राजस्थान के धौलपुर से एक ऐसी खबर सामने आई है, जो गहलोत सरकार और स्वास्थ्य विभाग के दावों की पोल खोलती है। यहां एक गर्भवती महिला दर्द से कराहती रही, लेकिन एंबुलेंस आना तो दूर कॉल तक रिसीव नहीं किया गया। आखिर में बेबस होकर प्रसूता ने मूंगफली के ठेले पर बेटी को जन्म दिया। 

धौलपुर (राजस्थान). सरकारें अक्सर दावें करती है कि आप इमरजेंसी नंबर डायल की कीजिए, मिनटों में आपको सुविधा मिल जाएगी। लेकिन राजस्थान के धौलपुर से एक ऐसी खबर सामने आई है, जो गहलोत सरकार और स्वास्थ्य विभाग के दावों की पोल खोलती है। यहां एक गर्भवती महिला दर्द से कराहती रही, परिवार और पड़ोस के लोगों ने एंबुलेंस को फोन किया, लेकिन एंबुलेंस आना तो दूर कॉल तक रिसीव नहीं किया गया। आखिर में बेबस होकर प्रसूता ने मूंगफली के ठेले पर बेटी को जन्म दिया। 

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सरकारी योजना पर सवालियां निशान
दरअसल, धौलपुर जिले के प्रशासन की पोल खोलने वाला यह मामला बाड़ी जिले के बाड़ी अस्पताल का है।बताया जा रहा है कि मामले में जननी शिशु सुरक्षा योजना की लापरवाही सामने आई है। ठेले पर हुई प्रसूता की इस डिलीवरी ने सरकारी योजना पर सवालियां निशान खड़े कर दिए हैं। मामला मीडिया में आने के बाद जिला प्रशासन हड़कंप मच गया है।

पीड़िता के पति ने सुनाई पूरी कहानी
मामले की जानकारी देते हुए पीड़िता के पति जीतू कुशवाह ने बताया कि सोमवार देर रात अचानक उसके पेट में तेजी से दर्द उठा। तो लोगों ने प्रसव पीड़ा होने पर एंबुलेंस को फोन किया। वह बार-बार फोन करते रहे, लेकिन एंबुलेंस नहीं आई। अंत में पीड़िता को मूंगफली के ठेले पर लिटाकर अस्पताल ले जाने लगा। लेकिन पीड़ा होने पर आसपास की महिलाओं मजबूर होकर ठेले पर ही डिलीवरी करवाना पड़ी।

जरा सी देरी होती तो जा सकती थी जान
वहीं प्रसूता के साथ मौजूद महिला लक्ष्मी ने बताया कि हम एक घंटे तक एंबुलेंस वालों को फोन लगाते रहे। लेकिन अंत में जब दर्द ज्यादा बढ़ गया तो ठेले पर ही डिलीवरी करना मजबूरी हो गया। क्योंकि हम ऐसा नहीं करते तो गर्भवती महिला और उसके बच्चे की जान भी जा सकती थी। इतना ही नहीं बाद में जब कोई वाहन नहीं मिला तो मजबूरन करीब 3 किलोमीटर अस्पताल के लिए ठेले पर ही चलना पड़ा।

कार्रवाई करने के निर्देश दिए
लापरवाही सामने आने के बाद मामले में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी गोपाल गोयल ने मामले की जांच करा कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। वहीं बाड़ी अस्पताल के पीएमओ डॉक्टर शिवदयाल मंगल ने बताया कि देर रात को प्रसूता के अस्पताल आते ही नर्सिंग स्टाफ ने हाथों-हाथ उसका इलाज शुरू कर दिया गया है।