हीरा, शुक्र ग्रह को मजबूत करने और वैवाहिक जीवन में खुशहाली लाने के लिए धारण किया जाता है। इसे अंगूठी, झुमके आदि में पहना जा सकता है। शुक्रवार के दिन सूर्योदय के समय इसे धारण करना शुभ माना जाता है।

हीरा दुनिया की एक अमूल्य वस्तु है। हीरे को किसी धातु से नहीं काटा जा सकता है। हीरे को काटने के लिए हीरे की ही जरूरत होती है। इसके लिए हीरे के चूर्ण से युक्त धातु की आरी का उपयोग किया जाता है। हीरा प्रकृति में पाया जाने वाला सबसे कठोर पदार्थ माना जाता है।

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कुंडली में शुक्र ग्रह को बलवान बनाने के लिए या शुक्र की दशा या अंतरदशा को बेहतर बनाने के लिए हीरा धारण किया जाता है। मान्यता है कि यह विवाह जल्दी कराने और पारिवारिक जीवन को सुखी बनाने में मददगार होता है। हीरे को अंगूठी, झुमके, लॉकेट, हार या नथ के रूप में धारण किया जा सकता है। आजकल मंगलसूत्र में भी हीरे जड़े जाते हैं।

जिन लोगों की कुंडली में गुरु और शुक्र ग्रह की युति या दृष्टि संबंध हो, उन्हें विवाह के लिए हीरा धारण करना चाहिए और विवाह के बाद इसे उतार देना चाहिए या नवरत्न धारण करना चाहिए। शुक्रवार के दिन सूर्योदय के एक घंटे के अंदर इसे धारण करना शुरू करना सबसे अच्छा माना जाता है। महिलाओं को इसे बायें हाथ में और पुरुषों को दाहिने हाथ की अनामिका उंगली में धारण करना चाहिए।

यह एक ऐसा रत्न है जो तुरंत फल देता है। इसलिए इसे धारण करने के बाद यदि कोई दोष या परेशानी हो तो इसे तुरंत उतार देना चाहिए। बहुत से लोग हीरा देखकर उसे पसंद करके खरीद लेते हैं और धारण कर लेते हैं। लेकिन हो सकता है कि इसकी वजह से उन्हें कई तरह की परेशानियां हो रही हों और वे इस पर ध्यान न दे पा रहे हों। ऐसे लोगों को इसे स्थायी रूप से धारण नहीं करना चाहिए। ऐसी परिस्थितियों से बचने के लिए हमेशा किसी ज्योतिषी की सलाह लेना ही उत्तम होता है।