विप्रो ने 4 महीने में इस्तीफा देने वाली तन्नू को 30,130 रुपये का लीगल नोटिस भेजा है। एचआर ने पहले कहा था कि पैसे नहीं देने होंगे। अब कंपनी ने 10 दिन में 12% ब्याज सहित पैसे न चुकाने पर केस की धमकी दी है।

नई दिल्ली: कॉर्पोरेट दुनिया में एचआर (HR) की बातों पर भरोसा करना कितना भारी पड़ सकता है, इसका जीता-जागता सबूत आईटी दिग्गज 'विप्रो' (Wipro Limited) का यह मामला है। कंपनी ने सिर्फ 4 महीने काम करने के बाद मानसिक तनाव के चलते इस्तीफा देने वाली एक लड़की को 30,130 रुपये का लीगल नोटिस थमा दिया है। नोटिस में साफ कहा गया है कि अगर 10 दिन के अंदर ब्याज समेत पैसा नहीं दिया, तो 'सिविल और क्रिमिनल' (Civil and Criminal Case) केस ठोक दिया जाएगा। सोशल मीडिया पर यह लेटर अब जमकर वायरल हो रहा है और लोग कंपनी की क्लास लगा रहे हैं।

क्या है पूरा मामला?

पीड़ित लड़की का नाम तन्नू है। उसने अक्टूबर 2025 में विप्रो की गुरुग्राम (Gurugram) ब्रांच में कस्टमर सर्विस रिप्रेजेंटेटिव के तौर पर नौकरी शुरू की थी। कंपनी के साथ उसका 12 महीने (1 साल) का कॉन्ट्रैक्ट था। लेकिन काम का प्रेशर और मानसिक तनाव (Stress) इतना ज्यादा था कि तन्नू ने जॉइनिंग के सिर्फ 4 महीने बाद ही 25 फरवरी 2026 को रिजाइन कर दिया।

इस्तीफा देते ही कंपनी ने उसे तगड़ा झटका दिया। विप्रो ने कहा कि नोटिस पीरियड की भरपाई के लिए उसे 30,000 रुपये देने होंगे, वरना उसे 'एक्सपीरियंस लेटर' (Experience Letter) नहीं मिलेगा। इस पर एक एचआर (HR) अधिकारी ने फोन पर तन्नू से कहा, "अगर आपको एक्सपीरियंस लेटर नहीं चाहिए, तो कोई पैसा देने की जरूरत नहीं है।" एचआर की इस बात पर भरोसा करके तन्नू शांत बैठ गई।

FNF में काट लिए 27 हजार से ज्यादा रुपये

कहानी में असली ट्विस्ट तब आया जब अप्रैल 2026 में विप्रो ने प्रोविजनल फाइनल सेटलमेंट (Provisional Final Settlement Statement) लेटर जारी किया। इसमें कंपनी ने तन्नू की बेसिक सैलरी, बोनस और एचआरए (HRA) मिलाकर कुल 23,372 रुपये के अमाउंट को जीरो कर दिया।

इतना ही नहीं, नोटिस पीरियड रिकवरी (Notice Period Recovery) के नाम पर 27,549.79 रुपये की भारी-भरकम रकम भी काट ली। फाइनल हिसाब में बताया गया कि तन्नू को अब कंपनी को 30,129.78 रुपये चुकाने हैं।

लीगल नोटिस और क्रिमिनल केस की धमकी

एफएनएफ (FNF) आने के कई महीनों बाद, तन्नू को एक 'लीगल नोटिस' मिला। इस पर 30 सितंबर 2026 की तारीख पड़ी है और इसे बेंगलुरु के सरजापुर रोड स्थित विप्रो के हेड ऑफिस के वकीलों ने भेजा है।

नोटिस में दी गई ये धमकियां

नोटिस में कहा गया है कि तन्नू को कंपनी के 30,130 रुपये चुकाने हैं। इस रकम पर उसे तय तारीख से 12% सालाना ब्याज भी देना होगा। इसके अलावा, नोटिस मिलने के 10 दिन के अंदर यह पैसा एचडीएफसी (HDFC) बैंक में विप्रो के खाते में जमा करना होगा। अगर वह ऐसा नहीं करती है, तो उसके खिलाफ 'सिविल और क्रिमिनल' (Civil and Criminal Legal Action) कानूनी कार्रवाई की जाएगी और इसका सारा खर्च भी तन्नू को ही उठाना पड़ेगा।

फोन पर एचआर के किए वादे को हवा में उड़ाते हुए, कागज पर 30 हजार रुपये और 12% ब्याज मांगना, साथ ही क्रिमिनल केस की धमकी देना—विप्रो की इस हरकत पर कॉर्पोरेट सेक्टर में काफी गुस्सा है। यह मामला इस बात का साफ उदाहरण बन गया है कि आईटी कंपनियां अपने कर्मचारियों का किस तरह शोषण करती हैं।