12 साल से लाश बन जी रहा है गाजियाबाद का हरीश, माता-पिता ने मांगी बेटे के लिए इच्छामृत्यु
Supreme Court Hearing Euthanasia Request :आज सुप्रीम कोर्ट गाजियाबाद के रहने वाले हरीश राणा के लिए फैसला सुनाएगा। वह 12 वर्ष से अधिक समय से कोमा में हैं। बेटे की हालत माता पिता से देखी नहीं जाती है। इसलिए उन्होंने इच्छामृत्यु मांगी है।

माता पता ने बेटे के लिए मांगी इच्छामृत्यु
संतान के जरा सी चोट भी आ जाए तो माता-पिता उसे ठीक करने के लिए अपनी जान ला देते हैं। लेकिन उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में रहने वाले एक पैंरेंट्स की कहानी बेहद दुखद है। जिन्होंने ना चाहकर भी अपने जवान बेटे के लिए राष्ट्रपति से इच्छामृत्यु मांगी है। जिस पर आज सुप्रीम कोर्ट फैसला करेगा।
कहानी गाजियाबाद के 31वर्षीय हरीश राणा की
दरअसल, यह दर्दनाक कहानी है गाजियाबाद के 31वर्षीय हरीश राणा की। जो पिछले 12 वर्ष से अधिक समय से कोमा में हैं। बेटे की हालत माता पिता से देखी नहीं जाती है। क्योंकि वह जिंदा होकर भी लाश बना हुआ है। इसलिए तो माता-पिता ने सुप्रीम कोर्ट से इच्छामृत्यु की इजाजत मांगी है। जिस पर आज बड़ा फैसला आएगा।
चौथी मंजिल से गिर गया था हरीश राणा
बता दें कि हरीश 2013 में इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान चौथी मंजिल से गिर गए थे। जिससे उनके सिर और अन्य शरीर में गहरी चोटें आईं और वह कोमा में चला गया। बेटे के इलाज के लिए माता पिता ने चंडीगढ़ पीजीआई से लेकर दिल्ली एम्स तक कराया। लेकिन डॉक्टर्स ने कह दिया कि उसकी हालत में सुधार नहीं होगा। वह ऐसा ही रहेगा। तब से अब तक वो ऐसे ही बिस्तर पड़ा है।
स्थायी वेजिटेटिव स्टेट में हैं हरीश
महंगे से महंगे इलाज के बाद भी हरीश की स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है। हालत यह है कि भोजन से लेकर तमाम क्रियाएं नली के जरिए करनी पड़ती हैं। भोजन देने के लिए लगी ट्यूब हर दो–तीन महीने में बदलनी पड़ती है। यानि वो 2013 से ट्यूब्स के सहारे स्थायी वेजिटेटिव स्टेट में हैं?
हरीश की सांसों का आज आखिरी फैसला
बेटे को देखते ही माता-पिता रो पड़ते हैं, उनका एक एक दिन एक एक साल के बराबर कट रहा है। इसलिए डॉक्टरों की सलाह के बाद उन्होंने बेबस होकर 2024 में पैसिव यूथेनेशिया के लिए दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया था। लेकिन बाद में यह केस सुप्रीम कोर्ट जा पहुंचा। जिस पर कुछ देर बाद फैसला आने वाला है।
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