रहा। ट्रंप ने अमेरिका की अर्थव्यवस्था, सीमा सुरक्षा और अपराध का जिक्र किया तो ईरान, गाजा और रूस-यूक्रेन युद्ध पर भी अपना रुख रखा। उन्होंने खुद को युद्ध रोकने की कोशिशों और अंतरराष्ट्रीय समझौतों के केंद्र में रखा।
'अमेरिका की वापसी हो चुकी है'
ट्रंप ने भाषण की शुरुआत अमेरिका की घरेलू स्थिति से की। उन्होंने कहा कि अमेरिका पहले से ज्यादा मजबूत है और टेक्नोलॉजी समेत कई क्षेत्रों में दुनिया में आगे है। उन्होंने शेयर बाजार, गरीबी दर, दक्षिणी सीमा पर अवैध प्रवेश रोकने और अमेरिकी शहरों में हिंसक अपराध में कमी का भी उल्लेख किया। ट्रंप का यह हिस्सा काफी हद तक उनके प्रशासन की घरेलू नीतियों और उपलब्धियों को रेखांकित करने वाला रहा।
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ईरान पर फिर बरसे ट्रंप, परमाणु हथियार का मुद्दा उठाया
ईरान पर ट्रंप का रुख भाषण के सबसे सख्त हिस्सों में रहा। उन्होंने कहा कि अमेरिका ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा और ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का बचाव किया। उन्होंने ईरान से भविष्य में समझौते की संभावना भी खुली रखी और कहा कि मध्यावधि चुनावों के बाद डील पर बातचीत हो सकती है। ट्रंप ने ईरान में प्रदर्शनकारियों की मौत और अमेरिकी सैन्य कार्रवाई से जुड़े कई आंकड़े भी बताए। इन दावों को उनके भाषण में किए गए दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
गाजा और यूक्रेन पर भी ट्रंप का फोकस
गाजा का जिक्र करते हुए ट्रंप ने कहा कि 30 से ज्यादा देश गाजा पीस बोर्ड में शामिल हैं और अरब देश पुनर्निर्माण में भाग ले रहे हैं। वहीं रूस-यूक्रेन युद्ध पर उन्होंने इसे खत्म कराने की अपनी कोशिशों का जिक्र किया।
ट्रंप ने युद्ध में बड़ी संख्या में सैनिकों के मारे जाने का दावा किया। इससे पहले भी वह रूस-यूक्रेन संघर्ष में करीब 25 हजार सैनिकों के हर महीने मारे जाने का आंकड़ा बता चुके हैं।
'मैंने 8 युद्ध खत्म कराए', टैरिफ को बताया हथियार
ट्रंप ने अपने पुराने दावे को भी दोहराया कि उन्होंने आठ युद्धों को सुलझाने में भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि इसके लिए रिश्तों के साथ-साथ व्यापार और टैरिफ लगाने या टैरिफ की धमकी देने का इस्तेमाल किया गया।
उन्होंने भारत-पाकिस्तान और आर्मेनिया-अजरबैजान समेत कई संघर्षों का उदाहरण दिया। हालांकि इन संघर्षों को लेकर अलग-अलग पक्षों और सरकारों की अपनी व्याख्याएं रही हैं, इसलिए ट्रंप के दावे को उनके बयान के रूप में देखना जरूरी है।
UNGA में भारत की ओर से जयशंकर रखेंगे पक्ष
UNGA के 81वें सत्र में भारत का प्रतिनिधित्व विदेश मंत्री एस. जयशंकर कर रहे हैं। विदेश मंत्रालय के अनुसार जयशंकर 26 सितंबर को महासभा को संबोधित करेंगे और हाई-लेवल वीक के दौरान विभिन्न द्विपक्षीय और बहुपक्षीय बैठकों में भी हिस्सा लेंगे। ट्रंप के भाषण के बाद अब भारत समेत अन्य देशों के संबोधनों पर नजर रहेगी, खासकर ऐसे समय में जब ईरान, गाजा और यूक्रेन जैसे मुद्दे वैश्विक कूटनीति के केंद्र में हैं।
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