CPI CPM VCK Support TVK: तमिलनाडु में सत्ता का खेल बेहद दिलचस्प मोड़ पर पहुँच गया है। DMK-AIADMK की कथित नज़दीकी से नाराज़ CPI, CPM और VCK अब विजय की TVK को समर्थन दे सकते हैं। बहुमत से दूर विजय कानूनी दांव भी चल रहे हैं, जबकि राज्यपाल के फैसले पर सियासी तूफान तेज़ हो गया है।

Vijay TVK Support: तमिलनाडु की राजनीति इस समय ऐसे मोड़ पर खड़ी है, जहाँ हर घंटे समीकरण बदलते दिखाई दे रहे हैं। विधानसभा चुनाव के बाद सरकार गठन को लेकर जारी खींचतान अब एक नए राजनीतिक थ्रिलर में बदल चुकी है। क्या CPI, CPM और VCK अब अभिनेता-राजनेता विजय की पार्टी TVK के साथ खड़े होने जा रहे हैं?

DMK-AIADMK की कथित नज़दीकी ने बढ़ाई बेचैनी

सूत्रों के मुताबिक, वामपंथी दलों के भीतर अचानक हलचल तेज़ हो गई है। इसकी सबसे बड़ी वजह DMK और AIADMK के बीच संभावित समझौते की खबरें मानी जा रही हैं। दशकों से एक-दूसरे के कट्टर विरोधी रहे दोनों दलों की कथित नज़दीकी ने राजनीतिक गलियारों में सनसनी फैला दी है। CPM के अंदर इस संभावना को लेकर गहरी नाराज़गी बताई जा रही है। पार्टी नेताओं का मानना है कि अगर DMK और AIADMK साथ आते हैं, तो इसका सबसे बड़ा फायदा BJP को मिल सकता है। यही वजह है कि अब वामदल नए राजनीतिक विकल्प की तलाश में दिख रहे हैं और यह विकल्प विजय की TVK बनती दिखाई दे रही है।

विजय के लिए क्यों अहम हैं छोटे दल?

TVK के पास फिलहाल कांग्रेस के सशर्त समर्थन के बाद 112 सीटों का आंकड़ा है। लेकिन विजय को अपनी एक सीट छोड़नी पड़ सकती है, जिससे संख्या घटकर 111 रह जाएगी। 234 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत के लिए 118 सीटों की जरूरत है। यहीं से CPI, CPM और VCK की भूमिका बेहद अहम हो जाती है। इन दलों के पास भले ही सीमित सीटें हों, लेकिन मौजूदा गणित में वही “किंगमेकर” बन सकते हैं। सूत्र बताते हैं कि इन पार्टियों के भीतर कैबिनेट में हिस्सेदारी को लेकर भी चर्चा चल रही है।

दिल्ली में हुई गुप्त बैठकों ने बढ़ाया सस्पेंस

राजनीतिक हलकों में उस समय हलचल और तेज़ हो गई जब CPI के डी. राजा और CPM के एम.ए. बेबी ने नई दिल्ली में बंद कमरे में लंबी बैठक की। इसके बाद खबरें आने लगीं कि राज्य स्तर पर भी वामदल अपने अंतिम फैसले के करीब पहुंच चुके हैं। इधर VCK भी आज अपना रुख स्पष्ट कर सकती है। वहीं TVK ने अपने नव-निर्वाचित विधायकों की अहम बैठक बुलाई है। माना जा रहा है कि इसी बैठक में सरकार गठन की अगली रणनीति तय की जाएगी।

राज्यपाल के फैसले पर बढ़ा विवाद

राज्यपाल द्वारा विजय को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित न किए जाने पर कांग्रेस खुलकर मैदान में उतर आई है। पार्टी ने पूरे तमिलनाडु में विरोध प्रदर्शन का ऐलान कर दिया है। कांग्रेस नेता मणिकम टैगोर ने DMK और AIADMK पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि दोनों दल सिर्फ विजय को रोकने के लिए साथ आने को तैयार हैं। उन्होंने इसे “सत्ता बचाने की राजनीति” बताया।

अब आगे क्या?

तमिलनाडु में फिलहाल हर दल अपने पत्ते छिपाकर खेल रहा है। विजय कानूनी विकल्पों पर भी विचार कर रहे हैं और वरिष्ठ वकीलों से सलाह ले रहे हैं। अगर वामदल और VCK खुलकर TVK के साथ आते हैं, तो राज्य की राजनीति में ऐतिहासिक बदलाव संभव है।