TMC Leader Viral Video: पश्चिम बंगाल चुनाव से पहले टीएमसी नेता का धमकी भरा वीडियो वायरल, वोटरों में डर का माहौल। बीजेपी ने चुनाव आयोग से शिकायत कर निष्पक्ष मतदान पर सवाल उठाए। जानें पूरा मामला और सुरक्षा के इंतजाम।

West Bengal election 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की शुरुआत से ठीक पहले सियासी माहौल गरमा गया है। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो ने चुनावी माहौल में तनाव बढ़ा दिया है। आरोप है कि एक स्थानीय नेता ने वोटरों को खुली धमकी दी, जिससे निष्पक्ष चुनाव को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।

कहां का है मामला?

रिपोर्ट्स के मुताबिक यह घटना सौग्राम गांव की है, जो लाभपुर विधानसभा क्षेत्र में आता है। वीडियो में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के स्थानीय नेता दलीम शेख कथित तौर पर कहते सुनाई दे रहे हैं कि “अगर वोट इधर-उधर गया तो टुकड़े-टुकड़े कर दिए जाएंगे।” यह बयान ऐसे समय सामने आया है जब राज्य में पहले चरण का मतदान 23 अप्रैल से शुरू होने जा रहा है।

बताया जा रहा है कि यह बयान एक पार्टी मीटिंग के दौरान दिया गया, जहां नेता ने कथित तौर पर दावा किया कि उन्हें वोटरों की पूरी जानकारी मिल जाएगी, किसने किस पार्टी को वोट दिया। इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगर किसी ने टीएमसी के अलावा किसी और दल को वोट दिया, तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। इस घटना ने खासतौर पर बीरभूम जैसे संवेदनशील जिले में मतदाताओं के बीच डर का माहौल पैदा कर दिया है।

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बीजेपी ने उठाए सवाल

इस मामले पर भारतीय जनता पार्टी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। लाभपुर से बीजेपी उम्मीदवार देबाशीष ओझा ने आरोप लगाया कि पुलिस निष्पक्ष नहीं है और सत्ताधारी दल के प्रभाव में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि इस तरह की धमकियों के बीच आम लोग बिना डर के मतदान कैसे कर पाएंगे। बीजेपी ने इस मामले की शिकायत भारत निर्वाचन आयोग से की है और केंद्रीय बलों से सख्त कार्रवाई की मांग की है। चुनाव को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने के लिए केंद्र सरकार ने बड़े स्तर पर सुरक्षा बलों की तैनाती की है। जानकारी के अनुसार, पहले चरण में करीब 2.4 लाख केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) के जवान तैनात किए गए हैं। यानी औसतन हर 140 वोटरों पर एक जवान मौजूद रहेगा।

चुनावी माहौल पर असर

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के वीडियो और बयान चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल खड़े करते हैं। ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई न होने पर मतदाताओं का भरोसा कमजोर पड़ सकता है।

पश्चिम बंगाल जैसे बड़े राज्य में चुनाव लोकतंत्र का सबसे बड़ा पर्व माना जाता है। लेकिन यदि चुनाव से पहले ही डर और धमकी का माहौल बनता है, तो यह लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए गंभीर चिंता का विषय है। अब देखना होगा कि प्रशासन और चुनाव आयोग इस मामले में क्या कदम उठाते हैं और क्या मतदाता निर्भीक होकर अपने मताधिकार का प्रयोग कर पाएंगे।