Hanuman Ashtami 2024: हनुमानजी कलयुग के जीवंत देवता हैं। मान्यता है कि हनुमानजी की पूजा करने से हर तरह की परेशानियों से बचा जा सकता है। हनुमानजी से जुड़ी कईं रोचक बातें हैं जिनके बारे में कम ही लोगों को जानकारी है। 

Interesting facts related to Hanumanji: इस बार हनुमान अष्टमी का पर्व 23 दिसंबर, सोमवार को मनाया जाएगा। वैसे तो ये पर्व पूरे देश में मनाया जाता है लेकिन मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में इसकी विशेष मान्यता है। इस दिन हनुमानजी की पूजा और उपाय करने से हर तरह की परेशानी से बचा जा सकता है। हनुमानजी से जुड़ी ऐसी कईं बातें हैं जिनके बारे में कम ही लोगों को पता है जैसे कलयुग में हनुमानजी कहां रहते हैं आदि। हनुमान अष्टमी के मौके पर जानें ऐसी ही 5 रोचक बातें…

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कलयुग में कहां रहते हैं हनुमानजी?

महाभारत के एक प्रसंग के अनुसार, हनुमानजी पांडु पुत्र भीम से उत्तराखंड के गंधमादन पर्वत पर मिले थे। मान्यता है कि आज भी हनुमानजी उसी पर्वत पर किसी गुप्त स्थान पर रहकर तपस्या कर रहे हैं। कलयुग के अंत में जब कल्कि अवतार होगा, उस समय हनुमानजी भी अधर्म के नाश के लिे उनका साथ देने आएंगे।

क्या हनुमानजी का विवाह हुआ था?

सभी लोग ये जानते हैं कि हनुमानजी अविवाहित हैं, लेकिन पाराशर संहिता में हनुमानजी के विवाह का वर्णन है। उसके अनुसार, जब हनुमानजी सूर्यदेव से शिक्षा प्राप्त कर रहे थे तब कुछ बातें ऐसी थी, जिन्हें सीखने के लिए विवाहित होना जरूरी था। उस समय हनुमानजी ने अपने गुरु सूर्य की पुत्री सुवर्चला से विवाह किया और संपूर्ण ज्ञान प्राप्त किया। विवाह के बाद सुवर्चला तपस्या करने चली गईं।

हनुमानजी की गदा का नाम क्या है?

धर्म ग्रंथों के अनुसार, हनुमानजी के अनेक देवी-देवताओं ने कईं शक्तियां और अस्त्र-शस्त्र प्रदान किए थे। इनमें से कुबेरदेव ने कौमुदकी नाम की गदा हनुमानजी के भेंट स्वरूप दी थी। वो गदा बहुत ही भारी और चमत्कारी थी। हनुमानजी उस गदा को अपनी इच्छा अनुसार बड़ा और छोटा कर सकते थे।

हनुमानजी अपना शरीर बड़ा और छोटा कैसे कर लेते थे?

धर्म ग्रंथों के अनुसार, हनुमानजी के पास 8 प्रमुख सिद्धियां थी। इन 8 सिद्धियों में अणिमा और महिमा नाम की 2 सिद्धियां भी शामिल हैं। अणिमा सिद्धि से ही हनुमानजी अपने शरीर को अत्यंत छोटा कर लेते थे और महिमा सिद्धि से अपने शरीर को विशाल बना लेते थे।

हनुमानजी किस देवता के अवतार हैं?

शिवपुराण के अनुसार, हनुमानजी स्वयं महादेव के अवतार हैं। जब भगवान विष्णु ने मोहिनी अवतार लिया तो उनके रूप से देखकर शिवजी का वीर्यपात हो गया। उस वीर्य को ऋषि-मुनियों ने संग्रहित कर कान के माध्यम से माता अंजनी के गर्भ में स्थापित कर दिया, इसी के फलस्वरूप हनुमानजी का जन्म हुआ।


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