योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में बड़ी छलांग लगाई है। डिजिटल पोर्टल निवेश मित्र, नियमों में सरलीकरण और पारदर्शी प्रशासन से राज्य निवेशकों की पहली पसंद बन रहा है।

लखनऊ। एक समय था जब उत्तर प्रदेश में कारोबार शुरू करने का नाम आते ही जटिल नियम, फाइलों का ढेर और विभागों के चक्कर आंखों के सामने आ जाते थे। निवेशक अवसर देखते थे, लेकिन जटिल प्रक्रियाएं उन्हें पीछे हटा देती थीं। आज वही उत्तर प्रदेश ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ का उदाहरण बनकर देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। यह बदलाव अचानक नहीं हुआ, बल्कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में योजनाबद्ध, निरंतर और ठोस सुधारों का परिणाम है। सरकार ने यह स्पष्ट किया कि विकास घोषणाओं से नहीं, बल्कि व्यवस्थागत सुधारों से आता है।

12वें स्थान से शीर्ष राज्यों तक की छलांग

ईज ऑफ डूइंग बिजनेस रैंकिंग इस परिवर्तन की सबसे मजबूत गवाही देती है। वर्ष 2017-18 में बिजनेस रिफॉर्म एक्शन प्लान (BRAP) में उत्तर प्रदेश 12वें स्थान पर था। निरंतर सुधारों के चलते वर्ष 2019 में प्रदेश देश में दूसरे स्थान पर पहुंच गया।

वर्ष 2021 के गुड गवर्नेंस इंडेक्स में वाणिज्य एवं उद्योग श्रेणी में उत्तर प्रदेश ने शीर्ष स्थान प्राप्त किया। इसके बाद 2022 और 2024 में राज्य को ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में ‘टॉप अचीवर’ का दर्जा मिला। लॉजिस्टिक्स रैंकिंग में भी उत्तर प्रदेश 2022, 2023 और 2024 में ‘अचीवर्स’ की श्रेणी में रहा।

बिजनेस रिफॉर्म्स से बदली कारोबारी तस्वीर

BRAP 2024 के तहत उत्तर प्रदेश को उद्यम स्थापना, श्रम प्रक्रियाओं के सरलीकरण और भूमि प्रशासन जैसे तीन प्रमुख क्षेत्रों में ‘टॉप अचीवर’ घोषित किया गया। वर्ष 2024 के बाद BRAP और BRAP-प्लस के अंतर्गत 24 क्षेत्रों में 426 बड़े सुधार लागू किए गए। उद्यम पंजीकरण, भूमि सुधार, श्रम पंजीकरण, पर्यावरण स्वीकृतियां, सिंगल विंडो सिस्टम और निर्माण अनुमति जैसी प्रक्रियाओं को सरल और समयबद्ध बनाया गया।

निवेश मित्र: एक पोर्टल, हर समाधान

इन सुधारों का केंद्र बना ‘निवेश मित्र’, जो देश के सबसे बड़े डिजिटल सिंगल विंडो पोर्टलों में शामिल है। इस पोर्टल के जरिए 45 विभागों की 525 से अधिक सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध हैं। यह नेशनल सिंगल विंडो सिस्टम से भी जुड़ा है, जिससे राज्य और केंद्र की प्रक्रियाएं एक साथ संचालित हो रही हैं। निवेश मित्र पर 97% से अधिक आवेदन निस्तारण दर और अब तक 20 लाख से अधिक डिजिटल स्वीकृतियां दी जा चुकी हैं।

डिजिटल गवर्नेंस से पारदर्शिता और भरोसा

योगी सरकार ने तय किया कि अब लाइसेंस और स्वीकृतियों के लिए कोई भी भौतिक आवेदन स्वीकार नहीं होगा। सभी आवेदन केवल निवेश मित्र पोर्टल के माध्यम से होंगे। इससे पारदर्शिता बढ़ी और मानवीय हस्तक्षेप व भ्रष्टाचार की संभावना कम हुई। यूजर फीडबैक के अनुसार, 96% उपयोगकर्ता निवेश मित्र से संतुष्ट हैं, जो डिजिटल गवर्नेंस में जनता के भरोसे को दर्शाता है।

निवेश मित्र 3.0 से भविष्य की तैयारी

ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को और बेहतर बनाने के लिए सरकार ‘निवेश मित्र 3.0’ विकसित कर रही है। यह नया संस्करण AI आधारित स्मार्ट डैशबोर्ड, रियल-टाइम डेटा एनालिसिस, तेज शिकायत निवारण और व्हाट्सएप, ईमेल व ऐप आधारित सूचना प्रणाली से लैस होगा। इसे IGRS, निवेश सारथी, OIMS, इंडिया इंडस्ट्रियल लैंड बैंक और मुख्यमंत्री डैशबोर्ड ‘दर्पण’ से जोड़ा जाएगा।

अनुपालनों में कटौती, कारोबार में सहूलियत

सरकार ने लगभग 65 विभागों में 4,675 नियामक अनुपालनों को कम किया। इनमें से 4,098 अनुपालनों को सरल और डिजिटल, 577 को अपराधमुक्त किया गया और 948 पुराने कानून व नियम समाप्त किए गए। अब उत्तर प्रदेश में व्यापार के लिए उप्र दुकान एवं वाणिज्य अधिष्ठान अधिनियम-1962 के तहत पंजीकरण पर्याप्त है। ट्रेड लाइसेंस की अनिवार्यता खत्म कर दी गई है और 20 से कम कर्मचारियों वाली दुकानों को पंजीकरण से भी राहत दी गई है।

डर नहीं, विश्वास पर आधारित कारोबारी माहौल

अग्निशमन, श्रम, परिवहन और विधिक माप विज्ञान विभागों में कई अपराधों को डिक्रिमिनलाइज किया गया है। औद्योगिक शांति अधिनियम में कारावास के प्रावधान हटाए गए हैं। आज उत्तर प्रदेश केवल आकार या आबादी के कारण नहीं, बल्कि स्थिर नीतियों, डिजिटल गवर्नेंस और पारदर्शी प्रशासन के कारण निवेशकों की पहली पसंद बनता जा रहा है।