Shardiya Navratri 2026: नवरात्रि में रोज देवी दुर्गा की पूजा की जाती है और साथ में आरती भी। बिना आरती के कोई भी पूजा पूरी नहीं मानी जाती। जानें नवरात्रि में कैसे करें मां दुर्गा की आरती जय अम्बे गौरी... और आरती करने की सही विधि।
Durga Mata Ki Aarti Lyrics In Hindi: इस बार शारदीय नवरात्रि का पर्व 11 से 20 अक्टूबर के बीच मनाया जाएगा। इस पर्व के दौरान रोज देवी दुर्गा की आरती करने की परंपरा भी है। मान्यता है कि देवी दुर्गा की पूजा करने से हर तरह रोग, शोक और भय दूर हो जाता है। देवी दुर्गा की आरती करने की एक खास विधि है। आगे जानिए नवरात्रि के दौरान किस विधि से करें देवी दुर्गा की आरती...
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कैसे उतारें मां दुर्गा की आरती?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां दुर्गा की आरती करते समय दीपक को कुल 14 बार घुमाने की परंपरा बताई जाती है। इसमें सबसे पहले देवी के चरणों के सामने 4 बार, नाभि के पास 2 बार, चेहरे के सामने 1 बार और फिर पूरे शरीर के सामने 7 बार दीपक घुमाया जाता है। मान्यता है कि श्रद्धा और विधि-विधान से मां दुर्गा की आरती करने से भक्तों को देवी का आशीर्वाद मिलता है।
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मां दुर्गा की आरती (Devi Durga Ki Aarti)
जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निशिदिन ध्यावत हरि ब्रह्मा शिव री ॥1॥ जय अम्बे…
माँग सिंदुर विराजत टीको मृगमदको।
उज्ज्वल से दोउ नैना, चन्द्रवदन नीको ॥2॥ जय अम्बे.…
कनक समान कलेवर रक्ताम्बर राजै।
रक्त-पुष्प गल माला, कण्ठनपर साजै ॥3॥ जय अम्बे…
केहरी वाहन राजत, खड्ग खपर धारी।
सुर-नर-मुनि-जन सेवत, तिनके दुखहरी ॥4॥ जय अम्बे…
कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती।
कोटिक चन्द्र दिवाकर, सम राजत ज्योती ॥5॥ जय अम्बे…
शुंभ निशुंभ विदारे, महिषासुर-धाती।
धूम्रविलोचन नैना निशिदिन मदमाती ॥6॥ जय अम्बे…
चण्ड मुण्ड संहारे, शोणितबीज हरे।
मधु कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे ॥7॥ जय अम्बे…
ब्रह्माणी, रूद्राणी तुम कमलारानी।
आगम-निगम-बखानी, तुम शिव पटरानी ॥8॥ जय अम्बे…
चौसठ योगिनि गावत, नृत्य करत भैरूँ।
बाजत ताल मृदंगा औ बाजत डमरू ॥9॥ जय अम्बे…
तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता।
भक्तन की दुख हरता सुख सम्पति करता ॥10॥ जय अम्बे…
भुजा चार अति शोभित, वर मुद्रा धारी।
मनवाञ्छित फल पावत, सेवत नर-नारी ॥11॥ जय अम्बे…
कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती।
(श्री) मालकेतु में राजत कोटिरतन ज्योती ॥12॥ जय अम्बे…
(श्री) अम्बेजी की आरती जो कोई नर गावै।
कहत शिवानंद स्वामी, सुख सम्पति पावै ॥13॥ जय अम्बे…
