Khatu Shyam Mandir closed 2025: राजस्थान के सीकर स्थित खाटू श्याम मंदिर 6 सितंबर रात 10 बजे से 8 सितंबर 2025 शाम 5 बजे तक बंद रहेगा। इसकी वजह 7-8 सितंबर को लगने वाला चंद्रग्रहण है। ग्रहण समाप्ति के बाद बाबा श्याम को स्नान कराकर श्रृंगार किया जाएगा।

Khatu Shyam Mandir Closed 2025: राजस्थान के सीकर में स्थित खाटू श्याम मंदिर वर्षों से भक्तों की आस्था का केंद्र रहा है। दूर-दूर से रोज़ाना बड़ी संख्या में भक्त यहां पहुंचते हैं और खाटू श्याम बाबा के दर्शन करते हैं। अगर आप सितंबर में खाटू श्याम मंदिर जाने का प्लान बना रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए है। खाटू श्याम मंदिर 48 घंटे यानी 2 दिनों के लिए बंद रहने वाला है। इस दौरान भक्त बाबा के दर्शन नहीं कर पाएंगे। आइए जानते हैं ऐसा क्यों किया जा रहा, तो इस लेख को पूरा पढ़ें आपके सभी सवाल का जवाब आपको यहां मिलेगा।

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खाटू श्याम मंदिर कब-कब रहेगा बंद?

खाटू श्याम मंदिर 6 सितंबर 2025 से 8 सितंबर 2025 तक बंद रहेगा। 6 सितंबर की रात 10 बजे से 8 सितंबर की शाम 5 बजे तक खाटू श्याम मंदिर के कपाट भक्तों के लिए बंद रहेंगे। 8 सितंबर की शाम को खाटू बाबा को स्नान कराया जाएगा और तिलक-श्रृंगार किया जाएगा, जिसके बाद ही भक्त बाबा के दर्शन कर पाएंगे। श्री श्याम मंदिर समिति ने श्रद्धालुओं से अनुरोध किया है कि वे इस समय खाटू श्याम जी के दर्शन हेतु न आएँ और मंदिर की व्यवस्थाओं में सहयोग करें।

खाटू श्याम मंदिर क्यों बंद रहेगा?

दरअसल, 7 सितंबर 2025 को चंद्र ग्रहण लगने वाला है, जो 8 सितंबर तक रहेगा। इसका सूतक काल ग्रहण से पहले ही मान्य हो जाता है, इसलिए खाटू श्याम मंदिर 6 सितंबर की रात 10 बजे से 8 सितंबर की शाम 5 बजे तक बंद रहेगा। फिर 8 सितंबर को बाबा श्याम के तिलक के बाद बाबा के दर्शन होंगे।

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ग्रहण के दौरान मंदिर क्यों बंद रहते हैं?

भारत में चंद्र ग्रहण 7 सितंबर 2025 को रात 9:58 बजे से शुरू होकर 8 सितंबर को देर रात 01:26 बजे समाप्त होगा। इस दौरान सभी मंदिरों के कपाट बंद रहेंगे। धार्मिक मान्यता है कि ग्रहण के समय वातावरण में अशुभ और नकारात्मक ऊर्जाएं बढ़ जाती हैं, इसलिए मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं ताकि नकारात्मक प्रभाव मंदिर की पवित्रता पर न पड़े।

ग्रहण में क्यों बंद कर दिए जाते हैं मंदिर ?

धार्मिक शास्त्रों के अनुसार, ग्रहण के दौरान सूर्य और चंद्रमा की किरणें शुद्ध नहीं होती हैं, इसलिए इस समय देवताओं की मूर्तियों को कपड़े से ढक दिया जाता है या मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं। ग्रहण समाप्त होने के बाद, मंदिरों को शुद्ध किया जाता है और देवताओं की मूर्तियों को स्नान कराया जाता है। इसके बाद ही पुनः पूजा शुरू होती है।

क्यों प्रसिद्ध है खाटू श्याम बाबा का मंदिर?

भारत के हर मंदिर के निर्माण के पीछे कोई न कोई रहस्य छिपा होता है। ऐसा ही एक रहस्यमयी और चमत्कारी मंदिर है खाटू श्याम जी का मंदिर। राजस्थान के सीकर जिले में स्थित यह मंदिर बेहद प्रसिद्ध है। यहां आज लाखों लोग न केवल खाटू बाबा में आस्था रखते हैं, बल्कि हर मौके पर इस मंदिर में भक्तों की भीड़ उमड़ती है। मान्यता है कि यहां भगवान खाटू के दर्शन करने वालों के जीवन की हर समस्या का समाधान हो जाता है। आपको बता दें कि बाबा को हारे का सहारा कहा जाता है। इसलिए लोग अपनी परेशानियां लेकर यहां आते हैं।

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कौन हैं खाटू श्याम बाबा?

दरअसल, द्वापर या महाभारत काल में खाटू श्याम बाबा बर्बरीक के नाम से जाने जाते थे। वे तीन बाणों से युक्त एक शक्तिशाली योद्धा थे। वे पांडव पुत्र भीम के पौत्र और घटोत्कच के पुत्र थे। बर्बरीक की माता का नाम हिडिम्बा था।

बर्बरीक को क्या मिला था वरदान

कहते हैं कि महाभारत के दौरान श्री कृष्ण ने बर्बरीक से उसका सिर मांग लिया था। बर्बरीक ने बिना कुछ सोचे-समझे अपना सिर दान कर दिया। तब श्री कृष्ण प्रसन्न हुए और वरदान दिया कि कलियुग में तुम मेरे नाम से जाने जाओगे। जो भी भक्त तुम्हारे पास आएगा, तुम उसका सहारा बनोगे। इसीलिए उसे हारे हुए का सहारा कहा जाता है।