दोहा में US-ईरान की अप्रत्यक्ष बातचीत में $3 बिलियन फ्रोजन फंड, न्यूक्लियर इंस्पेक्शन, होर्मुज स्ट्रेट और MoU लागू करने पर चर्चा हुई। सीधी वार्ता नहीं हुई, लेकिन आगे की बातचीत पर सहमति बनी।
US Iran Doha Talks: कतर और पाकिस्तान की सरजमीं पर पर्दे के पीछे एक ऐसा खेल खेला जा रहा है, जो पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और महायुद्ध की दिशा तय कर सकता है। दोहा में अमेरिका और ईरान के बीच बेहद संवेदनशील और इनडायरेक्ट (अप्रत्यक्ष) कूटनीतिक बातचीत का नया दौर शुरू हो चुका है। चौंकाने वाली बात यह है कि दोनों देशों के डेलिगेशन एक ही छत के नीचे होने के बावजूद आमने-सामने नहीं बैठे; सारी बात मीडिएटर्स के जरिए गुप्त तरीके से आगे बढ़ाई गई। एक तरफ मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) को लागू करने की 60-दिन की डेडलाइन सिर पर है, तो दूसरी तरफ अरबों डॉलर के फ्रोजन फंड और न्यूक्लियर बमबारी के दावों ने इस पूरी बातचीत को एक सस्पेंस थ्रिलर बना दिया है।

दोहा में बंद कमरे के भीतर क्या हुआ?
कतर और पाकिस्तान की मध्यस्थता में मंगलवार रात शुरू हुई बातचीत बुधवार तक कई चरणों में चली। इसमें सीनियर नेगोशिएटर्स और टेक्निकल एक्सपर्ट्स ने अलग-अलग सेशन में हिस्सा लिया। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA के अनुसार, डिप्टी विदेश मंत्री काज़म ग़रीबाबादी ने स्पष्ट किया कि अमेरिकी और ईरानी प्रतिनिधियों के बीच कोई सीधा संवाद नहीं हुआ। हर संदेश और प्रस्ताव मध्यस्थ देशों के जरिए साझा किया गया।
न्यूक्लियर साइट्स पर बमबारी: "तबाही की जगह पर नो-एंट्री!"
इस बातचीत के बीच सबसे सनसनीखेज बयान ईरान के पार्लियामेंट स्पीकर और चीफ नेगोशिएटर मोहम्मद बाघेर ग़ालिबफ़ का आया है। उन्होंने साफ चेतावनी देते हुए अंतरराष्ट्रीय जांच एजेंसियों के होश उड़ा दिए हैं। ग़ालिबफ़ ने कहा कि हाल के हमलों में जिन ईरानी न्यूक्लियर साइट्स को नुकसान पहुंचा है या जहां बमबारी हुई है, वहां किसी भी कीमत पर चेकिंग की इजाजत नहीं दी जाएगी। इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी ($IAEA$) को केवल दो चुनिंदा जगहों पर जाने की अनुमति है, जिसमें बुशहर न्यूक्लियर पावर प्लांट शामिल है। आखिर डैमेज हो चुकी न्यूक्लियर साइट्स में ईरान ऐसा क्या छुपा रहा है, जिसे दुनिया के सामने आने से रोका जा रहा है? यह रहस्य बरकरार है।
अरबों डॉलर का महासंग्राम: 3 बिलियन बनाम 6 बिलियन का गणित!
