देश के जाने माने व अयोध्या राम मंदिर मामले में सक्रिय भूमिका निभाने वाले संत आचार्य धर्मेंद्र के सोमवार को निधन के बाद मंगलवार 20 सितंबर के दिन देश दुनिया से बड़ी संख्या में लोग राजस्थान पहुंच रहे है। सुरक्षा को ध्यान रखते हुए वहां के बाजार बंद किए गए है, साथ ही भारी पुलिस बल तैनात है।

जयपुर. देश के एक जाने माने संत आयार्च धमेन्द्र के अंतिम दर्शन के लिए आज देश दुनिया से बड़ी संख्या में लोग राजस्थान आ रहे हैं। राजस्थान के जयपुर में विराटनगर क्षेत्र में उनके मठ में उन्हें आज शाम तक अंतिम विदाई दी जाएगी। इससे पहले उनके अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में भक्तों का आना जाना जारी है। संत आचार्य धमेन्द्र करीब बीस दिन से जयपुर के एसएमएस अस्पताल में भर्ती थे और सोमवार सवेरे उन्होनें अंतिम सांस ली थी। उसके बाद उनकी देह को सोमवार शाम उनके मठ पर लाया गया और आज सवेरे से वहां पर अंतिम दर्शन के लिए उनकी देह को रखा गया है। 

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कौन थे संत धमेन्द्र जिनके दुनिया से चले जाने पर पीएम समेत कई बड़े नेता आहत हैं...
दरअसल राजस्थान के जयपुर में रहने वाले आयार्य धमेन्द्र का जयपुर के दिल्ली रोट पर कोठपूतली के नजदीक विराटनगर में मठ है। वे इसी मठ में रहकर साधना करते थे। श्रीपंचखंड पीठ में साधना करने वाले आचार्य धमेन्द्र महाराज विश्व हिंदु परिषद के मार्गदर्शक रहे और गायों की हत्या से जुड़े बड़े आंदोलनों की अनुवाई की। विश्व हिंदू परिषद से जुड़े रहने के कारण प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी तक उनका संपर्क रहा। राजस्थान समेत अन्य कई राज्यों के दिग्गज भाजपा नेता उनसे जुड़े रहे। उनके आंदोलनों और जनता के बीच पहुंच के चलते भाजपा के अलावा कांग्रेस के नेता भी उनके संपर्क में रहे। संत धर्मेंद्र के निधन के बाद कई दिग्गज नेताओं ने सोशल मीडिया के माध्यम से ट्वीट कर अपना दुख जाहिर किया था। उनकी देवलोक गमन पर देश के पीएम नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह से लेकर राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र व सेंट्रल मिनिस्टर गजेंद्र सिंह शेखावत ने ट्वीट कर शोक व्यक्त किया।

पूरा जीवन हिंदुत्व को सौंप दिया
संत धर्मेंद्र अपना पूरा जीवन हिंदुत्व और हिंदुस्तान की रक्षा के लिए लगा दिया। विश्व हिंदू परिषद से लंबे समय तक जुड़े रहने के दौरान उन्हें राम मंदिर मामले को लेकर अपने खुले व्यक्तित्व के कारण वह सुर्खियों में रहे। बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में जब फैसला आने वाला था, तो उन्होंने फैसले से पहले कहा था- मैं आरोपी नंबर एक हूंमैंने जो कुछ किया है, सभी के सामने किया है। मैं सजा से नहीं डरता। बड़े आंदोलनो को लेकर से सत्याग्रह करते रहे। जेल गए और कई महीनों तक जेलों में बिताए। उसके बाद राजस्थान के विराटनगर की ओर उन्होनें मठ एवं आश्रम बनाया। उनके देव लोकगमन के बाद पूरे प्रदेश और देश में शोक की लहर है।

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