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Jagannath Temple Facts: जगन्नाथ मंदिर में गैर-हिंदुओं की एंट्री पर रोक, सिर्फ इन 3 धर्मों के लोगों को छूट
Jagannath Temple Entry Rules: पुरी में स्थित जगन्नाथ मंदिर हिंदुओं के प्रमुख तीर्थ स्थानों में से एक है। यहां दर्शन से जुड़े अनेक नियम हैं, जिनका पालन बहुत ही सख्ती से किया जाता है।

जगन्नाथ मंदिर के रोचक फैक्ट
Jagannath Temple Interesting Facts: हिंदू धर्म में चार धामों का विशेष महत्व बताया गया है। इन्हीं पवित्र धामों में से एक है जगन्नाथ पुरी। ओडिशा के पुरी में स्थित भगवान जगन्नाथ का मंदिर अपनी अनोखी परंपराओं और रहस्यों के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है। मंदिर से जुड़ी कई ऐसी बातें हैं, जिनका रहस्य आज भी लोगों के लिए जिज्ञासा का विषय बना हुआ है। हर साल आषाढ़ मास में निकलने वाली भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा को देखने देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु यहां आते हैं। खास बात ये है कि इस मंदिर गैर हिंदुओं को जाने की इजाजत नहीं है लेकिन फिर भी 3 अन्य धर्मों के लोग यहां दर्शन कर सकते हैं। आगे जानिए इस परंपरा के बारे में…

किन लोगों को जगन्नाथ मंदिर में प्रवेश की अनुमति है?
पुरी के जगन्नाथ मंदिर में प्रवेश को लेकर नियम काफी सख्त हैं। परंपरा के अनुसार, मंदिर में मुख्य रूप से हिंदू धर्म को मानने वाले लोगों को ही प्रवेश की अनुमति दी जाती है। दूसरे धर्मों के लोगों के लिए मंदिर में प्रवेश प्रतिबंधित है। यही वजह है कि कई प्रसिद्ध लोगों को भी मंदिर में प्रवेश नहीं मिल पाता है।
प्रधानमंत्री भी नहीं कर पाईं दर्शन
जगन्नाथ मंदिर में प्रवेश के नियम बहुत ही सख्त हैं, ये किसी के लिए भी बदले या तोड़े नहीं जाते। बताते हैं कि भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी साल 1984 में जगन्नाथ मंदिर में दर्शन करना चाहती थी लेकिन उन्हें भी यहां प्रवेश नहीं करने दिया क्योंकि उन्होंने धर्म बदलकर पारसी धर्म से जुड़े व्यक्ति फिरोज गांधी से विवाह किया था।
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इन 3 धर्मों के लोगों को मिलती है छूट
जगन्नाथ मंदिर में हिंदू धर्म के अलावा सिख, बौद्ध और जैन धर्म को मानने वाले लोगों को भी प्रवेश की अनुमति दी जाती है। इसके पीछे कारण है कि ये सभी हिंदू धर्म से ही निकले अलग-अलग पंथ हैं। ये स्वतंत्र रूप से कोई धर्म नहीं है। यही कारण है इन तीनों पंथों के मानने वाले जगन्नाथ मंदिर में दर्शन कर सकते हैं।
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क्यों मनाया ये नियम?
जगन्नाथ मंदिर में गैर हिंदुओं के प्रवेश पर लगी रोक के पीछे कईं कारण बताए जाते हैं। कहते हैं कि मुगल काल के दौरान जगन्नाथ मंदिर को तोड़ने के कईं असफल प्रयास किए गए। बाद में विद्वानों में इस मंदिर में हिंदुओं के अलावा अन्य किसी भी धर्म के लोगों के प्रवेश पर रोक लगा ताकि कोई विधर्मी मंदिर में प्रवेश कर इसे अपवित्र करने का प्रयास न कर पाए।
Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।
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