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Akshaya Tritiya 2026: अक्षय तृतीया कब है? जानें सही डेट, पूजा विधि, मंत्र, मुहूर्त सहित पूरी डिटेल
Akshaya Tritiya 2026 Date: अक्षय तृतीय को धर्म ग्रंथों में बहुत ही शुभ तिथि बताया गया है। यही कारण है इस दिन लोग शुभ कार्य जैसे विवाह, गृह प्रवेश आदि बिना मुहूर्त के भी कर लेते हैं। इस दिन सोना खरीदने का भी विशेष महत्व है।

जानें अक्षय तृतीया से जुड़ी पूरी डिटेल
Akshaya Tritiya Kab Hai: हर साल वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया पर अक्षय तृतीया का उत्सव मनाया जाता है। धर्म ग्रंथो में इसे अबूझ और स्वयंसिद्ध मुहूर्त बताया गया है। इस बार अक्षय तृतीया की डेट को लेकर ज्योतिषियों में मतभेद की स्थिति बन रही है, जिसके चलते ये पर्व 2 दिन तक मनाया जाएगा। मान्यता है कि इसी तिथि पर देवी लक्ष्मी ने कुबेर को धन का स्वामी बनाया था, इसलिए इस तिथि पर देवी लक्ष्मी की पूजा की जाती है। आगे जानिए कब है अक्षय तृतीया, कैसे करें देवी लक्ष्मी की पूजा, शुभ मुहूर्त, मंत्र आदि खास बातें…
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कब है अक्षय तृतीया?
पंचांग के अनुसार वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 19 अप्रैल, रविवार की सुबह 10 बजकर 49 मिनिट से शुरू होगी जो 20 अप्रैल, सोमवार की सुबह 07 बजकर 27 मिनिट तक रहेगी। चूंकि अक्षय तृतीया पर्व से संबंधित सभी कार्य दोपहर में किए जाते हैं, इसलिए ये पर्व 19 अप्रैल, रविवार को मनाई जाएगी। जहां सूर्योदय तिथि से पर्व मनाते हैं, वहां ये पर्व 20 अप्रैल को मनाया जाएगा।
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अक्षय तृतीया 2026 शुभ मुहूर्त
सुबह 07:41 से 09:16 तक
सुबह 09:16 से 10:51 तक
सुबह 10:49 से दोपहर 12:20 (श्रेष्ठ मुहूर्त)
दोपहर 12:00 से 12:51 तक (अभिजीत मुहूर्त)
दोपहर 02:00 से 03:35 तक
अक्षय तृतीया पूजा विधि-मंत्र
- अक्षय तृतीया की सुबह यानी 19 अप्रैल को सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद व्रत-पूजा का संकल्प लें। शुभ मुहूर्त से पहले पूजा की पूरी तैयारी कर लें।
- शुभ मुहूर्त शुरू होने पर भगवान विष्णु के साथ देवी लक्ष्मी की पूजा करें। इसके लिए एक पटिए पर इनकी तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें। सबसे पहले दीपक जलाएं।
- गाय के दूध से विष्णु-लक्ष्मी प्रतिमा का अभिषेक करें। फूलों की माला पहनाएं। अबीर, गुलाल, चावल, फूल, पान, फल, वस्त्र, नारियल आदि चीजें एक-एक चढ़ाते रहें।
- पूजा करते समय ऊं श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ऊं मंत्र का जाप करते रहें। खीर का भोग भी लगाएं। आरती करें और प्रसाद भक्तों में बांट दें।
- पूजा के बाद सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करें। अक्षय तृतीया पर देवी लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा करने से धन सभी मनोकामनाएं पूरी हो सकती हैं।
देवी लक्ष्मी की आरती हिंदी में
ऊं जय लक्ष्मी माता, जय लक्ष्मी माता।
तुमको निसिदिन सेवत हर विष्णु-धाता।। ऊं।।
उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग माता।
सूर्य-चंद्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता।। ऊं...।।
दुर्गारूप निरंजनि, सुख-सम्पत्ति दाता।
जो कोई तुमको ध्यावत, रिद्धि-सिद्धि धन पाता।। ऊं...।।
तुम पाताल-निवासिनि, तुम ही शुभदाता।
कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी, भवनिधिकी त्राता।। ऊं...।।
जिस घर तुम रहती, तहँ सब सद्गुण आता।
सब संभव हो जाता, मन नहिं घबराता।। ऊं...।।
तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न हो पाता।
खान-पान का वैभव सब तुमसे आता।। ऊं...।।
शुभ-गुण-मंदिर सुंदर, क्षीरोदधि-जाता।
रत्न चतुर्दश तुम बिन कोई नहिं पाता।। ऊं...।।
महालक्ष्मी(जी) की आरती, जो कोई नर गाता।
उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता।। ऊं...।।
Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।
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