एक वायरल वीडियो में यात्री ने आरोप लगाया कि तत्काल लाइन में पहले होने पर भी उसका टिकट दलाल को दे दिया गया। इस घटना से रेलवे की तत्काल बुकिंग प्रणाली में गड़बड़ी और दलालों की भूमिका पर फिर से बहस छिड़ गई है। लोग सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

सोशल मीडिया पर एक वायरल वीडियो तेज़ी से फैल रहा है। इस वीडियो ने भारतीय रेलवे के तत्काल बुकिंग सिस्टम में होने वाली गड़बड़ियों को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इसे लेकर लोगों में काफी गुस्सा है और वे दलालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। वीडियो में एक पैसेंजर रेलवे स्टाफ से बुरी तरह बहस करता दिख रहा है। बताया जा रहा है कि यह वीडियो किसी अज्ञात रेलवे स्टेशन पर शूट किया गया है। पैसेंजर का आरोप है कि वह तत्काल टिकट की लाइन में सबसे आगे था, लेकिन उसका टिकट किसी दलाल को दे दिया गया। इस गरमागरम बहस का वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल है, जिसके बाद पीक सीजन में तत्काल टिकट बुकिंग में पारदर्शिता को लेकर फिर से बहस छिड़ गई है।

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पैसेंजर का दावा है कि उसने दो बार OTP वेरिफिकेशन भी पूरा कर लिया था और तत्काल रिजर्वेशन के लिए लाइन में सबसे पहले खड़ा था। इसके बावजूद, उसे कन्फर्म सीट नहीं मिली। उसका आरोप है कि उसकी सीट एक दलाल को दे दी गई। करीब 45 सेकंड के इस वीडियो में बुकिंग काउंटर पर जमकर हंगामा होता दिख रहा है। बेहद गुस्से में दिख रहा यात्री इस कथित गड़बड़ी को लेकर रेलवे कर्मचारियों से सवाल-जवाब कर रहा है।

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हालांकि, अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि यह वीडियो किस स्टेशन का है और इसमें किए गए दावों में कितनी सच्चाई है।

रेलवे कर्मचारियों ने बताई तकनीकी खराबी

कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, जब यात्री ने हंगामा किया तो रेलवे अधिकारियों ने इसे सिस्टम से जुड़ी तकनीकी खराबी बता दिया। हालांकि, अधिकारी का यह जवाब न तो उस यात्री को और न ही वहां मौजूद दूसरे लोगों को चुप करा सका। कई लोगों ने सवाल उठाया कि जब बुकिंग रिक्वेस्ट 'वेरिफाइड' हो चुकी थी, तो उसे कैसे नजरअंदाज किया जा सकता है।

तत्काल बुकिंग सिस्टम फिर सवालों के घेरे में

भारतीय रेलवे ने टिकट फ्रॉड को रोकने के लिए पहले भी कई कदम उठाए हैं। इनमें ई-आधार वेरिफिकेशन को अनिवार्य करना, संदिग्ध बुकिंग एक्टिविटी पर कड़ी नजर रखना और दलालों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले ऑटोमेटेड बुकिंग बॉट्स पर कार्रवाई करना शामिल है। इन उपायों के बावजूद, त्योहारों या छुट्टियों जैसे पीक सीजन में दलालों और बुकिंग में गड़बड़ी से जुड़ी शिकायतें सामने आती रहती हैं।