यूपी में 2027 से पहले MLC चुनाव ने बढ़ाई सियासी हलचल! वाराणसी और आगरा की शिक्षक सीटों पर सपा की जीत, जबकि गोरखपुर में कांटे की टक्कर। क्या बीजेपी के लिए ये नतीजे खतरे की घंटी हैं या सिर्फ स्थानीय समीकरणों का असर?

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले विधान परिषद की 11 सीटों के नतीजों ने सियासी हलचल बढ़ा दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से लेकर मंत्रियों और विधायकों तक ने चुनाव प्रचार में ताकत झोंकी, लेकिन कई सीटों पर समाजवादी पार्टी ने बीजेपी को कड़ी चुनौती दी। वाराणसी और आगरा में सपा की जीत ने खास तौर पर सबका ध्यान खींचा है।

वाराणसी-आगरा में BJP को झटका, सपा ने दोहराया प्रदर्शन

विधान परिषद की 11 सीटों के लिए आए रुझानों और उपलब्ध नतीजों के मुताबिक, बीजेपी पांच सीटें जीत चुकी है और एक सीट पर आगे है। वहीं, सपा दो सीटें जीतकर तीन पर बढ़त बनाए हुए है। अंतिम नतीजों के बाद ही दोनों दलों की कुल सीटों की तस्वीर साफ होगी।

वाराणसी और आगरा की शिक्षक निर्वाचन सीटों पर बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा। इन सीटों पर 2020 में भी बीजेपी को जीत नहीं मिली थी। इस बार पार्टी ने मंत्रियों, विधायकों और संगठन के नेताओं को मैदान में उतारा था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी जनसभाएं कीं, लेकिन सपा अपनी पकड़ बनाए रखने में सफल रही।

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लखनऊ-झांसी से गोरखपुर तक मुकाबला दिलचस्प

लखनऊ और झांसी की स्नातक सीटों पर भी बीजेपी के लिए चुनौती बढ़ती दिखी। वहीं, गोरखपुर शिक्षक सीट पर मुकाबला बेहद करीबी रहा। यहां बीजेपी के ध्रुव त्रिपाठी और सपा के संजय त्रिपाठी के बीच मुकाबले में निर्दलीय प्रत्याशियों की भूमिका भी अहम बताई गई।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह क्षेत्र गोरखपुर में कांटे की टक्कर ने चुनाव को और दिलचस्प बना दिया। हालांकि, अंतिम आंकड़ों के बिना इस मुकाबले को किसी बड़े राजनीतिक बदलाव का निर्णायक संकेत मानना जल्दबाजी होगी।

2027 से पहले BJP के लिए कितना बड़ा संकेत?

2020 के चुनाव में बीजेपी ने छह सीटें, सपा ने तीन सीटें और दो निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की थी। इस बार के शुरुआती आंकड़ों में बीजेपी का प्रदर्शन लगभग उसी स्तर पर दिख रहा है, जबकि सपा की सीटें बढ़ने की संभावना नजर आ रही है।

पूर्वांचल और बुंदेलखंड में बीजेपी को मिली चुनौती पार्टी के लिए समीक्षा का विषय हो सकती है। दूसरी ओर, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और रुहेलखंड में पार्टी के बेहतर प्रदर्शन की बात भी सामने आई है। ये चुनाव शिक्षक और स्नातक मतदाताओं की पसंद बताते हैं, लेकिन इनके आधार पर 2027 के विधानसभा चुनाव का सीधा अनुमान नहीं लगाया जा सकता। असली तस्वीर विधानसभा चुनाव में व्यापक जनसमर्थन और स्थानीय समीकरणों से तय होगी।

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