राजस्थान के सीकर जिलें में एकादशी और सोमवार 8 अगस्त के दिन खाटूश्यामजी मंदिर में  हुए हादसे में दांतारामगढ़ विधायक चौधरी विरेंद्र सिंह ने मंदिर कमेटी के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए विरोध प्रदर्शन किया। साथ ही उन पर वीआईपी दर्शन देने के नाम पर मिस मैनेजमेंट का आरोप लगाया।

सीकर. राजस्थान के सीकर जिले के खाटूश्यामजी में आज सुबह भगदड़ में तीन महिलाओं की मौत के मामले ने तूल पकड़ लिया है। खुद दांतारामगढ़ कांग्रेस विधायक चौधरी विरेन्द्र सिंह ने ही श्याम मंदिर कमेटी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। कस्बे के बाजार बंद करवाकर विधायक सिंह अपने सैंकड़ों समर्थकों के साथ ताले तोड़ते हुए मंदिर कमेटी कार्यालय में घुस गए। जहां धरना देकर कमेटी के खिलाफ जमकर आक्रोश जताया। वे उच्च अधिकारियों को मौके पर बुलाकर वार्ता करने की मांग पर अड़ गए। बाद में कलक्टर अविचल चतुर्वेदी व एसपी कुंवर राष्ट्रदीप ने मौके पर पहुंचकर मंदिर में व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने का आश्वासन देकर मामला शांत करवाया।

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रैली के रूप में बाजार बंद करवाते हुए पहुंचे विधायक
घटना को लेकर विधायक सुबह से आक्रोश में थे। दोपहर में वे अपने समर्थकों केा लेकर खाटूश्यामजी ही पहुंच गए। जहां तोरण द्वार से बाजार बंद करवाते हुए रैली शुरू कर दी। जो मेला मजिस्ट्रेट ऑफिस, अस्पताल चौराहा से कबूतर चौक होते हुए मंदिर कमेटी कार्यालय तक पहुंचे। जहां पुलिस के रोकने पर भी वे नहीं रुके और समर्थकों के साथ कमेटी कार्यालय पर लगे ताले तोड़ते हुए अंदर घुस गए। जहां धरने पर बैठकर उन्होंने नारे लगाते हुए प्रदर्शन शुरू कर दिया। 

बेरी केट्स व दरवाजा फांद घुसे कार्यकर्ता
इस दौरान विधायक समर्थक भी जबरदस्त आक्रोश में दिखे। मंदिर कमेटी पहुंचने के लिए वे 10 से 15 फीट तक की बेरीगेटिंग्स और दरवाजे को पार करते हुए मंदिर कमेटी के अंदर घुस गए। जो पुलिस के रोके भी नहीं रुके। कुछ देर कोशिश करने के बाद पुलिस भी मूक होकर उन्हें देखती रही।

देव स्थान को देने की रखी मांग, आश्वासन के बाद हुआ मामला शांत
धरने पर बैठे विधायक सिंह ने इस दौरान हादसे का जिम्मेदार मंदिर कमेटी व प्रशासन की व्यवस्थाओं में चूक को बताया। श्याम मंदिर में वीआईपी दर्शन बंद करने तथा मंदिर को देवस्थान के अधीन करने की मांग भी रखी। सूचना पर कलक्टर अविचल चतुर्वेदी व एसपी कुंवर राष्ट्रदीप मौके पहुंचे। जिन्होंने व्यवस्थाओं को जल्द दुरुस्त कर खाटूश्यामजी में हादसे की पुनरावृत्ति नहीं होने का आश्वासन दिया। उनकी हर मांग पर विचार कर उचित कार्यवाही की बात कहते हुए मामला शांत करवाया।

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