Uttarakhand Flying Car News: उत्तराखंड केे 21 वर्षीय रवि टम्टा ने 13 साल की खुद की सीख के बाद HAPIDA SKYNeX इलेक्ट्रिक फ्लाइंग व्हीकल का प्रोटोटाइप बनाया। जानिए इसकी VTOL तकनीक, टेस्ट फ्लाइट और कमर्शियल इस्तेमाल की चुनौतियां।
Uttarakhand Flying Car: उत्तराखंड के एक युवा ने वह कर दिखाया है जो बड़े-बड़े इंजीनियरों के लिए भी किसी सपने जैसा है। अल्मोड़े के रहने वाले 21 वर्षीय बीए ग्रेजुएट रवि टम्टा ने बिना किसी औपचारिक इंजीनियरिंग डिग्री के, सिर्फ अपनी मेहनत और 13 साल के लंबे प्रयोगों के दम पर एक इलेक्ट्रिक फ्लाइंग कार का प्रोटोटाइप तैयार कर डाला है। 'हैपिडा स्काईनेक्स' (HAPIDA SKYNeX) नाम के इस सिंगल-सीटर वाहन ने इसी साल अगस्त में अपनी सफल टेस्ट फ्लाइट पूरी कर ली है। पहाड़ी इलाकों की कठिन भौगोलिक स्थिति और मेडिकल इमरजेंसी जैसी दिक्कतों को दूर करने के लिए रवि का यह आविष्कार भविष्य की परिवहन क्रांति की एक अनोखी मिसाल पेश कर रहा है।
पहाड़ी रास्तों की चुनौती से फ्लाइंग कार तक का सफर
- प्रेरणा का स्रोत: उत्तराखंड के जागेश्वर धाम के पास पले-बढ़े रवि ने पहाड़ी इलाकों में सफर की दुश्वारियों को बहुत करीब से देखा था। अस्पताल जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए भी लोगों को लंबा संघर्ष करना पड़ता था।
- पारिवारिक पृष्ठभूमि: मैकेनिक पिता हरीश राम के हुनर और मार्गदर्शन के साथ-साथ परिवार के पूरे सहयोग ने रवि के इस अनोखे सफर को आसान बनाया।
- बिना डिग्री की इंजीनियरिंग: एविएशन या साइंस की कोई फॉर्मल डिग्री न होने के बावजूद रवि ने इंटरनेट, ऑनलाइन ट्यूटोरियल और खुद के प्रैक्टिकल एक्सपेरिमेंट्स से यह मुकाम हासिल किया है।
कैसे काम करती है 'हैपिडा स्काईनेक्स' फ्लाइंग कार?
- ड्रोन जैसी तकनीक: इस सिंगल-सीटर वाहन में कई इलेक्ट्रिक मोटर्स और प्रोपेलर्स का इस्तेमाल किया गया है, जो मल्टीरोटर ड्रोन टेक्नोलॉजी पर काम करते हैं।
- वर्टिकल टेक-ऑफ (VTOL): इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके लिए किसी पारंपरिक रनवे की जरूरत नहीं पड़ती। यह सीधे हवा में वर्टिकल टेक-ऑफ और लैंडिंग कर सकता है।
- बैटरी चालित: बैटरी से चलने के कारण इस वाहन को किसी महंगे एविएशन फ्यूल की आवश्यकता नहीं है, जिससे यह पर्यावरण के अनुकूल भी है।
रवि के अन्य आविष्कार और भविष्य की चुनौतियां
- अनेक अनूठे प्रोजेक्ट्स: फ्लाइंग कार के अलावा रवि मोबाइल चार्ज करने वाले जूते, दृष्टिबाधितों के लिए स्मार्ट वॉकिंग स्टिक और वन विभाग के लिए फायर एक्सटिंग्विशर भी बना चुके हैं।
- अभी लंबा सफर बाकी: अगस्त में सफल टेस्ट फ्लाइट के बाद भी इस वाहन को कमर्शियल इस्तेमाल के लिए तैयार होने में वक्त लगेगा। बैटरी परफॉर्मेंस और सुरक्षा मानकों की टेस्टिंग के साथ-साथ DGCA (नागरिक उड्डयन महानिदेशालय) की मंजूरियां भी लेनी होंगी।







