Vinayak Chaturthi 2025: नवंबर 2025 के अंतिम सप्ताह में विनायक चतुर्थी का व्रत किया जाएगा। इस दिन भगवान श्रीगणेश के साथ-साथ चंद्रमा की पूजा भी की जाएगी। ये व्रत करने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है।

Vinayak Chaturthi November 2025: हिंदू धर्म में भगवान श्रीगणेश को प्रथम पूज्य कहा गया है। श्रीगणेश से संबंधित अनेक व्रत-त्योहार भी हर महीने मनाए जाते हैं। विनायक चतुर्थी भी इन व्रतों से एक है। ये व्रत हर महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को किया जाता है। अगहन मास का विनायक चतुर्थी व्रत नवंबर के अंतिम सप्ताह में किया जाएगा। इस व्रत में भगवान श्रीगणेश के साथ-साथ चंद्रमा की पूजा भी की जाएगी। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. प्रवीण द्विवेदी से जानें नवंबर 2025 में विनायक चतुर्थी व्रत की सही डेट…

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नवंबर 2025 में कब करें विनायक चतुर्थी?

पंचांग के अनुसार, अगहन मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि 23 नवंबर, रविवार की शाम 07 बजकर 25 मिनिट से शुरू होगी जो 24 नवंबर, सोमवार की रात 09 बजकर 22 मिनिट तक रहेगी। चूंकि चतुर्थी तिथि का सूर्योदय व चंद्रोदय 24 नवंबर को होगा, इसलिए इसी दिन विनायक चतुर्थी का व्रत किया जाएगा।

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इस विधि से करें विनायक चतुर्थी व्रत-पूजा

- 24 नवंबर, सोमवार की सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद व्रत-पूजा का संकल्प लें। दिन में एक समय फलाहार कर सकते हैं या निराहार व्रत भी कर सकते हैं। ये आपकी इच्छा पर निर्भर है।
- शाम को शुभ मुहूर्त में श्रीगणेश की प्रतिमा घर के किसी साफ स्थान पर स्थापित कर पूजा शुरू करें। श्रीगणेश की प्रतिमा पर कुंकुम से तिलक करें, फूलों की माला पहनाएं और शुद्ध घी का दीपक जलाएं।
- इसके बाद अबीर, गुलाल, कुंकुम, चावल, इत्र, सुपारी, जनेऊ, दूर्वा आदि चीजें एक-एक करके श्रीगणेश को अर्पित करें। पूजा करते समय ऊं गं गणपतयै नम: मंत्र का जाप मन ही मन में करते रहें।
- अपनी इच्छा अनुसार भगवान को भोग लगाएं और आरती करें। चंद्रमा उदय हो जाए तो जल से अर्घ्य दें और फूल-चावल, कुमकुम आदि से पूजा करें। इसके बाद प्रसाद खा कर व्रत पूर्ण करें।
- इसके बाद स्वयं भोजन करें। इस विधि से विनायक चतुर्थी का व्रत करने से घर में सुख-समृद्धि और शांति बनी रहती है। इस व्रत का महत्व अनेक धर्म ग्रंथों में भी बताया गया है।

गणेशजी की आरती (Ganesh ji Ki Aarti)

जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा ॥
एक दंत दयावंत, चार भुजाधारी
माथे पे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी ॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा ॥
अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया ॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा ॥
हार चढ़ै, फूल चढ़ै और चढ़ै मेवा
लड्डुअन को भोग लगे, संत करे सेवा ॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा ॥
दीनन की लाज राखो, शंभु सुतवारी
कामना को पूर्ण करो, जग बलिहारी ॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा ॥


Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।