Anant Chaturdashi Ki Katha: हिंदू धर्म में अनेक व्रत किए जाते हैं। इन व्रतों से जुड़ी रोचक कथाएं भी हैं। ऐसी ही एक कथा अनंत चतुर्दशी व्रत की भी है। इस कथा को सुने बना अनंत चतुर्दशी व्रत का पूरा फल नहीं मिलता।

Anant Chaturdashi Vrat Katha In Hindi: इस साल अनंत चतुर्दशी का व्रत 25 सितंबर, शुक्रवार को किया जाएगा। इस दिन भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, अनंत चतुर्दशी की पूजा के साथ इसकी व्रत कथा सुनना भी जरूरी माना जाता है। इसे सुनने के बाद ही पूजा-व्रत का पूरा फल मिलता है। आगे पढ़ें अनंत चतुर्दशी व्रत की ये रोचक कथा…

अनंत चतुर्दशी व्रत कथा हिंदी में

- पौराणिक कथा के अनुसार, जब पांडव अपने वनवास के समय कठिन परिस्थितियों से गुजर रहे थे, तब एक दिन भगवान श्रीकृष्ण उनसे मिलने पहुंचे। उस दौरान धर्मराज युधिष्ठिर ने श्रीकृष्ण से अपने संकटों को दूर करने का उपाय पूछा। युधिष्ठिर की बात सुनकर भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें अनंत चतुर्दशी का व्रत करने की सलाह दी। इसके साथ ही उन्होंने अनंत व्रत से जुड़ी एक कथा भी सुनाई।

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- श्रीकृष्ण ने बताया कि प्राचीन समय में सुमंत नाम के एक धर्मपरायण ब्राह्मण रहते थे। उनकी एक बेटी थी, जिसका नाम सुशीला था। जब सुशीला विवाह योग्य हुईं तो सुमंत ने उनका विवाह ऋषि कौण्डिल्य के साथ कर दिया। कुछ समय बाद जब ऋषि कौण्डिल्य अपनी पत्नी सुशीला को लेकर वहां से जाने लगे, तब रास्ते में सुशीला ने कुछ महिलाओं और ऋषियों को भगवान की पूजा करते हुए देखा।

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- सुशीला ने उनके पास जाकर पूजा के बारे में जानकारी ली। पूछने पर उन्हें पता चला कि वे सभी भगवान अनंत की पूजा कर रहे हैं और अनंत चतुर्दशी का व्रत कर रहे हैं। यह जानकर सुशीला ने भी भगवान अनंत का व्रत करने का संकल्प लिया और पूजा के बाद अनंत सूत्र अपने हाथ में बांध लिया। जब ऋषि कौण्डिल्य की नजर सुशीला के हाथ में बंधे उस धागे पर पड़ी तो उन्होंने उसके बारे में पूछा।
- सुशीला ने उन्हें भगवान अनंत की पूजा और व्रत के बारे में पूरी जानकारी दी। ऋषि कौण्डिल्य इस बात से प्रसन्न नहीं हुए। उन्होंने अनंत सूत्र को उतारकर तोड़ दिया और उसे अग्नि में डाल दिया। इस तरह भगवान अनंत का अपमान हुआ। इसके बाद कौण्डिल्य ऋषि के जीवन में परेशानियां बढ़ने लगीं और उनकी सुख-समृद्धि धीरे-धीरे खत्म हो गई। एक दिन सुशीला ने उन्हें बताया कि भगवान अनंत के अपमान के कारण ही उनके परिवार को इस तरह के संकटों का सामना करना पड़ रहा है।
- अपनी गलती का एहसास होने के बाद ऋषि कौण्डिल्य काफी दुखी हुए। उन्होंने भगवान अनंत से क्षमा मांगने का फैसला किया और उन्हें खोजने के लिए जंगल की ओर निकल पड़े। जंगल में भटकते हुए एक दिन उन्हें एक वृद्ध ब्राह्मण दिखाई दिए। ऋषि ने उनसे भगवान अनंत के बारे में पूछा। तब उस वृद्ध ने बताया कि वही भगवान अनंत हैं।
- भगवान अनंत ने कौण्डिल्य से कहा कि उनके अपमान के कारण ही उन्हें इन परेशानियों से गुजरना पड़ा। लेकिन ऋषि के पश्चात्ताप से वे प्रसन्न हैं। उन्होंने ऋषि को लगातार 14 वर्षों तक अनंत व्रत करने का निर्देश दिया और कहा कि इससे उनकी परेशानियां दूर हो जाएंगी।कौण्डिल्य ऋषि ने भगवान अनंत की बात मानकर विधि-विधान से व्रत करना शुरू किया।
- व्रत के प्रभाव से उनकी परेशानियां दूर होने लगीं और उनकी सुख-समृद्धि फिर से लौट आई। इसके बाद वे अपनी पत्नी सुशीला के साथ सुखपूर्वक जीवन बिताने लगे। भगवान श्रीकृष्ण की बात सुनने के बाद पांडवों ने भी अनंत चतुर्दशी का व्रत विधि-विधान से किया। व्रत के प्रभाव से उन्हें अपना खोया हुआ राज्य वापस प्राप्त हुआ और बाद में उन्होंने हस्तिनापुर पर सुखपूर्वक शासन किया।