Champat Rai Resignation: चंपत राय कौन हैं? जानिए राम मंदिर आंदोलन से लेकर राम मंदिर ट्रस्ट तक का उनका सफर और डोनेशन चोरी मामले के बीच इस्तीफे की पूरी कहानी।
Champat Rai Ram Mandir Trust General Secretary Resignation: अयोध्या के राम मंदिर में श्रद्धालुओं की ओर से चढ़ाए गए नकद दान में कथित गड़बड़ी की जांच के बीच श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनके साथ ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा ने भी अपना इस्तीफा सौंप दिया है। यह घटनाक्रम उस समय सामने आया है, जब मंदिर के दान की गिनती और प्रबंधन से जुड़े आठ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। हालांकि इस मामले में चंपत राय का नाम एफआईआर में शामिल नहीं है और शुरुआती जांच में उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की सिफारिश भी नहीं की गई थी। इसके बावजूद उनके इस्तीफे ने लोगों के मन में यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि आखिर चंपत राय कौन हैं और राम मंदिर से उनका रिश्ता कितना पुराना है। जानिए

कौन हैं चंपत राय?
चंपत राय उन चुनिंदा लोगों में शामिल रहे हैं, जिन्होंने राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान लंबे समय तक संगठनात्मक जिम्मेदारियां संभालीं। वह विश्व हिंदू परिषद (VHP) के अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी हैं। चंपत राय का जन्म साल 1946 में उत्तर प्रदेश के बिजनौर में हुआ था। शुरुआत में वह केमिस्ट्री के प्रोफेसर थे, लेकिन बाद में उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और विश्व हिंदू परिषद के संगठनात्मक कार्यों के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। राम मंदिर आंदोलन की रणनीति, समन्वय और जनसंपर्क में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती रही है। यही अनुभव बाद में उन्हें श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का महासचिव बनने तक लेकर आया। जब केंद्र सरकार ने राम मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट का गठन किया, तब चंपत राय को महासचिव की जिम्मेदारी दी गई। मंदिर निर्माण से जुड़े प्रशासनिक फैसलों, ट्रस्ट के संचालन और विभिन्न व्यवस्थाओं में उनकी सक्रिय भूमिका रही।
चंपत राय: अयोध्या का इनसाइक्लोपीडिया
चंपत राय तीन दशक से भी ज्यादा समय तक राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े रहे। अयोध्या विवाद से जुड़े ऐतिहासिक दस्तावेज और सबूत जुटाने में उनकी बड़ी भूमिका रही। इसी वजह से उन्हें अक्सर 'अयोध्या का इनसाइक्लोपीडिया' भी कहा जाता है। माना जाता है कि सुप्रीम कोर्ट के 2019 के ऐतिहासिक फैसले में जिन दस्तावेजों का इस्तेमाल हुआ, उन्हें जुटाने और सुरक्षित रखने में भी उनका अहम योगदान था। उन्हें राम मंदिर परियोजना का प्रमुख चेहरा माना जाता रहा है।
राम मंदिर दान चोरी केस में क्या है पूरा मामला?
स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की जांच के बाद दर्ज एफआईआर के मुताबिक, मंदिर के दानपात्रों से निकाली गई नकदी की गिनती और प्रबंधन से जुड़े आठ लोगों पर श्रद्धालुओं के चढ़ावे में कथित हेराफेरी का आरोप है। जांच एजेंसियों का दावा है कि सीसीटीवी फुटेज और शुरुआती जांच में कुछ संदिग्ध गतिविधियां सामने आईं, जिसके आधार पर मामला दर्ज किया गया। एफआईआर में रामाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव सहित आठ आरोपियों के नाम शामिल हैं। टिन्नू यादव को चंपत राय का करीबी और चालक बताया गया है। हालांकि जांच एजेंसियों ने स्पष्ट किया है कि चंपत राय का नाम एफआईआर में नहीं है और उनके खिलाफ फिलहाल पर्याप्त आपराधिक साक्ष्य नहीं मिले हैं। जांच अभी जारी है और आगे की कार्रवाई उपलब्ध सबूतों के आधार पर तय होगी।
चंपत राय के इस्तीफे के बाद बढ़ी राजनीतिक और प्रशासनिक चर्चा
चंपत राय के इस्तीफे के बाद यह मामला सिर्फ कथित दान चोरी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राम मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और जवाबदेही को लेकर भी नई बहस शुरू हो गई है। दूसरी ओर, जांच एजेंसियां यह स्पष्ट कर चुकी हैं कि मौजूदा कार्रवाई सिर्फ उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर की गई है और जांच पूरी होने के बाद ही किसी भी अतिरिक्त कार्रवाई पर फैसला लिया जाएगा। फिलहाल सबकी नजर SIT की आगे की जांच पर टिकी है, क्योंकि उसी से यह साफ होगा कि इस पूरे मामले में आगे किन लोगों की भूमिका सामने आती है और क्या नए खुलासे होते हैं।


