योगी सरकार ने प्रदेश की 7500 गोशालाओं को कैटल फूड सिक्योरिटी हब बनाने की पहल की है। मिशन फॉडर के तहत हरा चारा उत्पादन, मोरिंगा-नेपियर रोपण से गोवंश पोषण, किसानों की आय और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की गोशालाओं को अब केवल गोवंश संरक्षण तक सीमित नहीं रखा जाएगा। योगी सरकार की नई और दूरदर्शी पहल के तहत इन्हें कैटल फूड सिक्योरिटी हब के रूप में विकसित किया जाएगा। इस योजना के अंतर्गत प्रदेश की 7500 गोशालाओं और उनके आसपास के क्षेत्रों को हरा चारा उत्पादन के सशक्त केंद्र के रूप में तैयार किया जाएगा। इससे न केवल गोवंश संरक्षण को मजबूती मिलेगी, बल्कि किसानों की आय और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नया संबल मिलेगा।

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'मिशन फॉडर' से आत्मनिर्भर बनेंगी गोशालाएं

उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि “मिशन फॉडर” नाम से शुरू किए जा रहे इस प्रदेशव्यापी अभियान का मुख्य उद्देश्य गोशालाओं को आत्मनिर्भर इकाइयों में बदलना है। इसके तहत प्रत्येक गोशाला को 50 से 100 किसानों के नेटवर्क से जोड़ा जाएगा, ताकि चारा उत्पादन, विपणन और उचित मूल्य की एक व्यवस्थित श्रृंखला तैयार हो सके। इससे किसानों को भी सीधा लाभ मिलेगा और गोशालाओं को निरंतर पौष्टिक हरा चारा उपलब्ध रहेगा।

मोरिंगा और नेपियर घास से चारा उत्पादन में क्रांति

मिशन फॉडर के तहत गोशालाओं की उपलब्ध भूमि का अधिकतम उपयोग करते हुए मोरिंगा (सहजन) और नेपियर घास का बड़े पैमाने पर रोपण किया जाएगा। इसके साथ ही गन्ना घास, सुबबूल, ढैंचा और मौसमी चारे जैसे लोबिया, मक्का, ज्वार, बाजरा और बरसीम को भी शामिल किया गया है। उत्तर प्रदेश की जलवायु में लगभग 50 प्रकार के पशु चारे आसानी से उगाए जा सकते हैं, जिनमें एकदलीय और बहुदलीय दोनों किस्में शामिल हैं। यही विविधता इस मिशन की सबसे बड़ी ताकत होगी।

दीर्घकालिक और कम लागत वाला समाधान

मोरिंगा के पौधे 12 से 15 वर्षों तक और नेपियर घास 7 से 8 वर्षों तक लगातार हरा चारा उपलब्ध कराने में सक्षम हैं। मोरिंगा उच्च प्रोटीन और खनिज तत्वों से भरपूर होने के साथ-साथ गोशालाओं में प्राकृतिक छाया और जैविक फेंसिंग का भी काम करेगा। वहीं नेपियर घास अपनी उच्च उत्पादन क्षमता और नियमित कटाई की सुविधा के कारण स्थायी चारा स्रोत के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

गोवंश को मिलेगा पर्याप्त और पौष्टिक हरा चारा

योजना के तहत गोशालाओं में संरक्षित प्रत्येक गोवंश को प्रतिदिन पर्याप्त मात्रा में हरा चारा उपलब्ध कराया जाएगा। पोषण की दृष्टि से हरा चारा, सूखे चारे की तुलना में अधिक लाभकारी होता है। इससे गोवंश के स्वास्थ्य और दुग्ध उत्पादन में उल्लेखनीय सुधार होगा। साथ ही, चारा उत्पादन में आत्मनिर्भरता से बाहरी निर्भरता घटेगी और गोशालाओं की संचालन लागत में भी कमी आएगी।

पर्यावरण संरक्षण और भूमि उर्वरता को मिलेगा बढ़ावा

श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में तैयार इस कार्ययोजना के केंद्र में गोवंश संरक्षण, पोषण सुरक्षा, प्राकृतिक खेती, पर्यावरण संतुलन और ग्रामीण-शहरी सहभागिता को रखा गया है। मिशन फॉडर के माध्यम से न केवल गोशालाओं का दीर्घकालिक संचालन मजबूत होगा, बल्कि हरित आवरण बढ़ेगा, भूमि की उर्वरता सुधरेगी और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

चरणबद्ध तरीके से लागू होगी मिशन फॉडर योजना

प्रदेश सरकार के दिशा-निर्देशन में उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग इस योजना को चरणबद्ध तरीके से लागू करेगा। यह पहल आत्मनिर्भर गोशाला, प्राकृतिक खेती और सशक्त ग्रामीण अर्थव्यवस्था के उस विजन को साकार करने की दिशा में एक निर्णायक कदम मानी जा रही है, जिसकी नींव योगी सरकार ने रखी है।