Til Chaturthi Vrat Katha: साल में आने वाली 4 सबसे बड़ी चतुर्थी में से एक का नाम तिल चतुर्थी है। इस बार तिल चतुर्थी का व्रत 6 जनवरी, मंगलवार को किया जाएगा। इस व्रत से जुड़ी एक रोचक कथा भी है जिसे इस दिन जरूर सुनना चाहिए।
Til Chaturthi Vrat Katha In Hindi: इस बार तिल चतुर्थी का व्रत 6 जनवरी, मंगलवार को किया जाएगा। तिल चतुर्थी का महत्व अनेक धर्म ग्रंथों में बताया गया है। इस व्रत में भगवान श्रीगणेश की पूजा की जाती है और उन्हें तिल से बनी चीजों जैसे लड्डू, गजक और रेवड़ी आदि का भोग लगाया जाता है। इस व्रत से जुड़ी एक रोचक कथा भी है जिसे इस दिन जरूर सुनना चाहिए, तभी व्रत का पूरा फल मिलता है। आगे पढ़िए तिल चतुर्थी की ये रोचक कथा…
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तिल चतुर्थी की कथा हिंदी में
काफी समय पहले किसी नगर में एक देवरानी और जेठानी रहती थीं। जेठानी बहुत अमीर थी और देवरानी गरीब। देवरानी भगवान श्रीगणेश की परम भक्त थी और हर चतुर्थी पर व्रत करती थी। परिवार के भरण-पोषण के लिए वह अपनी जेठानी के घर पर काम भी करती थी।
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एक बार सकट चौथ के मौके पर देवरानी के घर में कुछ भी पकाने को नहीं था और जेठानी ने उसे कुछ भी देने से मना कर दिया। जब उसका पति घर आया और उसे भोजन नहीं मिला तो क्रोध में आकर उसने अपनी पत्नी की पिटाई कर दी। देवरानी चुपचाप भूखे पेट सो गई।
रात भगवान श्रीगणेश देवरानी के घर आए तो दरवाजा खोलने को कहा। देवरानी को लगा ये कोई सपना है। उसने बोला ‘दरवाजा खुला है, आप अंदर आ जाईए।’ घर में आकर श्रीगणेश ने उससे भोजन मांगा तो देवरानी ने कहा ‘सुबह बथुआ पकाया था, वही चूल्हे पर रखा है, आप उसे खा लीजिए।’
बथुआ खाकर श्रीगणेश शौच के लिए स्थान के बारे में पूछा तो देवरानी ने कहा ‘घर के चारों कोने आपके लिये खुले हैं। इसके बाद श्रीगणेश ने पोंछने के लिये कुछ मांगा। भूखी एवं क्रोधित देवरानी ने कहा ‘आप मेरे मस्तक का ही उपयोग कर लीजिये।’ देवरानी को ये सब सपना ही लग रहा था।
अगले दिन जब देवरानी उठी तो उसने देखा कि उसका मस्तक और घर के चारों कोने हीरे-मोती और सोने से भरे हुए हैं। तब उसे समझ आया कि रात में भगवान श्रीगणेश सचमुच में आए थे। उसने भगवान को धन्यवाद दिया और धन तौलने के लिए जेठानी से तराजू मांगने गयी।
जेठानी से चालाकी से तराजू के नीचे गोंद लगा थी। जब देवरानी ने वह तराजू लौटाया तो उसने नीचे सोने की सिक्के चिपके हुए थे। जब जेठानी ने अपनी देवरानी से इस चमत्कार के बारे में पूछा तो उसने पूरी बात सच-सच बता दी। इसे सुनकर जेठानी भी चतुर्थी तिथि का व्रत करने लगी।
कुछ दिनों बाद श्रीगणेश जेठानी के घर भी आए। जेठानी के साथ भी सबकुछ वैसा ही हुआ जैसा देवरानी के साथ हुआ था। अगली सुबह जब जेठानी उठी तो उसने देखा कि पूरे घर में सोने-चांदी की जगह मल ही मल फैला हुआ है जिसकी दुर्गंध में सांस लेना भी मुश्किल हो रहा है।
तब कुछ विद्वानों ने जेठानी को सलाह दी कि अगर वह अपनी सम्पत्ति को देवरानी के साथ समान रूप से बांट दें तो गणेशजी उस पर प्रसन्न हो सकते हैं। जेठानी ऐसा ही किया। ऐसा करते ही जेठानी का घर फिर से साफ और स्वच्छ हो गया। इस कथा सो सुनने को भगवान श्रीगणेश की कृपा बनी रहती है।
Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।
