UP Election 2027: कांग्रेस ने समाजवादी पार्टी के साथ 170 विधानसभा सीटों की सूची साझा की है। पार्टी 115-120 सीटों पर दावा कर रही है। जानिए सीट शेयरिंग का फॉर्मूला, अखिलेश यादव का रुख और कांग्रेस की चुनावी रणनीति।
Congress SP Alliance: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर अभी से सियासी गोटियां बिछनी शुरू हो गई हैं। भारतीय जनता पार्टी (BJP) को सत्ता से बाहर करने के मकसद से कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (SP) के बीच सीट शेयरिंग की बातचीत तेज हो गई है। इसी कड़ी में कांग्रेस ने सपा को करीब 170 सीटों की एक विस्तृत लिस्ट सौंपी है।**
UP Election Seat Sharing: सीटों का बंटवारा और कांग्रेस का '4-कैटेगरी' फॉर्मूला
कांग्रेस ने राज्य में अपनी जमीनी पकड़ और पिछले चुनावी नतीजों के आधार पर इन 170 सीटों को A, B, C और D की चार श्रेणियों में बांटा है।
- श्रेणी A: इन सीटों पर कांग्रेस का दावा बेहद मजबूत है और समझौते की गुंजाइश न के बराबर है।
- श्रेणी B: इन सीटों पर थोड़ा-बहुत फेरबदल संभव है।
- श्रेणी C और D: इन सीटों पर कांग्रेस सपा के साथ खुलकर बातचीत और लेन-देन करने को तैयार है।
- जॉइंट कमेटी: दोनों दलों के शीर्ष नेताओं की एक संयुक्त समिति बनेगी जो कई दौर की बैठकों के बाद अंतिम निर्णय लेगी।
Congress SP Bargaining: 120 सीटों से कम पर मानने को क्यों तैयार नहीं कांग्रेस?
2024 के लोकसभा चुनाव में यूपी में 6 सीटें जीतने के बाद कांग्रेस का हौसला बुलंद है। पार्टी नेता अब 2017 के उस फॉर्मूले का हवाला दे रहे हैं जब उसने सपा के साथ 114 सीटों पर चुनाव लड़ा था।
- 120 सीटों का दावा: यूपी कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने 50 फीसदी सीटों पर लड़ने की पैरवी की है, जबकि अंदरूनी तौर पर पार्टी 115 से 120 सीटों की मांग कर रही है।
- बयानों से तल्खी: सहारनपुर के सांसद इमरान मसूद ने साफ कहा कि कांग्रेस खुद को खत्म करके सपा को सरकार बनाने में मदद नहीं करेगी।
- अखिलेश का रुख: अखिलेश यादव ने स्पष्ट किया है कि गठबंधन जारी रहेगा, लेकिन उनका एकमात्र फॉर्मूला 'सीटें नहीं, बल्कि जीत' होगा।
Rahul Gandhi Outreach: दलित, मुस्लिम और OBC को साधने की बड़ी रणनीति
कांग्रेस नेताओं का मानना है कि संविधान और सामाजिक न्याय के मुद्दे पर दलित, मुस्लिम और गैर-यादव अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) वोटर तेजी से राहुल गांधी के साथ आ रहे हैं।
- पूर्वांचल से अवध तक यात्रा: पार्टी बलिया से मेरठ तक एक बड़े राजनीतिक आउटरीच कार्यक्रम और यात्रा की तैयारी कर रही है।
- संगठन सृजन अभियान: राज्य की सभी 403 विधानसभा सीटों पर संगठन को नए सिरे से खड़ा किया जा रहा है।
- एंटी-इंकंबेंसी का फायदा: लगातार दो कार्यकाल के बाद योगी सरकार के खिलाफ पनपने वाली सत्ता विरोधी लहर को भुनाने पर कांग्रेस का मुख्य फोकस है।
Candidate Selection Rules: 'पैसे लेकर बैठने वाले' नेताओं पर कसने जा रहा शिकंजा
2022 के चुनाव में 399 सीटों पर लड़कर महज 2 सीटें जीतने वाली कांग्रेस ने इस बार टिकट वितरण की प्रक्रिया को बेहद सख्त बनाने का फैसला किया है।
- साधन-संपन्न प्रत्याशी प्राथमिकता: पार्टी ऐसे चेहरों को तरजीह देगी जो अपने दम पर चुनावी अभियान का खर्च उठा सकें।
- फंड बचाने पर रोक: पिछले चुनाव में कई प्रत्याशियों पर फंड का सही इस्तेमाल न करने का आरोप लगा था। पार्टी इस बार इस गफलत से बचना चाहती है।
- अपवाद का नियम: केवल वही गरीब या साधारण पृष्ठभूमि के नेता छूट पाएंगे, जिनके जीतने की जमीनी संभावना बहुत मजबूत होगी।









