डिअर लेडीज! UP बजट 2026 का ये हिस्सा जरूर पढ़ लें, आपकी आर्थिक तंगी दूर हो सकती है!
UP Mahila Samarthya Yojana Budget: महिलाओं के लिए बड़ा फोकस। 39,880 बीसी सखी ने 39,000 करोड़ का लेन-देन किया। महिला सामर्थ्य योजना, गन्ना किसान प्राथमिकता, सेफ सिटी, वर्किंग वूमेन हॉस्टल और सुमंगला योजना से जानिए कैसे बदल सकती है आपकी आर्थिक स्थिति।

डिअर लेडीज! यूपी बजट 2026 में छुपा है आपकी कमाई बढ़ाने का राज
लखनऊ। अक्सर बजट को आंकड़ों का दस्तावेज समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है, लेकिन इस बार उत्तर प्रदेश के बजट में महिलाओं के लिए जो प्रावधान किए गए हैं, वे सीधे उनकी आय, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता से जुड़े हैं। यदि आप गांव की गृहिणी हैं, स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हैं, किसान हैं या नौकरीपेशा महिला, तो यह बजट आपके लिए अवसरों का नया दरवाजा खोल सकता है। वित्त वर्ष 2025-26 के आंकड़े बताते हैं कि सरकार ने महिला सशक्तिकरण को सिर्फ नारे तक सीमित नहीं रखा, बल्कि वित्तीय और संस्थागत ढांचे के जरिए उसे जमीन पर उतारने की कोशिश की है।
बीसी सखी मॉडल: गांव-गांव में आर्थिक ताकत
प्रदेश की 58,000 ग्राम पंचायतों में 39,880 बीसी सखियों ने 39,000 करोड़ रुपये से अधिक का वित्तीय लेन-देन किया। इस प्रक्रिया से लगभग 107 करोड़ रुपये का लाभ अर्जित हुआ।
बीसी सखी केवल बैंकिंग प्रतिनिधि नहीं हैं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की कड़ी बन चुकी हैं। वे गांवों में महिलाओं को बैंकिंग सेवाओं, सरकारी योजनाओं और डिजिटल भुगतान से जोड़ रही हैं। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह मॉडल ग्रामीण महिलाओं को नकदी प्रबंधन, बचत और छोटे ऋण तक आसान पहुंच देकर आत्मनिर्भर बना रहा है।
महिला सामर्थ्य योजना: दूध से मजबूत होती आय
महिला सामर्थ्य योजना के तहत 5 मिल्क प्रोड्यूसर कंपनियों के गठन का लक्ष्य रखा गया था। इसके तहत गोरखपुर, बरेली और रायबरेली में कंपनियां गठित होकर दुग्ध संग्रहण और विपणन कार्य शुरू कर चुकी हैं। प्रयागराज और लखनऊ में भी गठन प्रस्तावित है।
दुग्ध उत्पादन से जुड़ी महिलाएं अब सीधे बाजार से जुड़ रही हैं। इससे बिचौलियों पर निर्भरता कम होती है और आय में वृद्धि की संभावना बढ़ती है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह मॉडल महिलाओं की नियमित आमदनी का स्थायी स्रोत बन सकता है।
महिला गन्ना किसानों को प्राथमिकता
प्रदेश की लगभग 60,000 महिला गन्ना किसानों को पर्ची निर्गमन में प्राथमिकता दी जा रही है। इससे भुगतान प्रक्रिया में तेजी आती है और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होती है। खेती में महिलाओं की भूमिका लंबे समय से रही है, लेकिन औपचारिक पहचान और प्राथमिकता मिलना उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में अहम कदम है।
सुरक्षा और सम्मान: सेफ सिटी और वर्किंग वूमेन हॉस्टल
आर्थिक सशक्तिकरण के साथ सुरक्षा भी जरूरी है। सेफ सिटी परियोजना के तहत:
- महिला पुलिस बीट की तैनाती
- व्यापक सीसीटीवी नेटवर्क
- एंटी रोमियो स्क्वाड की सक्रियता
इन कदमों से सार्वजनिक और कार्यस्थलों पर सुरक्षा का वातावरण मजबूत हुआ है। इसके अलावा नगर निगमों में वर्किंग वूमेन हॉस्टल का निर्माण किया जा रहा है, ताकि कामकाजी महिलाओं को नए शहरों में सुरक्षित और किफायती आवास मिल सके।
मिशन शक्ति और सुमंगला योजना: सुरक्षा से लेकर शिक्षा तक
मिशन शक्ति के अंतर्गत सुरक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार सेवाओं को एकीकृत कर महिलाओं की आत्मनिर्भरता को गति दी जा रही है। मुख्यमंत्री सुमंगला योजना के तहत जनवरी 2026 तक 26.81 लाख बालिकाएं लाभान्वित हो चुकी हैं। यह योजना जन्म से लेकर शिक्षा तक आर्थिक सहयोग देकर बालिकाओं के भविष्य को सुरक्षित करने का प्रयास है।
बीसी सखी से लेकर मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी, गन्ना किसानों की प्राथमिकता से लेकर सुरक्षित आवास तक, ये सभी प्रावधान संकेत देते हैं कि सरकार महिलाओं को आर्थिक इकाई के रूप में स्थापित करना चाहती है।
हालांकि किसी भी योजना की सफलता उसके पारदर्शी क्रियान्वयन और वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंच पर निर्भर करती है। लेकिन यदि आप स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हैं, डेयरी या खेती करती हैं, या नौकरी के लिए शहर जा रही हैं, तो यह बजट आपके लिए अवसरों का दस्तावेज है।
डिअर लेडीज, इस बार बजट सिर्फ सरकार का नहीं, आपके आर्थिक भविष्य का भी है। इसे समझिए, योजनाओं की जानकारी लीजिए और अपने हक का लाभ उठाइए।
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