इस गुप्त मीटिंग का एक मुख्य केंद्र बिंदु था-ईरान की फ्रीज की गई भारी-भरकम संपत्ति। अल अरबिया की रिपोर्ट के अनुसार, कतर में फंसे ईरान के $3 बिलियन (3 अरब डॉलर) के फ्रोजन फंड को रिलीज करने के लिए एक शुरुआती समझौता हो गया है। तय हुआ है कि इस पैसे से ईरान की जरूरतों का जरूरी सामान खरीदकर उसे डिलीवर किया जाएगा। लेकिन असली पेंच $6 बिलियन के दूसरे एसेट्स पर फंसा है। ईरान चाहता है कि उसे पूरी रकम एक ही किश्त में दी जाए, जबकि अमेरिका इसे धीरे-धीरे और ईरान की न्यूक्लियर रियायतों से जोड़कर टुकड़ों में देना चाहता है। पैसों की यह जंग इस डील को किसी भी वक्त अटका सकती है।
होर्मुज स्ट्रेट का जाल: समंदर के रास्ते पर किसका होगा कब्ज़ा?
बातचीत सिर्फ पैसों और परमाणु प्लांट तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसमें लेबनान संकट और दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री रास्ते-होर्मुज स्ट्रेट पर भी गरमागरम बहस हुई। ईरान ने दोहा की टेबल पर कड़े शब्दों में दोहराया कि होर्मुज स्ट्रेट पर सिर्फ ईरान और ओमान की संप्रभुता (Sovereignty) है। ईरान ने इजराइल पर आरोप लगाया कि वह लेबनान में अपनी सैन्य ताकत बनाए रखकर इस शांति समझौते में जानबूझकर रोड़े अटका रहा है। ओमान ने इस समुद्री रास्ते को सुरक्षित रखने के लिए एक नया प्रस्ताव दिया है, जिस पर अब दोनों देशों की टीमें अपने-अपने मुल्क लौटकर हाई-लेवल सलाह-मशविरा करेंगी।
इमरजेंसी कम्युनिकेशन चैनल क्यों है सबसे अहम?
दोनों पक्षों ने मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) के संभावित उल्लंघनों की रिपोर्टिंग और समाधान के लिए एक इमरजेंसी कम्युनिकेशन चैनल बनाने पर सहमति जताई। यह व्यवस्था भविष्य में किसी भी विवाद को सीधे टकराव में बदलने से पहले संवाद के जरिए सुलझाने का माध्यम बन सकती है।
आधी रात का फैसला: क्या काम करेगा इमरजेंसी कम्युनिकेशन चैनल?
तमाम गतिरोधों के बावजूद, बुधवार रात को दोनों पक्षों के बीच एक अहम रजामंदी बनी है। ईरान के डिप्टी फॉरेन मिनिस्टर काज़म ग़रीबाबादी ने पुष्टि की है कि दोनों देश समझौते के उल्लंघन को रोकने के लिए एक 'इमरजेंसी कम्युनिकेशन सिस्टम' बनाने पर सहमत हो गए हैं। यह चैनल 24 घंटे के भीतर एक्टिव कर दिया जाएगा। कतर के विदेश मंत्रालय के मुताबिक बातचीत में 'पॉज़िटिव प्रोग्रेस' हुई है, लेकिन सस्पेंस अभी खत्म नहीं हुआ है। अगली महाबैठक ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर के अंतिम संस्कार के तुरंत बाद बुलाई जाएगी। क्या यह कम्युनिकेशन चैनल तीसरे विश्व युद्ध के खतरे को टाल पाएगा, या फिर यह सिर्फ एक और नाकाम कोशिश साबित होगा? पूरी दुनिया की नजरें अब अगले दौर पर टिकी हैं।
क्या अब बड़ी डील की उम्मीद बढ़ गई है?
कतर के विदेश मंत्रालय ने बातचीत में "सकारात्मक प्रगति" होने की पुष्टि की है। दोनों पक्षों ने भविष्य में वार्ता जारी रखने पर सहमति जताई है और अगली बैठक जल्द आयोजित किए जाने की संभावना है। हालांकि परमाणु निरीक्षण, प्रतिबंधों में राहत और फ्रोजन फंड की पूरी रिहाई जैसे मुद्दों पर अभी अंतिम सहमति नहीं बनी है, लेकिन दोहा वार्ता ने यह संकेत जरूर दिया है कि वर्षों से जमे गतिरोध को तोड़ने की कोशिशें फिर तेज हो गई हैं।


