General Dhiraj Seth Indias 31st Army Chief Profile: जनरल धीरज सेठ भारत के 31वें थलसेना प्रमुख बन गए हैं। जानिए उनका अबतक का करियर, सैन्य सफर, अनुभव और भारतीय सेना में नई जिम्मेदारी समेत पूरी डिटेल।

Who is General Dhiraj Seth Indias 31st Army Chief: भारतीय सेना को नया नेतृत्व मिल गया है और इस बार कमान संभाली है लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ने, जो देश के 31वें थलसेना प्रमुख बन गए हैं। उन्होंने मंगलवार को औपचारिक रूप से पदभार ग्रहण किया और जनरल उपेन्द्र द्विवेदी की जगह ली, जिन्होंने लंबी सैन्य सेवा के बाद रिटायरमेंट लिया। 1.3 मिलियन जवानों वाली भारतीय सेना की कमान अब एक ऐसे अधिकारी के हाथ में है, जिनका करियर फील्ड कमांड से लेकर रणनीतिक प्लानिंग तक बेहद व्यापक रहा है। जानिए देश के नए थलसेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ कौन हैं? जानिए उनका करियर, एजुकेशन और उपलब्धियां समेत पूरी डिटेल।

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कौन हैं जनरल धीरज सेठ, भारत के नए थलसेना प्रमुख

लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ का सैन्य करियर 1986 में शुरू हुआ, जब उन्हें आर्मर्ड कोर में कमीशन मिला। वे राष्ट्रीय रक्षा अकादमी, खड़कवासला के पूर्व छात्र हैं। शुरुआती दौर से ही उनका फोकस ऑपरेशनल अनुभव और जमीनी कमांड पर रहा, जिसने उन्हें धीरे-धीरे सेना के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचाया।

जनरल धीरज सेठ का करियर और उपलब्धियां

लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ भारतीय सेना के उन चुनिंदा वरिष्ठ अधिकारियों में से हैं, जिनकी ऑपरेशनल कमांड अनुभव बेहद व्यापक और बहुआयामी रहा है। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद-रोधी अभियानों के दौरान प्रतिष्ठित आर्मर्ड रेजिमेंट ‘स्किनर्स हॉर्स’ की कमान संभाली, जहां उनकी नेतृत्व क्षमता को विशेष रूप से सराहा गया। इसके बाद पश्चिमी मोर्चे पर एक स्ट्राइक कोर की जिम्मेदारी निभाते हुए उन्होंने रेगिस्तानी सेक्टर में महत्वपूर्ण ऑपरेशनल तैयारियों और अभियानों का नेतृत्व किया। अपने करियर के दौरान उन्होंने साउथ वेस्टर्न कमांड और सदर्न कमांड जैसी दो प्रमुख परिचालन कमांड्स में भी अहम भूमिकाएं निभाईं, जो भारतीय सेना में बहुत ही कम अधिकारियों को एक साथ मिलती हैं। लेफ्टिनेंट जनरल के पद पर पदोन्नति के बाद उन्होंने ‘सुदर्शन चक्र कोर’ की कमान संभाली और इसके बाद दिल्ली एरिया के जनरल ऑफिसर कमांडिंग (GOC) के रूप में भी सेवा दी, जहां उन्होंने कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के सैन्य ऑपरेशनों की जिम्मेदारी निभाई। उनके इस असाधारण सैन्य योगदान और सेवा को मान्यता देते हुए 29 जून 2026 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें ‘उत्तम युद्ध सेवा मेडल’ से सम्मानित किया। बाद में उन्होंने सदर्न कमांड के आर्मर्ड कोर से जुड़े उच्च स्तरीय दायित्वों और अनुभवों के आधार पर सेना के शीर्ष नेतृत्व तक अपनी भूमिका को मजबूत किया।

जनरल धीरज सेठ की रणनीतिक सोच और आधुनिक युद्ध की समझ

जनरल सेठ को केवल फील्ड कमांडर ही नहीं बल्कि एक रणनीतिक सोच वाले अधिकारी के रूप में भी देखा जाता है। सेना मुख्यालय में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने फोर्स स्ट्रक्चर, टेक्नोलॉजी इंटीग्रेशन और भविष्य की युद्ध क्षमता बढ़ाने पर काम किया। उनका जोर इस बात पर रहा है कि भारतीय सेना पारंपरिक युद्ध क्षमता के साथ-साथ आधुनिक तकनीक और डिजिटल सिस्टम में भी मजबूत बने।

जनरल धीरज सेठ: एजुकेशन और ग्लोबल ट्रेनिंग

लेफ्टिनेंट जनरल धीरज कुमार सेठ ने अपनी प्रारंभिक सैन्य प्रशिक्षण नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA), खड़कवासला से प्राप्त की और इसके बाद देहरादून स्थित इंडियन मिलिट्री एकेडमी (IMA) से उच्च सैन्य प्रशिक्षण पूरा कर भारतीय सेना में कमीशन प्राप्त किया। सेवा के दौरान उन्होंने मध्य प्रदेश के महू स्थित आर्मी वॉर कॉलेज में हायर कमांड कोर्स किया, जहां उन्हें उच्च स्तरीय सैन्य नेतृत्व और संचालन की गहन समझ विकसित करने का अवसर मिला। इसके बाद उन्होंने नई दिल्ली स्थित नेशनल डिफेंस कॉलेज (NDC) से भी ट्रेनिंग हासिल की। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सैन्य शिक्षा के अंतर्गत पेरिस स्थित फ्रांसीसी सैन्य संस्थान से डिफेंस सर्विसेज कमांड एंड जनरल स्टाफ कोर्स पूरा किया, जिससे संयुक्त सैन्य अभियानों और उच्च स्तरीय कमान की उनकी समझ और मजबूत हुई। वहीं, संयुक्त राज्य अमेरिका के कैलिफोर्निया स्थित नेवल पोस्ट ग्रेजुएट स्कूल, मोंटेरे में उन्होंने इंटरनेशनल डिफेंस एक्विजिशन मैनेजमेंट कोर्स किया, जिसमें वैश्विक रक्षा प्रबंधन, रणनीतिक खरीद और आधुनिक सैन्य तकनीकों के उपयोग का विशेष प्रशिक्षण शामिल था। इस व्यापक शैक्षणिक और पेशेवर प्रशिक्षण ने उन्हें भारतीय सेना के उच्चतम कमान पदों तक पहुंचने में महत्वपूर्ण आधार प्रदान किया।

जनरल धीरज सेठ की नई जिम्मेदारी के साथ बड़ी उम्मीदें

थलसेना प्रमुख के रूप में अब जनरल धीरज सेठ के सामने सबसे बड़ी चुनौती भारतीय सेना को तेजी से बदलते वैश्विक सुरक्षा माहौल के अनुरूप तैयार रखना है। आत्मनिर्भर रक्षा प्रणाली, तकनीकी आधुनिकीकरण और सीमा सुरक्षा, इन सभी मोर्चों पर उनसे मजबूत नेतृत्व की उम्मीद की जा रही है।