Indian Navy Abhiyan: भारतीय नौसेना ने 27 मार्च, सोमवार को नेवी वेलफेयर एंड वेलनेस एसोसिएशन के सहयोग से 7,500 किलोमीटर लंबी कार रैली की शुरुआत की। इसका नाम शं नो वरुण: रखा गया है। धर्म ग्रंथों में वरुणदेव को जल का देवता बताया गया है। 

उज्जैन. इंडियन नेवी (Indian Navy Abhiyan) ने ‘शं नो वरुण:’ (Shan no Varuna Abhiyan) नाम से एक अभियान 27 मार्च, सोमवार से शुरू किया है। नौसेना प्रमुख एडमिरल आर हरि कुमार ने वर्चुअल रूप से हरी झंडी दिखाकर इस यात्रा को रवाना किया। इस यात्रा का समापन 19 अप्रैल को गुजरात के भुज, लखपत में होगा। इस अभियान में 12 वाहनों का जत्था और 36 प्रतिभागी शामिल हैं। इस अभियान को जो नाम दिया गया है उसका संबंध जल के देवता वरुण से है। आगे जानिए कौन हैं जल के देवता वरुण और क्या से ‘शं नो वरुण:’ का अर्थ…

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जानें कौन हैं वरुणदेव?
धर्म ग्रंथों के अनुसार, वरुणदेव जल के देवता हैं। इनकी पत्नी का नाम चर्षणी है। इनका वाहन मगरमच्छ है, जो जल में रहने वाला शक्तिशाली प्राणी है। इन्हें महर्षि कश्यप का पुत्र कहा जाता है। ऋग्वेद में भी इनका वर्णन मिलता है। देवताओं में तीसरा स्थान वरुण का माना जाता है। वरुण पश्चिम दिशा के लोकपाल हैं। वरुण देवता ऋतु के संरक्षक हैं इसलिए इन्हें ऋतस्यगोप भी कहा जाता था। वाल्मीकि रामायण के अनुसार, जब रावण विश्व विजय पर निकला तो उसने वरुणदेव को भी पराजित कर दिया था।

क्या है ‘शं नो वरुण:’ का अर्थ?
विद्वानों के अनुसार ‘शं नो वरुण:’ का अर्थ है वरुण हमारे लिए शुभ हों। इंडियन नेवी द्वारा दिए गए ‘शं नो वरुण’ अभियान का भी यही अर्थ है। यही लाइन इंडियन नेवी के ध्वज पर भी लिखी होती है। पहले इंडियन नेवी के ध्वज पर लाल क्रॉस का निशान होता था, जिसे कुछ समय पहले ही हटाया गया और उसके स्थान पर नेवी के ध्वज पर तिरंगा और अशोक चक्र का चिह्न है। इसके नीचे लिखा है- शं नो वरुण:।

क्या है इस अभियान का उद्देश्य?
इंडियन नेवी द्वारा शुरू किए गए शं नो वरुण: अभियान के उद्देश्य काफी विस्तृत है। इंडियन नेवी के कमोडोर साहू के अनुसार, इस अभियान का आजादी का अमृत महोत्सव मनाना और अग्निपथ योजना सहित इंडियन नेवी में नौकरियों के अवसरों के बारे में युवाओं को बताना है। इस अभियान के अंतर्गत समुद्र तटों की सफाई और पर्यावरण के प्रति अवेयरनेस के कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।


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