प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत अगस्त 2025 से जनवरी 2026 के बीच उत्तर प्रदेश सोलर इंस्टॉलेशन में देश में दूसरे स्थान पर रहा। रूफटॉप सोलर की मासिक स्थापना में वृद्धि और डीबीटी सब्सिडी से ऊर्जा आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिला है।

लखनऊ। ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में उत्तर प्रदेश ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत अगस्त 2025 से जनवरी 2026 के बीच राज्य सोलर संयंत्र स्थापना में देशभर में दूसरे स्थान पर रहा। इस अवधि में घरेलू रूफटॉप सोलर संयंत्रों की मासिक स्थापना में लगातार वृद्धि दर्ज की गई। लखनऊ, वाराणसी, कानपुर नगर, बरेली, प्रयागराज, आगरा, झांसी, रायबरेली, शाहजहांपुर और सहारनपुर जैसे प्रमुख जिलों में सबसे अधिक रूफटॉप सोलर संयंत्र लगाए गए। यह राज्य में सौर ऊर्जा के प्रति बढ़ती जागरूकता और स्वीकार्यता को दर्शाता है।

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महाराष्ट्र से प्रतिस्पर्धा, गुजरात को पीछे छोड़ा

इस दौरान उत्तर प्रदेश का मुकाबला महाराष्ट्र और गुजरात से रहा। लंबे समय से सौर ऊर्जा में अग्रणी रहे गुजरात को पीछे छोड़ते हुए उत्तर प्रदेश ने शीर्ष दो राज्यों में अपनी मजबूत जगह बनाई है। यूपीनेडा के निदेशक इंद्रजीत सिंह के अनुसार, यह उपलब्धि राज्य सरकार की प्रभावी सौर नीति, जिलावार निगरानी और समयबद्ध लक्ष्य निर्धारण का परिणाम है। देश में कुल रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन के मामले में उत्तर प्रदेश फिलहाल तीसरे स्थान पर है, जबकि प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत प्राप्त आवेदनों की संख्या में प्रदेश दूसरे स्थान पर है।

हर माह बढ़ रही घरेलू सोलर कनेक्शन की संख्या

अगस्त 2025 से जनवरी 2026 के बीच हर महीने घरेलू सोलर कनेक्शनों में लगातार वृद्धि दर्ज की गई। ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया को आसान बनाना, सब्सिडी का सीधे डीबीटी के जरिए उपभोक्ताओं के खातों में ट्रांसफर और डिस्कॉम स्तर पर त्वरित स्वीकृति प्रणाली ने योजना को गति दी है। बढ़ते बिजली बिल और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता ने भी लोगों को रूफटॉप सोलर अपनाने के लिए प्रेरित किया है। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में इस योजना का सकारात्मक असर स्पष्ट दिख रहा है।

ऊर्जा आत्मनिर्भरता और हरित विकास की ओर बड़ा कदम

प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना का लक्ष्य देश के एक करोड़ घरों पर रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित करना है, ताकि प्रत्येक परिवार को स्वच्छ और मुफ्त ऊर्जा मिल सके। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में इस योजना की सफलता से उपभोक्ताओं को आर्थिक राहत मिल रही है और राज्य की ऊर्जा आत्मनिर्भरता मजबूत हो रही है। सौर ऊर्जा के बढ़ते उपयोग से पारंपरिक बिजली उत्पादन पर दबाव कम होगा और कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी।

पहले स्थान की ओर तेजी से बढ़ता उत्तर प्रदेश

ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही रफ्तार जारी रही तो उत्तर प्रदेश जल्द ही देश में पहला स्थान हासिल कर सकता है। पिछले सात महीनों से शीर्ष दो राज्यों में बने रहना राज्य के लिए बड़ी उपलब्धि है। घरेलू सोलर अपनाने की बढ़ती प्रवृत्ति प्रदेश को हरित ऊर्जा, आर्थिक बचत और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ा रही है।