Ganesh Chaturthi 2025 Moonrise Time: धर्म ग्रंथों के अनुसार, गणेश चतुर्थी की रात भूलकर भी चंद्रमा के दर्शन नहीं करना चाहिए, ऐसा करना अशुभ माना जाता है। इस मान्यता से जुड़ी कईं रोचक कथाएं हैं। जानें गणेश चतुर्थी की रात क्यों न देखें चंद्रमा को?

Beliefs of Ganesh Chaturthi: धर्म ग्रंथों के अनुसार, हर महीने की चतुर्थी तिथि को भगवान श्रीगणेश की पूजा की जाती है और चंद्रमा के दर्शन के बाद ही व्रत पूर्ण किया जाता है। लेकिन गणेश चतुर्थी की रात चंद्रमा के दर्शन करने की मनाही है। मान्यता है कि ऐसा करना अशुभ होता है। इस बार गणेश चतुर्थी का पर्व 27 अगस्त, बुधवार को मनाया जा रहा है। यानी इस दिन आप भूलकर भी चंद्रमा के दर्शन न करें। आगे जानिए इस दिन कब होगा चंद्रोदय और क्यों न करें इसके दर्शन…

ये भी पढ़ें-

Ganesh Chaturthi 2025: श्रीगणेश के सीखें 10 लाइफ मैनेजमेंट टिप्स, हर कदम पर मिलेगी सफलता

Add Asianetnews Hindi as a Preferred SourcegooglePreferred

27 अगस्त 2025 चंद्रोदय का समय

पंचांग के अनुसार 27 अगस्त, बुधवार को यानी गणेश चतुर्थी की रात चंद्रोदय 09 बजकर 28 मिनिट पर होगा। चंद्रोदय होने के बाद भूलकर भी इसके दर्शन न करें नहीं तो आपके जीवन में कुछ अशुभ होने की संभावना बढ़ सकती है।

ये भी पढ़ें-

Unique Ganesh Mandir: श्रीगणेश के 5 अजब-गजब मंदिर, कोई ऊंचे पहाड़ पर तो कोई श्मशान में

क्यों न करें चंद्रमा के दर्शन?

प्राचीन कथाओं के अनुसार, चंद्रमा को अपने रूप पर बहुत अहंकार था। उसने जब श्रीगणेश का हाथी वाला मुख देखा जो उनके इस स्वरूप की हंसी उड़ाने लगा। ये देख श्रीगणेश को क्रोध आ गया और उन्होंने चंद्रमा को काला होने का श्राप दे दिया। चंद्रमा के क्षमा मांगने पर श्रीगणेश ने कहा कि ‘कृष्ण पक्ष में तुम्हारा प्रकाश कम होता जाएगा और शुक्ल पक्ष में बढ़ता रहेगा और भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को जो तुम्हारे दर्शन करेगा उस पर चोरी का आरोप लगेगा।’ यही कारण है गणेश चतुर्थी की रात चंद्रमा के दर्शन करने की मनाही होती है। एक कथा ये भी है कि भगवान श्रीकृष्ण ने गणेश चतुर्थी की रात चंद्रमा के दर्शन कर लिए थे, जिसके कारण उन पर स्मयंतक मणि की चोरी का आरोप लगा था।

भूलकर से कर लें चंद्रमा के दर्शन तो क्या करें?

गणेश चतुर्थी की रात यदि भूल से चंद्रमा के दर्शन हो जाएं तो नीचे लिखे इस मंत्र का जाप करना चाहिए। इससे आपके दोष का निवारण हो सकता है। ये है वो मंत्र…
सिंह: प्रसेन मण्वधीत्सिंहो जाम्बवता हत:।
सुकुमार मा रोदीस्तव ह्येष: स्यमन्तक:।।


Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।