योगी सरकार की ODOP योजना से यूपी के 1.31 लाख कारीगरों को प्रशिक्षण व टूल किट मिली। निर्यात 86 हजार करोड़ से बढ़कर 1.84 लाख करोड़ पहुंचा। 3.16 लाख रोजगार सृजित हुए। 200 करोड़ का बजट और 79 GI टैग से ब्रांडिंग मजबूत हुई।

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में शुरू की गई ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ (ODOP) योजना उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था में बड़े बदलाव का माध्यम बनकर सामने आई है। वर्ष 2018 में शुरू हुई इस पहल ने पारंपरिक कारीगरों और स्थानीय उत्पादों को नई पहचान दिलाई है। सरकार ने अब तक 1,31,000 कारीगरों को निःशुल्क प्रशिक्षण और टूल किट उपलब्ध कराई है। साथ ही, मुख्यमंत्री दुर्घटना बीमा योजना के तहत कारीगरों को 5 लाख रुपये तक का बीमा सुरक्षा कवर भी दिया जा रहा है।

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परंपरागत उत्पादों को मिला प्रोत्साहन

प्रदेश के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम, खादी एवं ग्रामोद्योग, रेशम उद्योग, हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग मंत्री राकेश सचान ने बजट सत्र 2026-27 में जानकारी दी कि यह योजना पारंपरिक उत्पादों और कारीगरों को सशक्त बनाने में अहम भूमिका निभा रही है। उन्होंने बताया कि योजना के तहत कारीगरों को प्रशिक्षण, आधुनिक टूल किट और वित्तीय सहायता दी जा रही है। उदाहरण के तौर पर, सहारनपुर जिले में 2275 कारीगरों को उन्नत टूल किट दी गई, जबकि 454 हस्तशिल्पियों को 16.26 करोड़ रुपये की मार्जिन मनी वितरित की गई।

निर्यात में दोगुने से ज्यादा वृद्धि

मंत्री ने बताया कि ODOP योजना का प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक असर पड़ा है। वर्ष 2017-18 में उत्तर प्रदेश का निर्यात 86 हजार करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 1.84 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इसमें लगभग 50 प्रतिशत योगदान ODOP और हस्तशिल्प उत्पादों का है। वर्ष 2018 से अब तक इस योजना के माध्यम से 3,16,000 लोगों को रोजगार मिला है।

200 करोड़ रुपये का बढ़ा बजट

सरकार की प्रतिबद्धता बजट आवंटन से भी स्पष्ट होती है। पिछले बजट में 145 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था, जिसमें से 135 करोड़ रुपये की मार्जिन मनी वितरित की जा चुकी है। चालू वित्तीय वर्ष में इस राशि को बढ़ाकर 200 करोड़ रुपये कर दिया गया है। इसके अलावा, प्रदेश के 79 उत्पादों को जीआई टैग मिलने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रांड पहचान मजबूत हुई है।

स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक सशक्तिकरण पर फोकस

मंत्री ने कहा कि ODOP केवल आर्थिक योजना नहीं है, बल्कि यह सांस्कृतिक और सामाजिक उत्थान का अभियान भी है। कारीगरों को आयुष्मान भारत योजना के तहत स्वास्थ्य सुरक्षा और शिक्षा सुविधाओं से जोड़ा गया है। इसके साथ ही ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन व्यंजन’ जैसी नई पहल स्थानीय उत्पादों और व्यंजनों को व्यापक पहचान देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।