अरब सागर में US Navy का MH-60S हेलीकॉप्टर इमरजेंसी लैंडिंग के बाद क्रैश हुआ, एक एयरमैन लापता है। ईरान तनाव के बीच USS George H.W. Bush से सर्च ऑपरेशन जारी, जांच भी शुरू। 

US-Iran Tension: मिडिल ईस्ट में ईरान और अमेरिका के बीच जारी भीषण सैन्य तनाव के बीच अरब सागर से एक बेहद सनसनीखेज और खौफनाक खबर सामने आई है। अमेरिकी नौसेना (US Navy) का एक अत्याधुनिक MH-60S सी हॉक हेलीकॉप्टर बुधवार तड़के अचानक बीच समंदर में क्रैश हो गया। पानी में हुई इस खतरनाक इमरजेंसी लैंडिंग के बाद अमेरिकी सेना में हड़कंप मच गया है। वायुसेना और नौसेना के साझा रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद हेलीकॉप्टर के चार क्रू सदस्यों में से तीन को तो सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है, लेकिन एक अमेरिकी एयरमैन अब भी अथाह समंदर की लहरों के बीच कहीं लापता है। उसे ढूंढने के लिए अमेरिकी 5वें बेड़े (5th Fleet) ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है।

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तड़के 03:30 बजे का वो रहस्यमयी क्रैश: क्या हुआ था 'USS जॉर्ज बुश' के लड़ाकू विमान के साथ?

यह पूरी घटना किसी हॉलीवुड सस्पेंस थ्रिलर जैसी है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, विशालकाय एयरक्राफ्ट कैरियर USS जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश से उड़ान भरने वाले इस हेलीकॉप्टर को स्थानीय समयानुसार सुबह करीब 03:30 बजे घने अंधेरे के बीच पानी में उतरने के लिए मजबूर होना पड़ा। अमेरिकी सेना इस वक्त अत्यधिक हाई अलर्ट पर है। हालांकि, US 5th फ्लीट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट जारी कर कहा है कि-"इस बात का कोई संकेत नहीं है कि यह इमरजेंसी किसी दुश्मन के हमले की वजह से हुई।" लेकिन सवाल यह उठता है कि अगर हमला नहीं हुआ, तो अचानक इतने सुरक्षित माने जाने वाले लड़ाकू हेलीकॉप्टर को आधी रात को समंदर में क्रैश लैंडिंग क्यों करनी पड़ी? इस रहस्य से पर्दा उठना अभी बाकी है और घटना की हाई-लेवल जांच शुरू कर दी गई है।

समंदर में उतरीं 'AI ड्रोन बोट्स': पहली बार रोबोटिक जहाजों ने संभाला मोर्चा!

लापता सैनिक को खोजने और इस रेस्क्यू ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए अमेरिकी नौसेना ने एक ऐसा कदम उठाया है जिसने आधुनिक सैन्य इतिहास में नया अध्याय लिख दिया है। अमेरिकी सेना ने इस मिशन के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से लैस ऑटोनॉमस ड्रोन बोट्स को समंदर में उतार दिया है। सैन्य विश्लेषकों का मानना है: "असल दुनिया के रेस्क्यू ऑपरेशन में इस तरह के खुद चलने वाले (Autonomous) रोबोटिक जहाजों का इस्तेमाल इतिहास में पहली बार हो रहा है। यह दिखाता है कि आधुनिक युद्ध और रक्षा रणनीति में AI की भूमिका कितनी खतरनाक और अहम हो चुकी है।"

ईरानी ड्रोन का साया और 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' का खौफनाक सच

यह हादसा ऐसे समय पर हुआ है जब अमेरिका और ईरान के बीच सीज़फायर के बावजूद अंदर ही अंदर बारूद सुलग रहा है। अमेरिकी कांग्रेस को सौंपी गई एक सीक्रेट रिपोर्ट के मुताबिक, 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' के तहत अमेरिका के अब तक 42 लड़ाकू विमान नष्ट हो चुके हैं। इस लिस्ट में जून की शुरुआत में गिराया गया अमेरिकी अपाचे हेलीकॉप्टर शामिल नहीं है, जिसे कथित तौर पर एक ईरानी आत्मघाती ड्रोन ने निशाना बनाया था। ईरान ने भी इस ताजा घटनाक्रम के बाद कड़े शब्दों में चेतावनी जारी की है। ईरान के सैन्य अधिकारियों का कहना है: "हमारी सीमाओं के पास मंडरा रहे विदेशी सैन्य बलों को अपनी गलतियों और संभावित क्रॉसफायर (आपसी गोलीबारी) से खुद को बचाना होगा। हम कूटनीति चाहते हैं, लेकिन हमारी सैन्य क्षमताएं किसी भी चुनौती का जवाब देने के लिए तैयार हैं।"

शांति अभी दूर की कौड़ी: होर्मुज जलडमरूमध्य में मंडराता ख़तरा

भले ही अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों पर से अपनी नौसैनिक नाकेबंदी को जून में खत्म कर दिया हो, लेकिन फारस की खाड़ी और अरब सागर में बारूद की गंध अभी कम नहीं हुई है। गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर, युद्धपोत और माइनस्वीपर के साथ 'USS जॉर्ज बुश' की इस इलाके में मौजूदगी साफ इशारा करती है कि अमेरिका किसी भी बड़े युद्ध के लिए तैयार खड़ा है। लापता अमेरिकी जवान की तलाश अभी जारी है, लेकिन इस रहस्यमयी क्रैश ने अमेरिका और ईरान के बीच की कड़वाहट को एक बार फिर चरम पर पहुंचा दिया है। क्या यह सिर्फ एक तकनीकी खराबी थी, या फिर समंदर की गहराइयों में कोई बड़ी साज़िश छिपी है? पूरी दुनिया की नजरें अब इस जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं।

हादसा या आने वाले बड़े संकट का संकेत?

फिलहाल अमेरिकी नौसेना लापता एयरमैन की तलाश में जुटी है और दुर्घटना की विस्तृत जांच की जा रही है। शुरुआती बयान इसे तकनीकी आपात स्थिति बताते हैं, लेकिन अमेरिका-ईरान के बीच जारी अविश्वास और सैन्य तनाव के कारण इस घटना पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही साफ हो पाएगा कि यह महज एक दुर्घटना थी या क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच किसी नए संकट की शुरुआत।