Basant Panchami Katha: देवी सरस्वती ज्ञान और संगीत की देवी हैं। इन्हीं की कृपा से कालिदास महाज्ञानी बने। देवी सरस्वती के प्राकट्य से जुड़ी एक रोचक कथा भी है, जिसे बसंत पंचमी पर जरूर सुनना चाहिए।

Basant Panchami Katha In Hindi: इस बार बसंत पंचमी का पर्व 23 जनवरी, शुक्रवार को मनाया जा रहा है। ये पर्व देवी सरस्वती के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाया जाता है। देवी सरस्वती की ज्ञान, बुद्धि, संगीत और कला की देवी कहा जाता है। इनकी कृपा से महामूर्ख भी महाज्ञानी बन सकता है। देवी सरस्वती कैसे प्रकट हुई, इससे जुड़ी एक कथा भी पुराणों में प्रचलित है। बसंत बंचमी के मौके पर ये कथा जरूर पढ़नी चाहिए। आगे जानिए देवी सरस्वती के प्राकट्य की रोचक कथा…

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बसंत पंचमी की रोचक कथा

प्रचलित कथा के अनुसार, भगवान ब्रह्मा ने संसार की रचना की। इसके बाद बहुत समय बीत गया। एक दिन ब्रह्मदेव संसार को देखने निकले। उन्होंने देखा कि संसार में हर तरफ घोर शांति है, किसी भी तरह का कोई स्वर यहां नहीं है।

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ये देखकर ब्रह्मदेव के मन में ये विचार आया संसार का निर्माण अभी पूरा नहीं हुआ है और उन्होंने अपने कमंडल में से जल निकालकर जैसे ही बाहर की ओर छिड़का, एक देवी प्रकट हुईं। उन देवी का स्वरूप बहुत उज्जवल था, वस्त्र सफेद थे। चेहरे पर शांति का भाव था और हाथ में वीणा थी।
ब्रह्मदेव ने उन्हें सरस्वती नाम दिया। देवी सरस्वती ने ब्रह्मदेव को प्रणाम किया। ब्रह्माजी ने देवी सरस्वती से कहा ‘इस संसार में कहीं कोई स्वर नहीं है जिसके कारण ये अधूरा लग रहा है, इसमें कोई कमी है। इसे आप पूरी कीजिए।
ब्रह्मदेव की बात सुनकर जैसे ही देवी सरस्वती ने अपनी वीणा को छेड़ा तो उसमें से जो ध्वनि निकली उससे पूरे संसार में ध्वनि फैल गई। पशु-पक्षी चहचहाने लगे, झरने आवाज करने लगे। मनुष्य एक-दूसरे से बात करने लगे।
इसके बाद ब्रह्मदेव ने देवी सरस्वती को ज्ञान, संगीत और बुद्धि के रूप में स्थापित किया। जिस तिथि पर देवी सरस्वती प्रकट हुई, वो माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि है। तभी से इस तिथि पर देवी सरस्वती के प्राकट्य का उत्सव बसंत पंचमी के रूप में मनाया जा रहा है।
बसंत पंचमी पर जो भी देवी सरस्वती की पूजा करता है, उसकी बुद्धि का विकास होता है और उसे हर तरह की सुख-समृद्धि मिलती है। विद्यार्थियों को देवी सरस्वती की पूजा विशेष रूप से करनी चाहिए।

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