मराठी थिएटर की दिग्गज विजया मेहता का 91 वर्ष की उम्र में निधन। नाना पाटेकर समेत कई सितारों की गुरु रहीं, उनकी विरासत भारतीय रंगमंच में हमेशा जीवित रहेगी।

Nana Patekar Mentor: भारतीय रंगमंच और सिनेमा के इतिहास का एक स्वर्णिम अध्याय हमेशा के लिए बंद हो गया है। आधुनिक मराठी थिएटर की सबसे प्रभावशाली मार्गदर्शक, प्रख्यात डायरेक्टर, एक्ट्रेस और प्रोड्यूसर विजया मेहता का 91 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। रंगमंच की दुनिया में प्यार से 'बाई' के नाम से मशहूर विजया मेहता ने अपने मुंबई स्थित आवास पर अंतिम सांस ली। उनके जाने से न केवल मराठी बल्कि पूरे भारतीय कला जगत में एक ऐसा शून्य पैदा हो गया है, जिसे कभी नहीं भरा जा सकेगा।

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कौन थीं विजया मेहता? किस बीमारी की वजह से जिनका 91 साल की उम्र में हुआ निधन

एक रिपोर्ट के अनुसार, विजया मेहता का निधन उम्र से जुड़ी समस्याओं के कारण हुआ। 4 नवंबर 1934 को गुजरात के बड़ौदा में विजया जयवंत के रूप में जन्मीं विजया मेहता को कम उम्र में ही थिएटर का शौक हो गया था। उन्होंने मुंबई यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन पूरा किया और बाद में दिल्ली में इब्राहिम अल्काज़ी और मुंबई में आदि मर्ज़बान जैसी थिएटर की मशहूर हस्तियों से एक्टिंग और ड्रामा की ट्रेनिंग ली। इसके बाद उन्होंने जो राह चुनी, उसने भारतीय रंगमंच की दिशा ही बदल दी।

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'रंगायन' की स्थापना: जब पारंपरिक थिएटर की जड़ें हिल गईं!

यह वह दौर था जब 1960 के दशक में देश के भीतर एक्सपेरिमेंटल (प्रायोगिक) और पैरेलल थिएटर की लहर उठ रही थी। विजया मेहता इस आंदोलन की सबसे मुखर और मजबूत आवाज बनीं। उन्होंने विजय तेंदुलकर, डॉ. श्रीराम लागू और अरविंद देशपांडे जैसे दिग्गजों के साथ मिलकर ऐतिहासिक थिएटर ग्रुप 'रंगायन' की सह-स्थापना की। यह मंच बाद में एक्सपेरिमेंटल और पैरेलल थिएटर का प्रतीक बन गया, जिसने मराठी रंगमंच को नई पहचान दिलाई।

वो छुपा हुआ पारस... जिसने नाना पाटेकर को 'सोना' बनाया!

विजया मेहता की सबसे बड़ी विरासत वह टैलेंट था, जिसे उन्होंने तराशा। बॉलीवुड और मराठी सिनेमा के बेबाक अभिनेता नाना पाटेकर के करियर के पीछे विजया जी का ही हाथ था। उन्होंने 'रंगायन' के जरिए नाना के शुरुआती दिनों को संवारा और 'हमीदाबाईची कोठी' जैसे कल्ट नाटकों में उन्हें डायरेक्ट किया। नाना पाटेकर हमेशा उन्हें अपना सबसे बड़ा गुरु मानते थे। उन्होंने सिखाया था कि किरदार में पूरी तरह कैसे डूबा जाता है। दोनों का रिश्ता इतना गहरा था कि नाना पाटेकर अक्सर उनसे मिलने जाते थे और पिछले साल नवंबर में उनके जन्मदिन के जश्न में भी शामिल हुए थे।

अनुपम खेर से लेकर नीना कुलकर्णी तक... हर दिग्गज का था इनसे नाता

सिर्फ नाना पाटेकर ही नहीं, बल्कि अनुपम खेर, विक्रम गोखले, नीना कुलकर्णी, भारती आचरेकर और अशोक सराफ जैसे अनगिनत चमकते सितारों को 'बाई' के कड़े अनुशासन और मेंटरशिप का आशीर्वाद मिला था। थिएटर के अलावा उन्होंने सिनेमा में भी अपनी अमिट छाप छोड़ी। उन्होंने 'रावसाहेब' (1986) और 'पेस्टोनजी' (1988) जैसी शानदार फिल्मों का निर्देशन किया, तो वहीं 'पार्टी' (1984) और 'कलयुग' (1981) जैसी फिल्मों में अपनी बेहतरीन अदाकारी का लोहा मनवाया।

हाल ही में और कौन-कौन से मशहूर मराठी एक्टर्स का निधन हुआ है?

विजया मेहता का जाना मराठी इंडस्ट्री के लिए एक और बड़ा आघात है। हाल ही में मशहूर अभिनेता विजय कदम का कैंसर से लंबी लड़ाई के बाद 67 वर्ष की उम्र में निधन हो गया था। वहीं, कुछ समय पहले दिग्गज अभिनेता विक्रम गोखले ने भी 77 वर्ष की आयु में दुनिया को अलविदा कह दिया था, जिनका आखिरी प्रोजेक्ट बहुचर्चित फिल्म 'गोदावरी' थी। अब विजया मेहता के चले जाने से ऐसा लगता है मानो मराठी रंगमंच की पूरी एक पीढ़ी ओझल हो गई है। कला जगत इस अपूरणीय क्षति पर आज गहरे सन्नाटे में है।

निधन से पहले विक्रम गोखले के आखिरी प्रोजेक्ट्स कौन से थे?

विक्रम गोखले के आखिरी प्रोजेक्ट्स में मराठी फिल्म 'गोदावरी' शामिल थी, जिसे कई फिल्म फेस्टिवल्स में काफी तारीफ मिली। उन्होंने इस फिल्म में अहम भूमिका निभाई और इंडस्ट्री में अपनी शानदार एक्टिंग का लोहा मनवाया। गोखले का करियर बहुत शानदार रहा; उन्होंने मराठी और हिंदी दोनों तरह की फिल्मों में काम किया और उनके आखिरी प्रोजेक्ट्स ने एक एक्टर के तौर पर उनकी काबिलियत को दिखाया।