Kartik Maas 2025: कार्तिक हिंदू धर्म में सबसे पवित्र महीना माना जाता है। इस महीने में स्नान, पूजा और दान करने से कई गुना फल मिलता है। ब्रह्म मुहूर्त में उठकर पवित्र नदियों या जलाशयों में स्नान करने से पापों का नाश होता है।

Kartik Maas 2025: हिंदू धर्म में कार्तिक माह को वर्ष का सबसे पवित्र महीना माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस माह में भगवान विष्णु स्वयं जल में निवास करते हैं, इसलिए इस दौरान किए गए किसी भी पुण्य कार्य का कई गुना फल मिलता है। ऐसा कहा जाता है कि कार्तिक माह में सुबह जल्दी उठकर स्नान, पूजा, दीपदान और दान करने से मन को शांति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि बढ़ती है। इस माह की एक और खासियत देवउठनी एकादशी है, जब भगवान विष्णु चार महीने की निद्रा के बाद जागते हैं।

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कार्तिक स्नान 2025: आरंभ और समाप्ति तिथियां

  • कार्तिक माह का आरंभ: 7 अक्टूबर 2025, मंगलवार
  • पहला कार्तिक स्नान: 8 अक्टूबर 2025, बुधवार
  • कार्तिक पूर्णिमा (अंतिम स्नान): 5 नवंबर 2025, बुधवार

स्नान का शुभ मुहूर्त

कार्तिक पूर्णिमा पर स्नान का विशेष महत्व है और इसे बेहद पुण्यकारी माना जाता है। इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में सुबह 4:30 बजे से 5:30 बजे तक है, जो स्नान, ध्यान और पूजा के लिए सर्वोत्तम समय माना जाता है। कार्तिक पूर्णिमा पर सुबह 4:52 बजे से 5:44 बजे तक का समय विशेष रूप से शुभ माना जाता है, क्योंकि पवित्र नदियों में स्नान करने से पाप धुल जाते हैं और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है।

कार्तिक स्नान की सही विधि

  • प्रतिदिन ब्रह्म मुहूर्त में उठें।
  • हो सके तो किसी नज़दीकी पवित्र नदी, सरोवर या जलाशय में स्नान करें।
  • यदि बाहर जाना संभव न हो, तो नहाने के पानी में गंगाजल की कुछ बूंदें मिला लें।
  • स्नान करते समय भगवान विष्णु का स्मरण करें और संकल्प करें, "मैं धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति के लिए यह पवित्र स्नान कर रहा हूं।"
  • स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें और भगवान विष्णु, भगवान कृष्ण और तुलसी माता की पूजा करें।
  • प्रतिदिन तुलसी के पौधे के पास घी का दीपक जलाएं।

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कार्तिक स्नान के लाभ

  • अनजाने में किए गए पाप नष्ट हो जाते हैं।
  • मोक्ष प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।
  • भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
  • जीवन में धन, सुख और समृद्धि बनी रहती है।
  • शरीर स्वस्थ और मन शांत रहता है।
  • नियमित पूजा-अर्चना से आध्यात्मिक प्रगति होती है।

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Disclaimer: इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।