Who is Nithya Raman: नित्या रमन कौन हैं, जिन्होंने अमेरिका के लॉस एंजिल्स में मेयर का चुनाव जीतकर इतिहास रच दिया है। जानिए भारत से कनेक्शन और पहले क्या करती थीं।
Nithya Raman Los Angeles Mayor: अमेरिका से भारत को गर्व महसूस कराने वाली एक बड़ी खबर आई है। भारतीय मूल की नित्या रमन (Nithya Raman) ने अमेरिका के दूसरे सबसे बड़े शहर लॉस एंजिल्स (Los Angeles) में अपना डंका बजा दिया है। उन्होंने वहां की मौजूदा और दिग्गज मेयर करेन बास को चुनाव में करारी शिकस्त दी है। लॉस एंजिल्स जैसे हाई-प्रोफाइल शहर की कमान संभालने वाली नित्या की जीत इसलिए भी ऐतिहासिक है, क्योंकि उन्होंने राजनीति के पुराने दिग्गजों को बिल्कुल नए और अलग तरीके से हराया है। आइए जानते हैं कि नित्या रमन कौन हैं और उन्होंने अमेरिका में ये गेम कैसे पलटा?
Nithya Raman कौन हैं, भारत से क्या कनेक्शन?
नित्या का जन्म साल 1981 में केरल में हुआ था। जब वह सिर्फ 6 साल की थीं, तब उनका परिवार अमेरिका शिफ्ट हो गया। 22 साल की उम्र में उन्हें वहां की नागरिकता मिल गई। पढ़ाई के मामले में नित्या सुपर ब्रिलियंट रही हैं। उन्होंने दुनिया की सबसे बेहतरीन हार्वर्ड यूनिवर्सिटी (Harvard) से पढ़ाई की और फिर MIT से अर्बन प्लानिंग में मास्टर डिग्री ली। राजनीति में आने से पहले नित्या ने भारत में भी काम किया। उन्होंने 'ट्रांसपेरेंट चेन्नई' (Transparent Chennai) नाम का एक संगठन बनाया था, जो शहर में साफ-सफाई और सुविधाओं को सुधारने का काम करता था।
नित्या रमन ने अमेरिका में कैसे पलटा चुनाव का पूरा गेम?
इस चुनाव में सबसे दिलचस्प बात दोनों नेताओं के प्रचार करने का तरीका था। एक तरफ पुरानी मेयर करेन बास थीं, जिन्हें वहां की बड़ी राजनीतिक पार्टियों और लेबर यूनियन का सपोर्ट था। करेन अपना पूरा फोकस बुजुर्ग वोटर्स पर लगा रही थीं। वह सीनियर सिटिजन सेंटर्स में जातीं और बुजुर्गों के साथ डांस करती नजर आती थीं। वहीं, नित्या रमन ने एकदम अलग रास्ता चुना। उन्होंने समझ लिया था कि जीत युवाओं के हाथ में है। इसलिए नित्या ने बार, नाइट क्लब्स और कॉलेज कैंपस में जाकर अपना चुनाव प्रचार किया। युवाओं को उनका यह बेबाक अंदाज इतना पसंद आया कि उन्होंने वोटिंग का पूरा ट्रेंड ही पलट कर रख दिया।
नित्या रमन को किस मुद्दे पर मिली जीत?
लॉस एंजिल्स हॉलीवुड का शहर है, लेकिन यहां की एक बहुत बड़ी सच्चाई है 'बेघर लोग' (Homelessness)। हजारों लोग यहां सड़कों पर या गाड़ियों में सोते हैं। नित्या ने इसी सबसे बड़ी दुखती रग पर हाथ रखा। उन्होंने वादा किया है कि 2028 की गर्मियों तक वो सड़कों पर रहने वालों की संख्या आधी कर देंगी और अपने 4 साल के कार्यकाल में इस समस्या को जड़ से खत्म कर देंगी। जनता को उनका यह विजन बहुत प्रैक्टिकल और शानदार लगा।
जीत पर भी दिखाई सादगी
चुनाव की रात जब रुझानों में नित्या की जीत पक्की होने लगी, तो उनके समर्थक जश्न मनाने लगे। लेकिन नित्या ने बहुत ही समझदारी और थोड़े अलग अंदाज के साथ लोगों से कहा, 'मैं बहुत उम्मीद में हूं। लेकिन मैं थोड़ी अंधविश्वासी (Superstitious) भी हूं। इसलिए अभी हम बस चिल करेंगे, ओके? बिल्कुल कूल।'






