फेंगशुई चीन के अलावा भी बाकी सारे देशों में लोकप्रिय है। इसे चीन की दार्शनिक जीवन शैली भी कहा जा सकता है। भारतीय बाजारों में भी फेंगशुई से संबंधित अधिकांश वस्तुएं आसानी से मिल ही जाती हैं

उज्जैन. चीनी वास्तुशास्त्र को हम फेंगशुई नाम से जानते हैं। फेंग यानि वायु और शुई यानि जल अर्थात फेंगशुई शास्त्र जल व वायु पर आधारित है। फेंगशुई चीन के अलावा भी बाकी सारे देशों में लोकप्रिय है। इसे चीन की दार्शनिक जीवन शैली भी कहा जा सकता है। भारतीय बाजारों में भी फेंगशुई से संबंधित अधिकांश वस्तुएं आसानी से मिल ही जाती हैं, जिनका उपयोग कर आप भी फेंगशुई का लाभ उठा सकते हैं। 

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1. घर, कार्यालय, शोरूम आदि के पूर्वी हिस्से में लकड़ी का फर्नीचर या लकड़ी से निर्मित वस्तुएं जैसे- अलमारी, शो पीस, पेड़-पौधे या फ्रेम जड़े हुए चित्र लगाने से मनचाहा लाभ मिलता है। 

2. घर में झरने, नदी आदि के चित्र उत्तर दिशा में लगाने चाहिए। घर में हिंसक तस्वीर कभी नहीं लगाएं, इससे नकारात्मकता आ सकती है।

3. भारतीय बाजारों में विंड चाइम (हवा से हिलने वाली घंटी) आसानी से उपलब्ध है। हवा चलने से जब यह टकराती हैं तो बहुत ही मधुर ध्वनि उत्पन्न करती है, जिससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

4. फेंगशुई के अनुसार बांस के पौधे सुख-समृद्धि के प्रतीक हैं। इनसे परिवार के सदस्यों को पूर्ण आयु व अच्छी सेहत मिलती है। घर की बैठक में जहां घर के सदस्य आमतौर पर एकत्र होते हैं, वहां बांस का पौधा लगाना चाहिए।

5. घर के दरवाजे में हैंडल पर सिक्का लटकाने से घर में संपत्ति बढ़ती है। आप तीन पुराने चीनी सिक्कों को लाल रंग के धागे अथवा रिबन में बांध कर अपने घर के हैंडल में लटका सकते हैं।

6. पूर्व दिशा में मिट्टी के एक छोटे से बर्तन में नमक भर कर रखें और हर चौबीस घंटे के बाद नमक बदलते रहें। इससे घर में नकारात्मक ऊर्जा नहीं आएगी। 

7. तीन हरे पौधे मिट्टी के बर्तनों में घर के अंदर पूर्व दिशा में रखें। इससे घर में खुशहाली आएगी। ध्यान रहे कि फेंगशुई में बोनसाई और कैक्टस को हानिकारक माना जाता है। इसलिए भूलकर भी इन्हें घर में न रखें।

8. फेंगशुई के अनुसार घर के बाहर काला कछुआ, लाल पक्षी, सफेद बाघ या हरा ड्रैगन हो तो घर की रक्षा अपने आप ही हो जाती है। काला कछुआ उत्तर दिशा, लाल पक्षी दक्षिण दिशा, सफेद बाग पश्चिम दिशा हरा ड्रैगन पूर्व दिशा का प्रतिनिधित्व करता है।