राजस्थान के बाड़मेर में हुए सड़क हादसे में 7 बहनों ने पहले अपने माता-पिता को खो दिया। एकलौते भाई के इलाज के लिए लोगों ने जोड़ लिए 2 करोड़ पर फिर भी नहीं खरीद पाएं सांसे। 5 दिन तक मौत से जंग लड़ते मासूम ने तोड़ दी सांसों की लड़ी। बहनों के नहीं सूख रहे आंसू।

बाड़मेर (barmer). 7 बहनें जिनकी उम्र 6 साल से लेकर 20 साल तक है । रविवार को माता-पिता को खोने के बाद उनके आंसू अभी सूखे भी नहीं थे कि आज उनके 4 साल के भाई की भी मौत हो गई। इकलौता भाई 5 दिन से अस्पताल में भर्ती था और जीवन और मौत के बीच संघर्ष कर रहा था। लेकिन मौत इसमें जीत गई और भाई को अपने साथ ले गई। वह हर समय मां के पास जाने की जिद करता रहता था, उसे नहीं पता था कि उसकी मां इस दुनिया में नहीं रही है।

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सड़क हादसे में गई थी माता पिता की जान, भाई को भी खोया
पूरा घटनाक्रम राजस्थान के बाड़मेर जिले का है। बाड़मेर के सिणधरी थाना क्षेत्र में रविवार शाम को खेमाराम और उसकी पत्नी कुकू देवी का सड़क हादसे में निधन हो गया था। पति पत्नी और परिवार के तीन अन्य सदस्य सबसे बड़ी वाली बेटी के लिए रिश्ता देखने जा रहे थे। लेकिन वर पक्ष के घर पहुंचने से पहले ही मौत से सामना हो गया। इस हादसे में 4 साल का बेटा देशराज गंभीर घायल हो गया था। आज उसकी भी जान चली गई।

शव देख गांव में मचा कोहराम, भाई के इलाज को जोड़ी रकम कोई काम न आई
माता पिता के शव जब गांव में पहुंचे तो कोहराम मच गया। सोमवार को माता पिता की अर्थी को ग्रामीणों ने मिलकर अंतिम संस्कार किया। उसके बाद 4 साल के बच्चे देशराज को बचाने के लिए रुपयों की मदद जमा करना शुरू किया गया। सोमवार से लेकर आज शुक्रवार तक सिर्फ 4 से 5 दिन के दौरान ही 2 करोड रुपए से ज्यादा की रकम जमा भी कर ली गई, लेकिन यह रकम काम नहीं आई।

अब मदद के पैसो को बहनों की शादी में काम आएंगे 
अब परिवार और समाज के लोगों ने 2 करोड रुपए की इस रकम से सात बहनों की शादी करने का जिम्मा उठाया है। राजस्थान में ऐसा पहली बार हुआ है कि 4 से 5 दिन में ही जनता से मदद कर दो करोड़ रुपए जुटाई जा सके हैं। यह सारी मदद मोबाइल फोन के जरिए और सोशल मीडिया के जरिए जमा की गई है। जोधपुर ,भरतपुर, जयपुर बाड़मेर समेत छह से सात जिलों के लोगों ने सोशल मीडिया पर मिली जानकारियों के बाद यह मदद साझा की है।

बेहद हैरान करने वाली इस खबर के बाद पूरे गांव में कोहराम मचा हुआ है। सातों बहनों के आंसू अभी सूखे भी नहीं थे कि अब इकलौते भाई की मौत ने उन्हें फिर से तोड़ दिया है ।परिवार के अन्य सदस्य और समाज के लोग सातों बहनों को संभाल रहे हैं।

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