यह तस्वीर गरीबों की जिंदगी बयां करने के लिए काफी है! हाथ में खाली कटोरा लेकर स्कूल में झांकती यह मासूम इंटरवल का इंतजार कर रही थी। ताकि मिड-डे मील की जो जूठन बचे, वो उसे खाने को मिल सके। जब यह फोटो वायरल हुई, तो लोगों की आंखें भर आईं। एक NGO बच्ची के घर पहुंचा। जानिए फिर क्या हुआ? 

हैदराबाद. 'खाली पेट और खाली कटोरा!' कल तक यह मासूम रोज इन्हीं दोनों चीजों के संग स्कूल पहुंचती थी। वो इस स्कूल की छात्रा नहीं थी, फिर भी वो नियमित स्कूल जाती थी। उसे सिर्फ मिड-डे मील का इंतजार होता था। उसे उम्मीद होती थी कि स्कूली बच्चे जो जूठन छोड़ेंगे, वो उसके नसीब में होगा। झकझोरने वाली यह तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी। शीर्षक दिया गया था-आकाली चूपु यानी भूखी निगाहें। यह तस्वीर तेजी से वायरल हुई। यह तस्वीर खींची गई थी गुडिमलकापुर हाईस्कूल में। इसे देवलझाम सिंह ने खींचा था। जब यह तस्वीर NGO 'एमवी फाउंडेशन' के राष्ट्रीय समनवयक वेंकट रेड्‌डी ने देखी, तो वे सक्रिय हुए। वे बच्ची के घर पहुंचे। वहां उसके घर की स्थिति देखकर भावुक हो उठे। शुक्रवार को इस बच्ची का स्कूल में एडमिशन करा दिया गया।

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अब खुश है दिव्या: इस बच्ची का नाम है दिव्या। दिव्या स्कूल के पास ही एक झुग्गी बस्ती में रहती है। दिव्या के मम्मी-पापा सफाईकर्मी है। स्कूल में दाखिले के बाद दिव्या खुश है, क्योंकि अब उसे मिड-डे मील भी मिलेगा और पढ़ने को भी।


NGO ने शेयर की तस्वीर: वेंकट रेड्डी ने दिव्या की तस्वीर शेयर करके लिखा था-‘शर्म की बात है, एक बच्ची को उसका पढ़ने और खाने का अधिकार भी नहीं मिला।’इसके बाद उन्होंने NGO को सक्रिय किया। वे खुद बच्ची के घर पहुंचे। जब बच्ची का एडमिशन स्कूल में हो गया, तब रेड्डी ने स्कूल यूनिफार्म के साथ उसकी तस्वीर शेयर की।


स्कूल में एडमिशन के बाद दिव्या के चेहरे पर खुशी देखते बनती थी। यूनिफार्म में दिव्या किसी फूल की तरह खिली नजर आई।