Who is Abhay Tiwari: झारखंड छात्र आंदोलन में अभय तिवारी का नाम क्यों गूंज रहा है? JPSC-JSSC परीक्षा अनियमितता से जुड़े आरोप, CID जांच और पोस्टर के दावे, कौन है अभय तिवारी? जानिए पूरा मामला।
Jharkhand Student Protest: झारखंड में JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार जारी है। प्रदर्शन के 17वें दिन छात्र विधानसभा का घेराव करने पहुंचे। इस दौरान उनके हाथों में एक नाम और तस्वीर बार-बार नजर आई, वह तस्वीर अभय कुमार तिवारी की थी। आखिर इस विरोध प्रदर्शन में अभय तिवारी का नाम इतना अहम क्यों हो गया है? छात्रों के आरोप और CID जांच में सामने आई जानकारी इस पूरे मामले को समझने की अहम कड़ी है। जानिए कौन है अभय तिवारी?
गोड्डा में BSO था अभय तिवारी
अभय कुमार तिवारी गोड्डा जिले के पोड़ैयाहाट में ब्लॉक सप्लाई ऑफिसर (BSO) के पद पर तैनात था। CID की जांच के मुताबिक, सरकारी सेवा में आने से पहले वह TRS-Data Processing Private Limited (TDPL) में मार्केटिंग मैनेजर के तौर पर काम कर चुका था। जांच से जुड़ी जानकारी में यह भी सामने आया कि TDPL को उत्तर प्रदेश में ब्लैकलिस्ट किया जा चुका था।
‘गारंटीड सिलेक्शन’ का दावा और 25 से 40 लाख रुपये का आरोप
जांच में अभय तिवारी पर अभ्यर्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं में चयन का भरोसा दिलाकर प्रभावित करने का आरोप सामने आया। आरोप है कि वह पहले अपनी सफलताओं का उदाहरण देकर उम्मीदवारों का विश्वास जीतता था। इसके बाद कथित तौर पर ‘गारंटीड सिलेक्शन’ का भरोसा दिलाकर उनसे 25 से 40 लाख रुपये तक लिए जाते थे। यही वजह है कि छात्रों के आंदोलन में अभय तिवारी का नाम अब एक बड़े सवाल के तौर पर उठाया जा रहा है।
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पोस्टर में रिश्तेदारों की रैंक का दावा
प्रदर्शनकारी छात्रों के पोस्टर में अभय तिवारी के कई रिश्तेदारों के अलग-अलग प्रतियोगी परीक्षाओं में चयन और रैंक का दावा किया गया है। पोस्टर के मुताबिक, उनके साले की JSSC CGL BSO में रैंक आई थी। ममेरे भाई के BSO में 51वीं रैंक और भाई के भी JSSC CGL BSO में रैंक हासिल करने का दावा किया गया है। पोस्टर में भौजाई, साली और मौसेरे भाई के JSSC CGL में रैंक हासिल करने की बात भी लिखी गई है। इसके अलावा चाचा के साढ़ू के बेटे की BSO में 68वीं रैंक और साले के मौसेरे भाई बिक्रम पांडे की 127वीं रैंक का दावा किया गया है। इन दावों को लेकर छात्र सवाल उठा रहे हैं और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
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CID जांच में भी सामने आया नाम
छात्रों का आरोप है कि अभय तिवारी की भूमिका कथित परीक्षा अनियमितताओं से जुड़ी हो सकती है। हालांकि, किसी भी आरोप को अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता, इसकी पुष्टि जांच और कानूनी प्रक्रिया से ही होगी। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, पुलिस जांच के दौरान अभय तिवारी का नाम सामने आया और उनके ठिकानों समेत कई स्थानों पर छापेमारी भी की गई। CID की पूछताछ में अभय तिवारी द्वारा पास की गई 12 लिखित और मुख्य परीक्षाओं की सूची सामने आने की बात भी कही गई है। आरोप है कि वह इन परीक्षाओं में अपनी सफलता का हवाला देकर दूसरे अभ्यर्थियों को प्रभावित करता था।
फिलहाल छात्रों के पोस्टर और उनके सवालों के केंद्र में यही नाम है। आंदोलनकारी चाहते हैं कि अभय तिवारी की भूमिका, उनसे जुड़े आरोपों और प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच हो, ताकि यह साफ हो सके कि आखिर इस मामले की असली तस्वीर क्या है।
